साऊथ अफ्रीका, केन्या,तन्जानियां व बोत्सवाना सहित विभिन्न देशों की भागीदारी

  • पर्यटन के विकास में आने वाली बाधाओं को दूर करना जरुरी-विजयवर्गीय

भोपाल,14 अक्टूबर. वन एवं वन्य प्राणी पर्यटन विषय पर केन्द्रित दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आज आरंभ हुआ. इसमें पर्यटन व्यवसाय से जुड़े महत्वपूर्ण संगठन, केन्द्र और राज्य सरकार के वन और पर्यटन विभाग के प्रतिनिधि तथा पर्यटन क्षेत्र के राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं.

इस दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए वाणिज्य और उद्योग मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि भारत की धार्मिक और अध्यात्मिक परम्पराओं के प्रति दुनियाँ के लोगों के बढ़ते रूझान से देश में विदेशों से आने वाले पर्यटकों की संख्या में निरन्तर इज़ाफ़ा हो रहा है. उन्होंने कहा कि हमारे देश की पवित्र नदियाँ, हिमालय प्रसिद्ध तीर्थ स्थल और सघन वन तथा इनमें वन्य प्राणियों की विभिन्नता देशी और विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केन्द्र है. पर्यटन उद्योग के माध्यम से बहुत कम निवेश में व्यापक रोजगार के अवसर सुलभ कराये जा सकते है. उन्होंने कहा कि पर्यटन व्यवसाय के जरिये खासतौर से वन क्षेत्रों के आसपास बसे ग्रामीणों के रोजगार की संभावनाओं के साथ ही ऐसे अंचलों के समग्र विकास में भी मदद मिल रही है.

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को केन्द्र में रखते हुए यहाँ वन और वन्य प्राणी पर्यटन के विकास के संबंध में ऐसी योजनाएँ तैयार की जाना चाहिए जिससे स्थानीय परिवेश और वन्य जीवन पर कोई दुष्प्रभाव नहीं हो तथा लोगों की आजीविका के साधनों और व्यापार-व्यवसाय में वृद्धि हो सके.सम्मेलन के प्रारंभ में भारतीय उद्योग परिसंघ (सी.आई.आई.) की पर्यटन संबंधी राष्ट्रीय समिति के सह-अध्यक्ष तथा क्लब महिन्द्रा हॉलिडेज् के अध्यक्ष अरूण नन्दा ने अपने स्वागत सम्बोधन में देश में वन तथा वन्य प्राणी पर्यटन क्षेत्र के विकास की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला.  उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 तक देश में बड़ी तादाद में युवा वर्ग के लिए रोजगार के अवसर जुटाने में वन तथा वन्य प्राणी पर्यटन क्षेत्र महत्वपूर्ण भमिका निभायेगा.

इस अवसर पर ईको टूरिज्म सोसायटी ऑफ इंडिया के संस्थापक सदस्य कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि हमारे देश में वन्य प्राणियों की विविधता पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य कारण है. देश में 1960-1970 के दशक तक वन तथा वन्य प्राणी पर्यटन क्षेत्र के विकास का कार्य सिर्फ संबंधित राज्य सरकारों तक ही सीमित रहा है. लेकिन 1980 के दशक क बाद से निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी से इस क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएँ सामने आई है. कार्यक्रम में पर्यटन विभाग,भारत सरकार की क्षेत्रीय निदेशक (पश्चिम क्षेत्र) रोमा सिंह ने भी सम्बोधित किया. उन्होंने कहा कि विकास के स्थायित्व की दृष्टि से यह जरूरी है कि स्थानीय समुदाय की विकास कार्यों में भागीदारी सुनिश्चित की जाये. उन्होंने कहा कि इस दृष्टि से उन्हें पर्यावरण संरक्षण, ईको टूरिज्म के महत्व की जानकारी देकर इनके विकास में जोड़ा जाये. यह भी ध्यान रखा जाये कि वन तथा वन्य प्राणी पर्यटन के विकास के साथ-साथ परम्परागत कृषि, व्यापार और आजीविका साधनों का विकास भी हो. भारतीय उद्योग परिसंघ (सी.आई.आई.) तथा मध्यप्रदेश पर्यटन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस दो दिवसीय इस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में साऊथ अफ्रीका, केन्या,तन्जानियां, बोत्सवाना सहित विभिन्न देशों के अन्तर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ भी भाग ले रहे है.

इस दो दिवसीय आयोजन में वन्य प्राणी पर्यटन को और अधिक संवहनीय बनाने से संबंधित विषयों और इससे जुड़े सरोकारों पर व्यापक विचार होगा. साथ ही वन्य प्राणी उद्यानों तथा अभ्यारण्यों में पर्यटन प्रबंधन को और बेहतर बनाने तथा भारत के विभिन्न राज्यों में वन्य प्राणी पर्यटन को बढ़ावा देने जैसे विषय पर चर्चा होगी. सम्मेलन के दूसरे दिन वन्य प्राणी संरक्षण तथा वन्य प्राणियों और मनुष्यों के बीच संतुलन की आवश्यकता, वन्य प्राणी पर्यटन की मार्केटिंग के संबंध में चर्चा होगी. इस कार्य में सरकार और उद्योग प्रतिनिधियों के बीच गहन संवाद भी होगा.

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