भारत और नेपाल दोनों देशों के बीच 24 साल पहले हुये करार में संशोधन कर दिया है. दोनों देशों में एक अर्से से यह महसूस किया जा रहा था कि वर्तमान परिस्थितियों में इसमें परिवर्तन किया जाना चाहिये, लेकिन नेपाल में माओवादी हिंसा के कारण एक लंबे अर्से तक राजनैतिक अस्थिरता की स्थिति रही, जिसमें गंभीर मुद्दों पर कोई निर्णय संभव नहीं हुये.

हाल ही में नेपाल के नये प्रधानमंत्री श्री बाबूराम भट्टराई भारत की यात्रा पर आये थे. उस समय ही नये करार के संबंध में वार्तायें हुई थी. केंद्रीय वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी ने कहा था कि वे शीघ्र ही नेपाल जाकर नई संधि पर हस्ताक्षर कर देंगे. गत रविवार 27 नवंबर को जो नया ‘डबल टेक्सेशन एव्हायडेंस एग्रीमेंट (डी.टी.ए.ए.) संशोधित करार हुआ है. उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य मानकों का आधार दिया गया है. दोहरे कराधान से दोनों देशों के बीच व्यापार में काफी दिक्कत आ रही थी और वस्तुएं भी महंगी हो रही थीं. नेपाल का लगभग 90 प्रतिशत व्यापार भारत के साथ होता है. हालांकि चीन भी वहां अपनी आर्थिक व व्यापारिक गतिविधियां जमाने के लिये प्रयत्नशील है. गत समय में माओवादी प्रधानमंत्री पुष्प दहल ‘प्रचंड’ के काल में नेपाल को चीन की तरफ झुकाया जा रहा था. प्रचंड के राजनैतिक पतन में उनका यह रवैया भी रहा. नेपाल का व्यापार और वहां भारतीय मुद्रा ‘रुपया’ की पूर्णग्राहता व चलन वहां के व्यापारियों को बहुत सहूलियत का लगता है. वहां भारतीय सामान की ग्राहता भी आम लोगों में सर्वाधिक है.

नये संशोधित करार के अंतर्गत दोनों देश बैकिंग व टेक्स सूचनाओं का आदान-प्रदान करेंगे. करार पर हस्ताक्षर के बाद भारतीय वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि ऐसी सूचनाओं के आदान प्रदान से दोनों देशों के हितों पर कोई भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन ऐसी सूचनाओं का परस्पर सहमति से घरेलू मामलों में शासकीय संस्थाओं द्वारा प्रयोग किया जा सकेगा. यह 2011 की संशोधित संधि इससे पूर्व 1987 में दोनों देशों के बीच हुये करार का स्थान लेगी और इसके साथ ही पिछली संधि निरस्त हो गई है. पिछली संधि के अनुसार दोनों देशों के बीच बैंकिंग सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था नहीं थी. नई संधि से दोनों देशों के बीच प्रवासियों व निवासियों को स्थाईत्व के साथ आर्थिक सहयोग में निवेश, तकनीक और अन्य सेवाओं का विस्तार होगा. इस संधि में टेक्स के मामलों में उन प्रावधानों को रखा गया है, जो जी-20 की बैठक में विश्व नेताओं ने तय किये हैं. इससे अब व्यापार पर एक ही किसी देश में टैक्स लगाया जा सकेगा और अभी तक चला आ रहा दोनों तरफ टैक्स लगना खत्म हो जायेगा. इससे व्यापार में बहुत गति आ जायेगी.

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