भोपाल में लोकायुक्त पुलिस की छापेमारी

साहब के घर जूतों के डिब्बों में मिलीं नोटों की गड्डियां

भोपाल, 10 मई। मध्य प्रदेश में भ्रष्ट अधिकारियों पर लोकायुक्त का शिकंजा कसने का सिलसिला जारी है। भोपाल में लोकायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर ए एन मित्तल के घर पर छापेमारी की है। शुरुआती जांच के मुताबिक छापे में अब तक 100 करोड़ की संपत्ति का खुलासा हो चुका है।

लोकायुक्त की टीम ने जब गुरुवार सुबह कार्रवाई शुरू की तो उन्हें जूते के डिब्बों और पॉलीथीन में भरकर रखे नोटों के बंडल मिले। इनमें से कई बंडल हजार-हजार के नोटों के थे। मित्तल पर आय से अधिक संपति का आरोप है। छापेमारी के बाद शुरुआती जांच में मित्तल के पास से 50 करोड़ से अधिक का की संपत्ति का अंदाजा लगाया गया है। इसमें भोपाल में 50 एकड़ जमीन, शांति निकेतन इलाके में एक आलीशान मकान, दो लक्जरी कार, साथ ही बड़ी तादाद में ज्वैलरी और कैश मिला है। यही नहीं, लोकायुक्त को छापे में विदेशी मुद्राएं, 5 विदेशी नस्त के कुत्ते भी मिले हैं। मित्तल के खिलाफ कई घोटाले मामले में पहले ही जांच चल रही है। मित्तल पर मेडिकल एक्युप्मेंट्स और फार्मा कम्पनियों के साथ सांठ-गांठ करके करोड़ों की मोटी घूस लेने का आरोप है। स्वास्थ्य विभाग मित्तल के डायरेक्टर के अलावा इसी महकमे में ऑडिटर के पद पर काम करने वाले गणेश किरार के घर पर भी लोकायुक्त ने छापेमारी की।

किरार के यहां सवा दस लाख रुपए नकद, मानसरोवर कॉम्पलेक्स और आमेर कॉम्पलेक्स एमपी नगर में दो दुकानें, रायसेन में 20 एकड़ जमीन, भैरोंपुर में जमीन और साकेत नगर में दो मकान मिले हैं। लोकायुक्त सूत्रों के अनुसार किरार स्वास्थ्य विभाग की खरीदी से जुड़ा हुआ है और कोई भी बड़ा ऑर्डर किरार की जानकारी के बिना नहीं होता। दोनों के पास से कई बैंक खातों का भी ब्यौरा मिला है7 हाल ही में मध्य प्रदेश के दर्जनों सरकारी अफसरों के घरों पर लोकायुक्त पुलिस ने छापे मारे गए हैं जिनके पास से करोड़ों की संपत्ति बरामद हुई थी।

एनआरएचएम घोटाले में प्रदीप शुक्ला गिरफ्तार

लखनऊ. यूपी मेडिकल घोटाले में एक और बड़े अफसर पर शिकंजा कसा है। इस मामले में आरोपी और वरिष्ठ आइएएस अधिकारी प्रदीप शुक्ला को सीबीआइ ने लखनऊ के अमौसी हवाईअड्डे से हिरासत में लिया है।

शुक्ला को हिरासत में लेकर सीबीआइ पूछताछ कर रही है। माया सरकार में चार साल तक स्वास्थ्य महकमे के मुख्य सचिव रहे शुक्ला के कार्यकाल में एनआरएचएम घोटाला हुआ। इस मामले में शुक्ला का नाम मुख्य आरोपी के रूप में हैं और तीन एफआइआर में भी इनका नाम है। गिरफ्तार करने से पहले भी सीबीआइ ने 22 मार्च को उनसे करीब नौ घटे पूछताछ की थी। इस पूछताछ के दौरान सीबीआइ ने उनसे 2009-2011 के बीच अस्पतालों के निर्माण कार्य के लिए दिए गए 1170 करोड़ रुपये के ठेके के बाबत सवाल किए थे। इस बाबत सीबीआइ ने उनसे ओपन टेंडर न दिए जाने की वजह भी जाननी चाही और 1546 करोड़ रुपये एक गैरपंजीकृत सोसायटी को अवैध तरीके से खर्च करने की वजह पर सवाल पूछे गए। उस समय सीबीआइ शुक्ला के जवाब से संतुष्ट नहीं हो पाई थी। तभी से उनके ऊपर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई थी। उन्होने पूछताछ के दौरान कुछ नौकरशाहों के नाम भी उजागर किए हैं।

