एकाएक बिना किसी आभास के सभी वस्तुओं के रेल माल भाड़े में 6 प्रतिशत वृद्घि कर दी गई है. माल भाड़ा और यात्री भाड़ा कोई आक्समिक जरूरत नहीं है. इनके बारे में वार्षिक रेलवे बजट में ही घोषणा संसद में की जाती है. बजट चर्चा में उस पर विचार विमर्श होता है और उसे घटाया भी जा सकता है, लेकिन रेलवे मंत्रालय के शासकीय आदेश में इस प्रकार की वृद्घि बिल्कुल असंगत व अवांछनीय है. इस आदेश के औचित्य में कहा गया है कि रेलों का संचालन व्यय लगातार बढ़ता जा रहा है. इसलिये यह तात्कालिक वृद्घि माल भाड़े में करनी पड़ रही है. इससे यह भी निश्चित अनुमान लग जाता है कि निकट भविष्य में रेलों के यात्री किराये में भी वृद्घि कर दी जायेगी, अन्यथा आगामी बजट में यह अवश्यंभावी है.

इस समय सरकार की आर्थिक नीतियां और मूल्य वृद्घि रोकने के लिये उठाये कदम और अधिक आर्थिक दुर्दशा और मूल्य वृद्घि करते जा रहे हैं. रिजर्व बैंक अब तक 12 बार ब्याज दरों में वृद्घि यह कह कर करता जा रहा है कि इससे बाजार में मुद्रा संकुचन होगा और मूल्यों में गिरावट आयेगी, लेकिन हो यह गया कि उद्योग जगत और आयात-निर्यात व्यापार के लिये पूंजी इतनी मंहगी हो गई कि निर्यात व्यापार अवरुद्घ हो गया और वह अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चीन व अन्य देशों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहा है.

जब यह हालत हो गई तब केंद्रीय वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी को होश आया और उन्होंने निर्यात व्यापार के लिये ब्याज दरों में कमी की घोषणा की है. ब्याज दरों में वृद्घि मूल्य वृद्घि रोकने के नाम पर की जा रही है. दूसरी ओर डीजल- पेट्रोल व अन्य पेट्रो पदार्थों पर मूल्य बढ़ाकर सड़क यातायात से उनका ढुलाई खर्च बढ़ा दिया. अब रेलवे ने सभी प्रकार के माल पर 6 प्रतिशत माल भाड़ा बढ़ा दिया. यह 6 प्रतिशत की वृद्घि निश्चित ही बहुत ज्यादा है. इससे सभी भारी सामानों लोहा, कोयला, सीमेंट तथा अनाजों पर भारी मूल्य वृद्घि हो जायेगी. सरकार मूल्यों को कम करने के नाम पर ऐसे कदम उठा रही है जिससे मूल्य तेजी से बढ़ते ही जा रहे हैं.  रेलवे की नई माल भाड़ा वृद्घि 15 अक्टूबर से प्रभावशील हो गई. इससे पहले गत मार्च के महीने में माल भाड़ा बढ़ाया गया था और 7 महीने बाद ही यह दूसरी वृद्घि बजट की परांपराओं को तोड़ते हुये कर दी. गत मार्च में रेलवे ने कोयले पर 5 प्रतिशत और बाकी वस्तुओं पर 7 प्रतिशत ‘बिजी सीजन चार्ज अक्टूबर 2011 से मार्च 2012 तक के लिये बढ़ाया है. अब मार्च 2012 की समय सीमा को 6 महीने पहले ही तोड़कर वृद्घि को 10 प्रतिशत कर दिया. ऐसा अनुमान लगाया गया है कि इस माल भाड़ा वृद्घि से उद्योग जगत पर 1500 करोड़ रुपयों का अतिरिक्त भार आ जायेगा.

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