सैन फ्रांसिस्को के कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के अध्ययनकर्ता संजय बसु ने भविष्य में तपेदिक की दर पर धूम्रपान का प्रभाव ज्ञात करने के लिए गणित के एक मॉडल का इस्तेमाल किया था. इसमें पता चला कि धूम्रपान करने से 2010 से 2050 के बीच तपेदिक से होने वाली मौतों की संख्या में चार करोड़ की वृद्धि हो  सकती है”

साल 2050 तक धूम्रपान से होने वाली मौतों में चार करोड़ की बढ़ोतरी हो सकती है. एक नए अध्ययन के मुताबिक तपेदिक रोगियों के धूम्रपान करने से यह खतरा पैदा हुआ है. जब धूम्रपान करने वालों में तपेदिक की बीमारी विकसित हो जाती है तो उनकी मौत का खतरा बढ़ जाता है. शोध में पता चला है कि अकेला धूम्रपान तपेदिक से होने वाली मौत को 1990 की तुलना में 2015 तक आधा करने के लक्ष्य को घटा सकता है. सैन फ्रांसिस्को के कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के अध्ययनकर्ता संजय बसु ने भविष्य में तपेदिक की दर पर धूम्रपान का प्रभाव ज्ञात करने के लिए गणित के एक मॉडल का इस्तेमाल किया था. इसमें पता चला कि धूम्रपान करने से 2010 से 2050 के बीच तपेदिक से होने वाली मौतों की संख्या में चार करोड़ की वृद्धि हो सकती है.

इन चार दशकों में तपेदिक से 6.1 करोड़ से लेकर 10.1 करोड़ तक मौतें होने का अनुमान है.अध्ययन में यह भी पता चला है कि यदि धूम्रपान इसी तरह जारी रहा तो तपेदिक के मामलों की संख्या 25.6 करोड़ से बढ़कर 27.4 करोड़ हो सकती है. इस तरह कुल 1.8 करोड़ मामले बढऩे का खतरा है. बसु ने कहा कि यदि तम्बाकू युक्त धूम्रपान कम हो तो साल 2050 तक तपेदिक से होने वाली मौतों में 2.7 करोड़ की कमी हो सकती है. गौरतलब है कि दुनिया की आबादी का पांचवा हिस्सा धूम्रपान करता है और तपेदिक के मरीजों की अधिकता वाले देशों में ज्यादा लोग सिगरेट पीते हैं.

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