कौन हैं प्रदीप शुक्ला?
एनआरएचएम में गिरफ्तार किए गए प्रदीप शुक्ला 1981 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। एनआरएचएम घोटाले में उनसे मार्च 2012 में भी पूछताछ की गई थी। इस घोटाले में सीबीआइ उनसे अभी तक तीन बार पूछताछ कर चुकी है। एनआरएचएम में एक आइएएस अधिकारी के तौर पर प्रदीप शुक्ला की यह पहली गिरफ्तारी है।

– परिवार कल्याण विभाग में प्रधान सचिव बनने से पहले वह परिवहन विभाग के प्रधान सचिव रहे थे।

– एनआरएचएम घोटाला उजागर होने की शिकायत के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने उनका तबादला रिवेन्यू बोर्ड [ज्यूडिशियल] में सदस्य के तौर पर कर दिया गया था।
– प्रशासनिक अधिकारी प्रदीप शुक्ला परिवार कल्याण के प्रधान सचिव रहने के दौरान 18 बार विदेश यात्रा पर गए जिसके लिए राज्य सरकार ने करीब 35 लाख रुपये का खर्चा किया था।

पटवारी रंगे हाथों गिरफ्तार

जबलपुर. लोकायुक्त पुलिस के एक दल ने पाटन तहसील के पटवारी प्रेमलाल झारिया को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

लोकायुक्त पुलिस के सूत्रों के अनुसार कटंगी तहसील के काटीगांव निवासी किसान नरेन्द्र सिंह ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी कि झारिया उसकी जमीन के सीमांकन के लिए 5 हजार रुपये रिश्वत के रूप में मांग रहा है। लोकायुक्त पुलिस के एक दल ने योजनाबद्ध ढंग से बुधवार शाम गोहलपुर थानान्तर्गत माढोताल में पटवारी के निवास पर उसे 5 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

8 महीने में सामने आई 250 करोड़ की काली कमाई
लोकायुक्त ने पिछले 8 महीनों में छापा मारकर करीब 250 करोड़ का काला खजाना बरामद किया है। यानि रोजाना औसतन एक करोड़ की काली कमाई उजागर हो रही है। प्रदेश में सरकारी मुलाजिमों के पास से करोड़ों की काली कमाई बरामद होने का सिलसिला जारी है। कुछ दिनों पहले लोकायुक्त के छापों में उज्जैन के एक पटवारी के ठिकानों से तकरीबन 4 करोड़ की संपत्ति का खुलासा हुआ था। पिछले 1 साल की कार्रवाई में कई ऐसे ही अफसर पकड़े गए हैं।  कांग्रेस इसे शिवराज का भ्रष्ट राज बता रही है तो सूबे के गृहमंत्री का कहना है कि दिग्विजय राज में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई हो रही है। साल की शुरुआत में ही भोपाल में आदिवासी विकास विभाग के अतिरिक्त संचालक देवेंद्र परमार के ठिकानों से 2 करोड़ 75 लाख, उज्जैन नगर निगम में राजस्व निरीक्षक कैलाशचंद सांगते के पास से 4 करोड़ 75 लाख, रतलाम में सहकारिता विभाग के सब ऑडिटर आनंद पाठक के ठिकानों से 9 करोड़ की संपति बरामद हो चुकी है।

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