नई दिल्ली, 9 अक्टूबर.पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों की रिलीज पर रोक क्या लगी, वहां के सिनेमा मालिकों पर गाज गिर गई है। एक तरफ इस फैसले से फिल्म निर्माताओं और कलाकारों में खुशी का माहौल है तो दूसरी तरफ सिनेमाघर मालिक मातम कर रहे हैं-

दरअसल कलाकारों की अपील पर भी सरकार ने ये फैसला किया लेकिन ये फैसला उन सिनेमाघरों के मालिकों के लिए आघात है जिनकी रोज रोटी भारतीय फिल्मों की रिलीज पर ही चलती थी। ये बात पाकिस्तान की सरकार के साथ साथ कलाकार भी जानते हैं कि पाकिस्तान की आवाम भारतीय फिल्मों की दीवानी है।

यहां भारत की फिल्मों और संगीत पर रोक लगने पर चोरी छिपे उनकी बिक्री होती रहेगी। इसका मतलब ये हुआ कि पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन पर रोक का न तो पाकिस्तान को फायदा होगा और न ही भारत को । इसका सबसे बड़ा फायदा उन कालाबाजारियों को होगा जो पाकिस्तान में चोरी छिपे भारतीय फिल्में और संगीत बेचेंगे। दरअसल पाकिस्तान सरकार ने भारतीय फिल्मों पर रोक ये कहते हुए लगाई है कि भारतीय फिल्मों में मौजूद अश्लीलता और खुलापन पाकिस्तानी युवाओं को गुमराह कर रहा है।

अफगानिस्तान में तो भारतीय मनोरंजक चैनलों पर पहले ही रोक लग चुकी है। अब पाकिस्तान भी संस्कृति के नाम पर भारतीय फिल्म और संगीत को रोकना चाह रहा है। यूं तो फिल्म मेकिंग के मामले में पाकिस्तान में भी कई अच्छी फिल्में बनती हैं लेकिन असल बात होती है तकनीकी और बजट की। इस मामले में पाकिस्तानी भारतीय इंडस्ट्री से मार खा जाते है। तकनीक और बजट के हिसाब से देखा जाए तो पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री बॉलीवुड से दो दशक 25 साल पीछे चल रही है।

भारतीय फिल्मों की स्टोरी, लोकेशन, स्टार कास्ट और तकनीकी पाकिस्तानी आवाम को दीवाना कर देती है और यही वजह है कि पाकिस्तानी फिल्में भारतीय फिल्मों के आगे पानी भी नहीं मांग पाती। ईद के मौकों पर हर सिनेमाघर का मालिक अपने सिनेमाघर में भारतीय फिल्म लगाना चाहता है। इससे पाकिस्तानी कलाकारों और फिल्म निर्माताओं को रोजी रोटी के लाले पड़ गए हैं।

अगर इन सिनेमाहालों में पाकिस्तानी फिल्में लगती हैं तो कोई देखने नहीं आता लेकिन अगर यहीं भारतीय फिल्म लग जाए तो भीड़ जुट जाती है। इसके चलते कोई भी वितकर पाकिस्तानी फिल्मो को खरीदना घाटे का सौदा बनता है। कुछ पाकिस्तानी फिल्में चलती भी हैं तो वो पंजाबी में बनती है। उर्दु और पश्तो भाषा में बनने वाली फिल्मों का जमाना खत्म हो गया है। अब यहां केवल बॉलीवुड के जलवे हैं और पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री खत्म होने के कगार पर है। पाकिस्तान की इस रोक के बाद भारत के कलाकारों में भी रोष व्याप्त है। अब भारतीय कलाकार भी मांग कर रहे हैं कि पाकिस्तानी कलाकारों को भारत न आने दिया जाए। भारतीय कलाकारों की यह शिकायत रही है कि पाकिस्तानी गायकों और कलाकारों को भारत में बहुत तरजीह मिलती है, जबकि भारतीय कलाकारों को पाकिस्तान अपने यहां आने नहीं देता है।

उन्हें वहां कार्यक्रम करना तो छोड़ दीजिए, वीजा तक नहीं दिया जाता है। जबकि भारत में अदनान सामी, राहत फतेह अली खान, आबिदा परवीन, रहमत खां जैसे कई पाकिस्तानी कलाकार कई सालों से रह रहे हैं और करोड़ों कमा रहे हैं। खास बात ये है कि इनमें से न कोई टैक्स देता है और न ही हमारे देश की अर्थव्यवस्था में कोई योगदान करता है।

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