कैबिनेट बैठक : एग्री बिजनेस सहित अन्य सेक्टरों में विशेष फोकस

राज्य की उद्योग संवर्धन नीति का अनुमोदन

  •  प्रक्रियाओं  का सरलीकरण एवं   करों का युक्तियुक्तकरण
  •  निजी क्षेत्र  में औद्योगिक पार्क   की स्थापना
  •   सूक्ष्म एवं  लघु उद्योगों के लिए  जिलों  का वर्गीकरण समाप्त

भोपाल, 28 अगस्त,नभासं. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट में उद्योग संवर्धन नीति 2010 में प्रस्तावित संशोधन को अनुमोदित किया गया. इसमें उद्योग क्षेत्र से जुड़े विभिन्न सेक्टरों पर विशेष फोकस किया गया है वहीं 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश पर विशेष अनुदान सहित अन्य रियायतों के साथ कुछ नए प्रावधान भी किए गए हैं, जिससे प्रदेश में औद्योगिक निवेश में बढ़ोतरी का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा.

उद्योग संवर्धन  नीति 2010 में महत्वपूर्ण संशोधन  भी किए गए हैं. इसमें एग्री बिजनेस एवं फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, ऑटोमोटिव  एंड ऑटो कम्पोनेट, टूरिम, फार्मास्युटिकल, बॉयोटेक्नालॉजी, आईटी, आईटीएस, हेल्थ केयर, कौशल विकास सहित लॉजिस्टिकस एंड वेयरहाउसिंग सेक्टरों पर विशेष फोकस किया गया है. इनमें न सिर्फ सरकार की तरफ से कई सेक्टरों में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान पैकेज की घोषणा की गई है, बल्कि निवेश में बाधक पुराने नियमों को भी बदला गया है.

अधिक निवेश पर विशेष पैकेज
शिवराज कैबिनेट ने प्रदेश में औद्योगिक निवेशक को बढ़ाने और उद्योगपतियों को आकर्षित करने के लिए औद्योगिक समूहों द्वारा 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश पर विशेष अनुदान की व्यवस्था की गई है. इसके तहत एक औद्योगिक समूह द्वारा 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक और 50 हजार करोड़ रुपए तक पूंजी निवेश (वर्ग-1) तथा 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक के पूंजी निवेश पर (वर्ग-2) विशेष पैकेज दिया जाएगा. इसमें वर्ग-1 एवं वर्ग-2 की परियोजनाओं को क्रमश: 8 एवं 10 वर्ष की प्रवेश कर छूट मिलेगी. वहीं वर्ग-1 एवं वर्ग-2 के अंतर्गत परियोजना को 75 प्रतिशत रियायत पर दी जाने वाली शासकीय भूमि (नगर निगम एवं सीमा से 8 किमी बाहर) को क्रमश: 75 एवं 100 एकड़ किया गया है. इसके साथ ही वर्ग-1 एवं वर्ग-2 की परियोजनाओं को केप्टिव पॉवर संयंत्र पर विद्युत शुल्क से क्रमश: 12 एवं 14 वर्ष की छूट दी गई है.

उर्जा विकास उपकर समाप्त
कैबिनेट ने उद्योग संवर्धन नीति में महत्वूर्ण प्रस्ताव करते हुए निवेश प्रक्रियाओं को काफी सरल कर दिया है. इसके तहत निर्यात कर को समाप्त करने के लिए अधिनियम में वांछित संशोधन किया जाएगा. वहीं नवीन औद्योगिक क्षेत्रों को इंडस्ट्रीयल टाउनशिप घोषित करने की कार्यवाही भी की जा रही है. वहीं विद्यमान अपात्र उद्योगों की सूची का वर्तमान औद्योगिक परिदृश्य के परिपेक्ष्य में सकरात्मक पुनर्रीक्षण किया जाएगा. इसके साथ कैप्टिव पॉवर संयंत्र से उत्पादित विद्युत के स्वयं के उपयोग पर उर्जा विकास उपकर को समाप्त कर दिया है.

