पन्ना, 5 फरवरी. बुन्देलखण्ड क्षेत्र के जंगलों में यहां के बाघों का वजूद अभी भी कायम है. जिला मुख्यालय पन्ना से लगभग 10 किमी. दूर दहलान चौकी व लखनपुर सेहा के जंगल में बाघ के ताजे पग मार्क मिले हैं. यहां के जंगल में बाघ की मौजूदगी के संकेत मिलने पर पन्ना टाइगर रिजर्व की टीम इस वनराज की खोज खबर लेने के अभियान में जुट गई है.

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2009 में पन्ना टाइगर रिजर्व व इस इलाके के जंगल को बाघ विहीन घोषित कर दिया गया था. यहां के बाघों का पूरी तरह से सफाया हो जाने की अधिकृत घोषणा के बाद पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की वंशवृद्धि के लिए बाघ पुनस्र्थापना योजना शुरू हुई, जिसको उल्लेखनीय सफलता मिली. पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक आर.श्रीनिवास मूर्ति व उनकी टीम की अथक मेहनत व कुशल प्रबंधन का नतीजा है कि मौजूदा समय पन्ना टाइगर रिजर्व में बाहर से लाये गये बाघ व बाघिनों के अलावा यहां पर जन्में आठ से भी अधिक शावक मौजूद हैं. आम जनता में भी अब बाघों के संरक्षण व उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में अभिरूचि पैदा हो रही है. ऐसे समय पर यह खबर मिलना कि बुन्देलखण्ड के बाघों की नस्ल खत्म नहीं हुई, इस धरती के बाघ अभी भी यहां के जंगलों में मौजूद हैं, रोमांचित कर देने वाली घटना है.  क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व श्री मूर्ति ने इस बात की पुष्टि की है कि दहलान चौकी तालाब के आसपास बाघ के पगमार्क मिले हैं. राज्य वन्य प्रांणी बोर्ड के सदस्य हनुमंत सिंह ने पगमार्क के फोटो भी लिए हैं, जो इस इलाके में बाघ की मौजूदगी के पुख्ता प्रमाण हैं. वन्य जीव विशेषज्ञ श्यामेन्द्र सिंह बिन्नी राजा ने बताया कि लखनपुर सेहा व सरकोहा का जंगल आदिकाल से बाघों का प्रिय रहवास स्थल रहा है. यहां से लेकर कौहारी, कालींजर व चित्रकूट होते हुए हनुमना तक जंगल की सतत श्रंखला (कॉरिडोर) है, यही वजह है कि शिकार की घटनाओं और मानवीय दखलंदाजी के बावजूद यहां पर बाघों का वजूद बना हुआ है. आपने कहा कि इस बाघ की खोजबीन कर जितनी जल्दी हो इसे रेडियो कालर करना चाहिए ताकि इस बाघ के विचरण क्षेत्र का पता चल सके. इसके अलावा विपरीत परिस्थितियों के रहते हुए भी यह बाघ कैसे बचा, इस बात का भी गहराई से अध्ययन व रिसर्च करने की जरूरत है.

पन्ना की शान हैं बाघ
क्षेत्रीय विधायक श्रीकांत दुबे का कहना है कि पन्ना की धरती में बाघों के वजूद को कायम रखने के लिए हरसंभव प्रयास होने चाहिए. यह खुशी की बात है कि बुन्देलखण्ड के बाघ अभी खत्म नहीं हुए. हर कोई यही चाहता है कि बाघों की सुरक्षा हो तथा यहां की जनता भी खुशहाल हो.
-श्रीकांत दुबे, पन्ना विधायक

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