अभी कुछ समय पहले तक शब्द ‘विकास’ का राजनीति में चलन बहुत जोरों से और बहुत समय तक चलता रहा है. यह इतना व्यापक रूप से प्रयोग में आया कि समझ से परे हो गया कि कहां, कैसे और क्या है और कब आयेगा. अब सब तरफ ‘निवेश’ सुनाई दे रहा है. कुछ दिनों में पुलिया-पुल बनाना भी निवेश कहा जायेगा. सड़कें तो निवेश के दायरे में आ गईं जो अभी तक सरकारों का जनता के टैक्सों से जनता की सुविधा माना जाता था. अब स्वास्थ्य भी ‘उद्योग’ हो गया है तो वहां भी ‘निवेश’ पहुंच गया.

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं कृषक हैं और आधुनिक दृष्टि भी रखते हैं. वे राज्य में कृषि व उद्योग दोनों में निवेश व विकास की बात जोरों पर कर रहे हैं. सम्पूर्ण भारत की तरह मध्यप्रदेश भी अब बढ़-चढ़कर कृषि प्रधान की भूमिका में बम्पर फसलों से काफी आगे आ गया है. इसलिये यहां का निवेश भी कृषि व कृषि उद्योगों में सर्वाधिक होना चाहिए. उसके राज्य के स्वरूप के अनुसार ही कृषि औद्योगीकरण होगा. मध्यप्रदेश में बिजली, रासायनिक व जैविक खाद, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि औजार, ट्रेक्टर-हार्वेस्टर की ‘एग्रो ओरियेंटेड’ उद्योगों में प्राथमिकता व निवेश किया जाए. मध्यप्रदेश कृषि निवेश का राज्य बनना चाहिए.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

Related Posts: