देश का उद्योग जगत इस समय बहुत ही कठिन दौर से गुजर रहा है. देश की दस सबसे बड़ी कम्पनियों के बाजार पूंजीकरण में 30,004 करोड़ रुपयों की गिरावट आ चुकी है. बड़ा उपभोक्ता सामान (ड्यूरेबिल) सामान बनाने वाले उद्योगों का बाजार व माल का उठाव इतना गिर गया है कि उनके पास कार्य पूंजी (वर्किंग केपिटल) तक का अभाव हो गया है. ऐसी स्थिति में वे अपने कारखानों में उत्पादन में भारी कमी कर रहे हैं और काम की पारियां भी कम करने को मजबूर हैं. इसका सीधा प्रभाव देश में रोजगार की कमी से हो रहा है.

जिसका सीधा असर बढ़ती बेरोजगारी में दिख रहा है. रिजर्व बैंक यह तय किये बैठा है कि जब तक मुद्रास्फीती घटेगी नहीं ब्याज दरों में कमी लाना संभव नहीं है. इसका असर बाजार में पूंजी की कमी के रूप में नजर आ रहा है. पूंजीकरण का घाटा उठाने वाली कम्पनियां में देश की सशक्त कंपनियां हिंदुस्तान यूनीलीवर, रिलायंस, इंफोसिस के साथ-साथ केंद्र सरकार के शीर्ष उपक्रम ओ.एन.जी.सी., कोल इंडिया, एन.टी.पी.सी. के अलावा एच.डी.एफ.सी. बैंक के अलावा देश का शीर्ष बैंक भारतीय स्टेट बैंक तक 3342 करोड़ रुपयों के पूंजी के घाटे में आ गया. कोयले पर एक राजनैतिक घमासान मचा ही हुआ है. लेकिन शासकीय उपक्रम कोल इंडिया पूंजीकरण में 8938 करोड़ रुपये से घटकर 2,22,809 करोड़ रुपयों पर आ गया है.

बड़ी असमंजस की स्थिति यह भी बनी हुई है कि केंद्रीय वित्त मंत्री व मंत्रालय भी यह मान रहा है कि उद्योग जगत में पूंजी का बहुत अभाव हो गया है और उसके चलते देश की औद्योगिक विकास दर और सकल विकास दर बढ़ ही नहीं सकतीं. रिजर्व बैंक ने यह तक मान लिया कि मुद्रा स्फीति को नियंत्रण लाने में उद्योग जगत बलि चढ़ रहा है. देश में विदेशी निवेश का अधिकांश भाग पूंजी बाजार से उठा लिया गया है और घरेलू निवेशकों ने औद्योगिक गिरावट की वजह से सोना में निवेश कर डाला. प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह को लोगों से अपील करनी पड़ी कि पूंजी को सोना में नहीं लगाया जाए. इससे बाजार में प्रचलन मुद्रा में भारी कमी आ रही है. इसमें केवल अपील काम नहीं करेगी. जब उद्योग में उत्पादन घट रहा हो, उठाव की कमी से आमदनी भी घट रही हो, उस समय कोई भी निवेशक उद्योग में अपना रुपया नहीं लगायेगा. निवेश बढ़ाने का एक मात्र यही उपाय है कि औद्योगिक उत्पादन गिरने न पाये और निर्मित माल का बाजार बना रहे.

किसानों के आर्थिक उत्थान के लिये समर्थन मूल्य के नाम से व्यवहारिक अर्थ में उन्हें सब्सिडी या पैकेज दिया जा रहा है. इसके विपरीत महंगी ब्याज दरें रखकर उद्योग जगत को ठप्प कर देने जैसी कार्यवाही हो रही है. सरकार ने अपने चार बड़े उपक्रमों कोल इंडिया, ओ.एन.जी.सी., एन.एम.डी.सी. एच.ए.एल. व एस.ओ.आई.एल. बाजार में पूंजी लगाने के लिये कहा है जिसके पास 1.35 लाख करोड़ रुपया है.

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