वन विभाग में मचा हड़कंप, आनन फानन में जारी किए जांच के आदेश

बागली/देवास, 13 नवंबर. कभी सागवान के घने जंगलों की वजह से पहचाने जाने वाले बागली इलाके के जंगल इन दिनों लकड़ी तस्करों के निशाने पर है. वन विभाग के कुछ अफसरों की मिली भगत से यहां सरेआम जंगल काटे जा रहे हैं. नवभारत ने अपने खुफिया कैमरे की मदद से जंगल का मुआयना किया तो जो हकीकत सामने आयी, वह चौंकाने वाली है.

दिन-शनिवार, तारीख -12 नवंबर 2011 समय-दिन के 11 बजे नवभारत की टीम ने बागली के पास चंद्रकेशर नदी के किनारे आगुर्ली और साजड़ी बीट पहुंची तो हम यह देखकर हैरान दह गए कि इंदौर बैतूल हाईवे से चंद किमी की दूरी पर की जंगल काटने का गोरखधंधा चल रहा है. इतना ही नहीं ये लोग बड़े-बड़े सागवान के पेड़ काटकर सरेआम उनकी सिल्लीयां बना रहे हैं. जंगल के बीच बेखौफ होकर ये जंगल के दुश्मन कुछ हजार रुपए के लालच में प्राकृतिक विरासत को सरेआम नेस्तनाबूद करने में जुटे हैं.  हमारी टीम ने खुफिया कैमरे की मदद से इस गोरखधंधे को अपने कैमरे में कैद किया. नवभारत ने यहां के लकड़ी तस्करों से भी अपनी पहचान छूपा कर सागौन की लकड़ी के ग्राहक बनकर बात की तो लकड़ी तस्करों ने कुछ हजार रुपयों में ही हमें लाखों रुपए की लकड़ी देने का भरोसा दिला दिया.

तस्करों ने यहां तक बताया कि आपको डरने की कोई जरूरत नही, हम लोग फर्जी टीपी के सहारे आपकी लकड़ी को इंदौर या देवास में आपके घर तक भी पहुंचा सकते हैं. नवभारत टीम ने पूरे जंगल में साफ तौर पर देखा कि कई लोग साईकिलों और बैलगाडिय़ों के सहारे बेशकीमती सागवान की लकडिय़ों की तस्करी सरेआम कर रहे हैं. यहां लकड़ी तस्करों के संबंध इलाके के बड़े नेताओं और अफसरों तक हैं. यही वजह है कि छोटे अधिकारी और कर्मचारी भी इनसे खौफ खाते हैं. चंद्रकेशर नदी के आसपास जंगल में पेड़ों पर कई जगह घावटी के निशान भी मिले. दरअसल पेड़ों में घावटी लगाकर पेड़ों को  सूखा दिया जाता है और इसके बाद उसे काटकर लकड़ी की तस्करी की जाती है. वहीं जंगल का हिस्सा अतिक्रमण कर बाद में खेती लायक बना लिया जाता है.

नवभारत टीम से मिली जानकारी वाकई चौंकाने वाली है, इस पूरे मामले को खुद गंभीरता के साथ देखूंगा और जंगल तस्करों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी. यदि वन विभाग का कोई अधिकारी-कर्मचारी भी इसमें शामिल है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा.
– बीएस अन्नागैरी
वनमंडल अधिकारी, देवास

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