जिलों का वर्गीकरण समाप्त
कैबिनेट ने प्रदेश में सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए जिलों के वर्गीकरण को समाप्त कर ‘सÓ श्रेणी की सुविधान प्रदान की जाएगी. वहीं इनपुट टैक्स की प्रतिपूति त्रैमासिक आधार पर की जाएगी. सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए समस्त जिलों में ब्याज अनुदान की दर 5 प्रतिशत, 7 वर्ष की अवधि और अधिकतम 20 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है. वहीं अजा, अजजा, महिला, निशक्तजन श्रेणी के लिए सहायता दर पूर्ववत रहेगी.

शासकीय एवं निजी भूमि बैंक बनेगा
प्रदेश  में निवेश को आकर्षित करने और उद्योगपतियों को दी जाने वाली सुविधाओं के तहत औद्योगिक प्रयोजन के लिए उपयुक्त शासकीय एवं निजी भूमि लैंड बैंक बनाया जाएगा. इसमें निजी भूमि को सम्मिलत करने के लिए भूमि स्वामियों से आपसी समझौते के आधार पर भूमि प्राप्त करने के लिए उपयुक्त अधिनियम बनाया जाएगा. वहीं भूमि आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन एवं आवंटन की व्यवस्था की जाएगी. इसके साथ ही मप्र औद्योगिक भूमि एवं औद्योगिक भवन प्रबंधन नियम 2008 में संशोधन किया जाएगा.

वेंडर डेवलपमेंट
उद्योग संवर्धन  नीति में ऑटोमोबाइल एवं टेक्सटाइल  सेक्टर पर भी विशेष ध्यान दिया गया  है. इसमें वृहद उद्योगों की  वेंडर यूनिट्स द्वारा न्यूनतम 75 प्रतिशत  विक्रय मदर यूनिट को करने पर मदर यूनिट की तरह सुविधाओं का पैकेज दिया जाएगा. वहीं मदर यूनिट द्वारा वेंडर यूनिट को भूमि सब लीज करने की अनुमति भी दी जाएगी. नीति के तहत इस सेक्टर के उद्योगों द्वारा अंतरित तैयार माल के संदर्भ में इनपुट टैक्स के 50 प्रतिशत राशि की सहायता दी जाएगी. ऑटोमोबाइल उद्योगों के लिए 500 करोड़ से अधिक के स्थायी पूंजी निवेश के शीर्ष स्तरीय निवेश संवर्धन साधिकार समिति में प्रकरण वार निर्णय लिया जाएगा. वहीं नवीन टेक्सटाइल इकाइयों को पूंजी निवेश के 10 प्रतिशत, अधिकतम 1 करोड़ का अनुदान, वहीं 100 करोड़ से अधिक स्थायी पूंजी निवेश की नवीन इकाइयों को 7 वर्ष तक प्रवेश कर में छूट प्रदान की जाएगी. टीयूएफ से लिंकड टर्म लोन पर 2 प्रतिशत की दर से 5 वर्ष के लिए अधिकतम 5 करोड़ रुपए का ब्याज अनुदान और अपेरल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना पर 25 प्रशित अनुदान, जिसकी अधिकतम सीमा 25 लाख रुपए होगी.

पूँजी निवेश अनुदान
नीति के  तहत सूक्ष्म एवं लघु श्रेणी के उद्योगों को समस्त जिलों में 15 प्रतिशत की दर से अधिकतम राशि 15 लाख रुपए की गई है. अजा, अजजा, महिला एवं निशक्तजन श्रेणी के लिए सहायता की दर 20 प्रतिशत व अधिकतम 20 लाख रुपए अनुदान का प्रावधान किया गया है. इसके साथ ही थ्रस्ट सेक्टर की सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को सभी जिलों में 25 प्रशित की दर से अधिकतम 30 लाख रुपए और थ्रस्ट सेक्टर के मध्यम उद्योगों को 25 प्रतिशत की दर से अनुदान दिया जाएगा. इसमें पिछड़ा ‘अ. जिले में अधिकतम 12 लाख, पिछड़ा ‘ब. जिले में 18 लाख और पिछड़ा ‘स. जिले में अधिकतम 30 लाख रुपए के अनुदान की व्यवस्था की गई है.

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