भोपाल, 2 मई. राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा ग्रीष्मावकाश में प्रदेश के शिक्षकों को दिये जा रहे प्रशिक्षण एवं ग्रीष्मावकाश में लगातार हो रही कटौत्री पर म.प्र. तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने रोष व्यक्त करते हुए अफसरशाही के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी.

संघ की प्रांतीय शिक्षा समिति के संयोजक अरविंद भूषण एवं महासचिव सुधीर कलसे ने बताया कि ग्रीष्मावकाश में अधिकांश शिक्षक अपने गृह निवास जाने, पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्वों के निर्वाहï आदि में व्यस्त रहते है. भीषणगर्मी भी प्रशिक्षण की सफलता को प्रभावित करेंगी, शिक्षकों को ग्रीष्मावकाश में प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाना नैसर्गिक न्याय के विपरीत है. संघ के प्रांतीय संयोजक अरविंद भूषण, महासचिव सुधीर कलसे, प्रांतीय सचिव कैलाश सक्सेना, संभागीय संयोजक कैलाश धौलकर, जिला संयोजक सुभाष सक्सेना, महिला प्रकोष्ठ की संयोजिका फाल्गुनी पटेल, तहसील संयोजक अजय श्रीवास्तव एवं पूर्व की भांति ग्रीष्माकवश को 60 दिवस करने संबंधी निर्णय नहीं लिया जाता है तो प्रदेश के शिक्षकों के बढ़ते असंतोष को देखते हुये निश्चित ही संघ को आंदोलनात्मक निर्णय लेने के लिये बाध्य होना पड़ेगा.

गरीबों के साथ दृष्टिïकोण अपनाएं-भारत सरकार के योजना आयोग ने 19 मार्च को गरीबी संबंधी आकड़े जारी करते हुए बताया है कि गाँव में प्रतिदिन 22.42 रुपये और शहरों में प्रतिदिन 28.65 रुपये से ज्यादा खर्च करने वाले गरीबी रेखा से उपर होंगे. इस संबंध में भोपाल जिले के ग्रामीण क्षेत्र में भाजपा परवलिया मंडल ने धरना प्रदर्शन मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य सूरज सिंह मारण की अध्यक्षता में किया. धरने में महामहिम से निवेदन किया गया कि गरीबों के हाथ में न्याय करते हुए यथार्थी परक, दृष्टिïकोण एवं व्यक्ति के पोषक आहार पैमाना निर्धारित करें. स्वास्थ्य, स्वच्छता, साफ पेयजल, शैक्षणिक, सुविधा एवं रहन-सहन की सुविधाओ की उपलब्धता के आधार पर गरीबी का

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