सिओल, 26 मार्च. परमाणु मुद्दे पर एशिया महाद्वीप में नई सामरिक रूपरेखा तैयार हो रही है. मनमोहन सिंह और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली म्युंग बाक ने भारत-दक्षिण कोरिया-जापान के त्रिपक्षीय गठजोड़ की शुरुआत को पूरा समर्थन देने का फैसला है. इसे पाक-चीन-उत्तर कोरिया के गठजोड़ की पृष्ठभूमि के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है.

बातचीत की प्रक्रिया की शुरुआत

नए गठजोड़ के उभरने की महत्ता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत-दक्षिण कोरिया-जापान वार्तालाप को मनमोहन और ली की द्विपक्षीय वार्ता के बाद जारी किए गए संयुक्त बयान में भी स्थान मिला है. संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने भारत-दक्षिण कोरिया-जापान के शीर्ष राजनेताओं के बीच बातचीत की प्रक्रिया की शुरुआत का स्वागत किया है.

समय समय पर चिंताएं जाहिर

चीन और पाक जहां परमाणु क्षमता संपन्न देश हैं वहीं उत्तर कोरिया के बारे में भी यही माना जाता है कि चोरी छिपे उसने अपना परमाणु कार्यक्रम चला रखा है. उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पूरी दुनिया में समय समय पर चिंताएं जाहिर की जाती रही हैं.

प्रधानमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र में दिया निवेश का न्यौता

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दक्षिण कोरिया के व्यापारियों से सौर और परमाणु ऊर्जा में निवेश कर इस क्षेत्र के विकास में भारत की मदद करने को कहा है. सिंह ने कोरिया के टॉप उद्योगपतियों से कहा, हम ऊर्जा दक्षता और बिजली क्षेत्र में सौर ऊर्जा व परमाणु ऊर्जा जैसी अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं. बैठक में जो कार्यकारी अधिकारी मौजूद थे, उसमें कोरिया इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (केईपीसीओ) के जूंग क्यूम शामिल हैं.

कोरिया इलेक्ट्रिक पावर परमाणु ऊर्जा से जुड़ी कंपनी है. कोरिया की बिजली जरूरतों में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत है. कोरियाई उद्योग मंडल की बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा, व्यापार के काफी अवसर होंगे और मैं पर्यावरण अनुकूल टेक्नॉलजी में कोरियाई क्षमता से वाकिफ हूं. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली म्युंग बाक ने रविवार को सिंह के साथ मुलाकात के दौरान भारत में परमाणु रिएक्टर बनाने के लिए उनके देश को जगह आवंटित करने का अनुरोध किया था.

Related Posts: