भारत की राजनीति व कूटनीति में पाकिस्तान से कश्मीर और चीन से उत्तरी सीमा (मेकमोहन लाइन)  पर सतत् विवाद चला आ रहा है. दोनों मुद्दों पर भारत के दोनों देशों में युद्ध भी हो चुके है. भारत से इन राष्ट्रों की शत्रुता ही इन दोनों देशों- पाकिस्तान व चीन के बीच निकटता व मित्रता का आधार है. ये मसले युद्ध से भी निपट नहीं पाये. दोनों ही देशों के साथ सीमा विवाद पर वार्ताओं का दौर चलता ही जा रहा है. इन मसलों पर कुछ निर्णायक स्थिति केवल इन्हीं मसलों पर बनी है कि अब काश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र संघ से हट गया है और भारत-पाक के बीच का द्विपक्षीय मामला बन गया है. अब कोई भी तीसरा देश काश्मीर के मसले पर प्रत्यक्ष रूप से कुछ नहीं कर सकता.

बंगला देश युद्ध व उस नये देश के निर्माण के बाद पाकिस्तान के साथ युद्ध बंदियों की रिहाई के संबंध में भारत की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी व पाकिस्तान के राष्ट्रपति श्री जुल्फिकार अभी मुद्दों के मध्य शिमला समझौता हुआ था, उसी के कारण काश्मीर को द्विपक्षीय मामला माना गया है. संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षकों की निगरानी में कायम ”युद्ध विराम रेखा” को ”वास्तविक नियंत्रण रेखा”  का नाम दिया गया.

चीन के साथ मामला कुछ भिन्न है. भारत को आजादी अंग्रेजों से ”ट्रांसफर ऑफ पावर” की प्रक्रिया से मिली. इस समय भारत की उत्तरी सीमा  मेकमोहन लाइन थी. उससे पहले सीमा के प्रश्न पर अंग्रेजों व चीन की सरकारों के बीच कोई सीमा विवाद था ही नहीं. उन दिनों 1947 के समय वहां चांग काईशेक की कोमिनतांग प्रणाली की सरकार थी और राष्ट्रपिता के रूप में सन यात सेन स्थापित थे. 1949 में वहां माओ ते-तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्ट क्रांति हुई और राष्ट्र का राजनैतिक स्वरूप बदला. काफी समय तक भारत और कम्युनिस्ट चीन के संबंध बहुत अच्छे रहे.

एकाएक चीन ने यह कहना शुरू कर दिया कि वह भारत के साथ उत्तरी सीमा ”मेकमोहन लाइन” को स्वीकार नहीं करता और भारत की भूमि पर दावे करने लगा. इसमें वह इलाका है जो कभी नेफा और अब अरुणाचल कहलाता है जो भारत का उत्तर पूर्वी राज्य है. इसके साथ ही काश्मीर में अक्साईचिन पर अब हक बनाता है. युद्ध में कुछ भाग पर चीन ने कब्जा कर रखा है. लेकिन अरुणाचल से वह वापस लौट गया. इस समय स्थिति यह है कि दोनों देशों ने यह मान लिया है कि सीमा पर वार्ताएं चलती रहेंगी और कभी भी पुन: सैनिक टकराव व युद्ध की स्थिति निर्मित नहीं की जायेगी. यह यथास्थिति अभी बनी हुई है और वार्ताओं के दौर चलते चले जा रहे हैं. अब तक 14 बार दोनों देशों की बैठकें-वार्ताएं हो चुकी है. और अब कुछ दिनों बाद नवंबर में दोनों देशों के बीच वार्ता का 15वां दौर चलेगा. दोनों देशों के बीच 3500 किलोमीटर लंबी सीमा है. दोनों तरफ सेनाओं की गतिविधियों से तनाव की स्थिति बनी रहती है. लेकिन युद्ध जैसी विस्फोट स्थिति नहीं बनी है.

भारत तिब्बत पर चीन का हक मानता है. लेकिन भारत में दलाईलामा की उपस्थिति से वह भारत के प्रति शंकालु है. इसलिए भारत पर दबाव बनाने के लिये काश्मीर में पाकिस्तानी कब्जे वाले भाग में पाकिस्तान से मिलकर सैनिक उपस्थिति दर्शाता है? हाल ही में चीन से तनाव बढ़ा है. संभवत: वह 15वीं दौर की वार्ता के लिये कुछ दबाव का वातावरण बना रहा है.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

Related Posts: