भारत में औद्योगिक उत्पादन दर जो गत वर्ष 2010 के अक्टूबर माह में 11.3 प्रतिशत थी वह इस समय दिसंबर 2011 में सर्वाधिक गिरकर 5.1 प्रतिशत पर नकारात्मक हो गई है. जब खाद्यान्नों की मंहगाई बढ़ती है. उस समय उपभोक्ता की खरीदने की शक्ति उस तरफ मुड़ जाती है और वह औद्योगिक उत्पादनों को अपनी कटौती लाता है. उस हालत में पूरी महंगाई में औद्योगिक उत्पादन भी महंगे हो जाते हो पर उनका उठाव लगातार कम होता है.

इस औद्योगिक शिथिलता को देखते हुये कि विदेशी निवेशक अपनी पूंजी वापस उठा रहे हैं, उसका परिणाम बडï़ा दुधारी हो रहा है. शेयर बाजार को औद्योगिक गिरावट से तगड़ा झटका लगा है. सेनसेक्स 2 प्रतिशत की तेजी से लुढ़क कर 343 अंक गिरकर 16 हजार से नीचे चला गया और नेफ्टी 102 अंक गिरकर 4764.60 अंक तक उतर गया. भारतीय मुद्रा रुपया भी डालर के मुकाबले 81 पैसे और गिरकर रिकार्ड न्यूनतम स्तर पर पहुंच कर 52.84 हो गया. पिछले तीन दिनों में सेन्सेक्स 1000 अंक से ज्यादा गिर चुका है और निवेश करने वाले लोगों की संपत्ति 3 लाख करोड़ रुपयों की कमी आ गई. यूरोपीय बाजारों से मिले संकेतों ने भी भारतीय बाजार की धारणा को कमजोर बना दिया. खनन, औद्योगिक उत्पाद व ऊर्जा क्षेत्र में भारी गिरावट दर्ज की गई. रिजर्व बैंक ने महंगाई घटाने के नाम पर अब तक 13 बार रेपो और रिवर्स रेपो रेट बढ़ा चुका है. इससे भाव तो कम नहीं हुये बल्कि बाजार में पूंजी का संकुचन और ब्याज दरें काफी बढ़ गई. इससे औद्योगिक क्षेत्रों के निर्यात करना दूसरे आयात करने वाले देशों को महंगा पडऩे लगा. साथ ही रुपया भी डालर के मुकाबले कमजोर से हमें तो निर्यात करना मुनाफे में वृद्घि के रूप में आया, लेकिन निर्यात कम या बंद होने से उसमें लाभ के स्थान पर घाटा होने लगा.

यूरोपीय देशों ने डालर के समकक्ष अपनी मुद्राओं को एक करने के लिये मुद्रा संघ बना कर ‘यूरोÓ नाम से एक मुद्रा कर ली, लेकिन आर्थिक उथल-पुथल में उसका मूल्य स्थिर न रख सके. एक यूरो होने के बाद भी सभी यूरोपीय देशों की यूरो के नाम पर सभी की अपनी-अपनी मुद्रा रही. यूरोप के कई विकास देशों ने भारी कर्जे लेकर  यूरो को कमजोर कर दिया. यूरो क्षेत्र और अमेरिका आर्थिक मंदी के कारण भी भारत सहित दूसरे बाजारों पर बहुत विपरीत प्रभाव पड़ रहा है. रिजर्व बैंक 16 दिसंबर के बाद की समीक्षा के ब्याज दरों को कम कर सकता है. इसके गर्वनर श्री रंग राजन ने कहा है कि इन आंकड़ों से विकास का पहिया थमता नजर आ रहा है. इसलिये कोयला, सड़क व रेलवे में निवेश बढ़ाकर देश की अर्थ व्यवस्था को सम्हाला जा सकता है. भारतीय उद्योग जगत ने निवेश बढ़ाने के लिये रिजर्व बैंक से ब्याज दरों से तत्काल कटौती करने को कहा है. फिक्की ने गंभीर गिरावट की चेतावनी देते हुये सरकार से कहा है कि उसे स्थिति सुधारने के लिये निवेश प्रोत्साहन व पैकेज देना चाहिये. केंद्रीय वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी ने किंग फिशर विमानन के वित्तीय संकट के समय यह कह चुके हैं कि केंद्रीय राजकोषीय घाटे की स्थिति बेहद खराब है. इसलिये उद्योग जगत किसी पैकेज की अपेक्षा न करें.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

Related Posts: