नरसिंहगढ़ 20 दिसम्बर, नससे. समय के साथ राजपूत समाज को भी बदलना होगा. जो समाज समय के साथ नहीं बदलेगा वह टूटकर  बिखर जायेगा. हमें अगर आने वाली पीढ़ी का भविष्य तय करना है तो हमें तलवार की बजाय कलम थामना होगी. जब तक बच्चे शिक्षित नहीं होंगे. तब तक समाज का विकास नहीं हो सकता.

उपरोक्त बात पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने आज राजपूत समाज की धर्मशाला के भूमिपूजन अवसर पर संबोधित करते हुए कही. श्री सिंह ने कहा कि  बच्चों को अच्छी शिक्षा देते हुए समाज के जरुरतमंदों को  सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना चाहिये. श्री सिंह ने कहा कि हमें सामाजिक कुरीतियों को त्यागना होगा. मृत्युभोज, शराब, अन्य व्यसन तथा फिजूलखर्ची पर रोक लगना चाहिये. क्योंकि इससे कर्जो में व्यक्ति उलझकर अपना विकास नहीं कर पाता है. श्री सिंह ने धर्मशाला निर्माण की नींव को समाज का एक अच्छा प्रयास बताया. इस अवसर पर पूर्व संसदीय सचिव श्री राज्यवर्धन सिंह, समाज के जिलाध्यक्ष श्री छगन सिंह सिसौदिया, जिला भाजपाध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह चौहान, पीसीसी सदस्य मदरुप सिंह, विश्वनाथप्रताप सिंह, महेन्द्र परिहार, गोपाल सिंह परमार, जिला इंकाध्यक्ष रामचन्द्र दांगी, विधायक पुरुषोत्तम दांगी, हेमराज कल्पोनी, ब्लाक इंकाध्यक्ष गोविन्द सिंह गुर्जर, पूर्व नपाध्यक्ष मंजूलता शिवहरे, पूर्व विधायक धूलसिंह यादव आदि कई समाज बंधु एवं प्रमुख लोग उपस्थित थे.

पिता की स्मृति में हॉल बनाने की घोषणा-पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने इस अवसर पर अपने उद्बोधन में कहा कि नरसिंहगढ़ से मेरा बचपन का नाता है. उन्होंने अपनी स्मृतियां ताजा करते हुए बताया कि वे जब छोटे थे तब नरसिंहगढ़ राजमहल में करीब सात दिनों तक रुक चुके है. नरसिंहगढ़ के आसपास हमारी रिश्तेदारी और पारिवारिक संबंध आज भी बने हुए है. इन पारिवारिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने के लिये मैं अपने पूज्य पिताश्री स्व. बलभद्र सिंह की स्मृति में समाज की उक्त धर्मशाला, छात्रावास भवन में एक हॉल का निर्माण अतिशीघ्र कराऊंगा. श्री सिंह ने इस अवसर पर समाज की धर्मशाला निर्माण में 11 लाख रुपये की घोषणा करने वाले सांसद श्री नारायण सिंह अमलाबे, नरसिंहगढ़ विधायक श्री मोहन शर्मा द्वारा ढाई लाख रुपये देने की घोषणा करने पर, ओढ़ी बाग वाली माताजी द्वारा दो लाख रुपये दिये जाने की घोषणा पर सभी का समाज की ओर से धन्यवाद दिया.

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