कराची, 15 फरवरी. भारत और पाकिस्तान का आपसी रिश्ता हमेशा कभी नीम-नीम, कभी शहद-शहद जैसा रहा है। द्विपक्षीय रिश्तों को मधुर बनाने के लिए कोशिशें शुरू होती हैं और अचानक इस पर विराम भी लग जाता है।

पाकिस्तान सरकार पिछले कुछ हफ्तों से लगातार भारतीय वाणिय मंत्री आनंद शर्मा की यात्रा के दौरान भारत को सबसे तरजीही देश [एमएफएन] का दर्जा देने के संकेत दे रही थी। इसके बावजूद प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झडी नहीं दिखाई जा सकी। पाक सरकार का कहना है कि अभी इस मुद्दे पर और गहराई से चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में प्रधानमंत्री गिलानी के खिलाफ मामला दायर करने के बाद उपजी राजनीतिक स्थिति को देखते हुए इस फैसले को टाला गया है। चूंकि पूरी कैबिनेट ने गिलानी में भरोसा जताया है, लिहाजा वह अभी भारत को फायदा पहुंचाने वाला कोई फैसला लेकर जोखिम नहीं उठाना चाहते। यही वजह है कि पाक सरकार ने भारत को अभी एमएफएन का दर्जा देना मुल्तवी कर दिया है।

तीन अहम समझौतों को मंजूरी
अलबत्ता पाकिस्तानी सरकार ने भारत के साथ द्विपक्षीय कारोबार बढ़ाने से संबंधित तीन महत्वपूर्ण समझौतों को मंजूरी दे दी है। पाक सरकार का मानना है कि भारत से आयातित उत्पादों की सकारात्मक सूची के बजाय नकारात्मक सूची होनी चाहिए। इसलिए पाकिस्तान करीब 650 उत्पादों को छोड़कर शेष उत्पादों को भारत से आयात की मंजूरी देने पर राजी हो गया है। अभी पाक भारत से लगभग 1960 उत्पादों का आयात को मंजूरी देता है। इसके अलावा सरकार ने दिसंबर, 2012 तक भारत को एमएफएन का दर्जा देने की बात प्रस्ताव में कही है।

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