• वन क्षेत्र में हो सकते हैं सात बाघ

इंदौर, 13 अक्टूबर. भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) की एक रिपोर्ट में प्रदेश के इंदौर और देवास वन क्षेत्रों में करीब सात बाघों की मौजूदगी का अनुमान लगाया गया है।

प्रदेश का टाइगर स्टेट का धुंधलाता दर्जा बरकरार रखने की कड़ी चुनौती का सामना कर रहा वन विभाग इन इलाकों में बाघों की बसाहट के पुख्ता संकेतों पर डब्ल्यूआईआई की मुहर लगने से खासा उत्साहित है। संकटग्रस्त प्रजाति के संरक्षण का खाका इन वन क्षेत्रों के मौजूदा हालात के मद्देनजर नये सिरे से तैयार किया जा रहा है। डब्ल्यूआईआई की रिपोर्ट स्टेटस ऑफ टाइगर्स, को-प्रेडटर्स ऐंड प्रे इन इंडिया-2010 के शीर्षक से जारी की गई है। इंदौर रेंज के मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) पीसी दुबे ने इस रिपोर्ट के हवाले से बताया कि इंदौर और देवास वन क्षेत्रों में वर्ष 2006 के बाद से बाघों की आबादी में बढ़ोतरी देखी गई है। इन क्षेत्रों में बाघों की मौजूदा संख्या सात के आस-पास होने का अनुमान है। दुबे के मुताबिक लम्बे अरसे बाद यह पहली बार है, जब इन पड़ोसी वन क्षेत्रों में एक साथ करीब सात बाघों की उपस्थिति के बारे में पता चला है। उन्होंने बताया कि वन विभाग के अफसर इंदौर वन क्षेत्र में जंगली जानवरों की गणना के दौरान बाघों के पग मार्क देख चुके हैं।

दुबे ने बताया कि ग्रामीण भी विभागीय अधिकारियों को इलाके में बाघ होने के सबूत देते रहे हैं, जिनमें इस संकटग्रस्त प्राणी द्वारा मवेशियों का शिकार शामिल है। सीसीएफ ने बताया वन विभाग के अफसरों को चोरल नदी के किनारे स्थित वन क्षेत्र में बाघ के पग मार्क निरंतरता में मिले हैं। हम पहले से मानते आ रहे हैं कि इस क्षेत्र में बाघों का वजूद बरकरार है। इस बात पर डब्ल्यूआईआई की मुहर लगना हमारे लिये गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि डब्ल्यूआईआई की रिपोर्ट की पृष्ठभूमि में इंदौर और देवास वन क्षेत्र में बाघ संरक्षण की नयी रणनीति बनायी जा रही है। इस सिलसिले में हाल ही में बड़वाह, देवास और इंदौर वन क्षेत्रों के विभागीय अफसरों ने एक विशेष बैठक की। दुबे के मुताबिक इस बैठक में जन प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया और इंदौर व देवास वन क्षेत्रों में बाघों के बसेरे को बनाये रखने के लिये उठाये जाने वाले कदमों के बारे में सुझाव मांगे गये।

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