राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में बताया आशा का स्त्रोत

भोपाल, 5 फरवरी. बालिकाओं की शिक्षा के लिये किये गये प्रयासों और नवाचारी पहल के मामले में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक उत्कृष्ट रहा है. बालिका शिक्षा में मध्यप्रदेश की पहल को अन्य राज्यों के लिये मार्गदर्शी बताया गया है.

यह निष्कर्ष एक हाल ही में राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में सामने आया है. यह सर्वेक्षण एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पत्रिका और एबेकस मार्केट रिसर्च सर्वे नई दिल्ली द्वारा मिलकर किया गया था. सर्वेक्षण में राज्यों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिये दस मानक तय किये गये थे . प्रशासनिक सुधार, सांप्रदायिक सौहार्द, ई.गवर्नेंस, पर्यावरण जागरूकता, बालिका शिक्षा, औद्योगीकरण, राज्य में निवेश, कानून और व्यवस्था, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और जन-स्वास्थ्य प्रणाली. सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश में बालिका शिक्षा की पहल को अन्य राज्यों के लिये आशा की स्त्रोत बनाया गया है. मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि राज्य सरकार हर बेटी को शिक्षा और रोजगार के जरूरी कौशल देने के लिये प्रतिबद्ध है. उल्लेखनीय है कि प्रदेश में बालिका शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार के लिये योजनाओं की एक श्रंखला बनाई गई है. बेटी बचाओ अभियान, लाड़ली लक्ष्मी योजना, गाँव की बेटी योजना, गरीब बेटियों के विवाह की मुख्यमंत्री कन्यादान योजना और नौकरियों में महिलाओं के लिये आरक्षण की व्यवस्था जैसे प्रयास एक साथ केवल मध्यप्रदेश में किये गये हैं. इन्हीं समन्वित प्रयासों का परिणाम है कि बेटियों को शिक्षा देने की पहल ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है. हाल ही में गाँव की बेटी योजना को विस्तार दिया गया है. इस योजना का लाभ अब निजी महाविद्यालयों में पढऩे वाली बेटियों को भी
मिलने लगा है.

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