वाशिंगटन, 28 सितंबर. विश्व के शक्तिशाली राष्ट्रों ने ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम विवाद के मद्देनजर दूसरे दौर की वार्ता के लिए आधार तय करने का निर्णय किया है. बशर्ते इस्लामिक देश की तरफ से कोई अहम पेशकश मिले.

अमेरिका के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि न तो अमेरिका और न ही उसका कोई अंतरराष्ट्रीय सहयोगी कूटनीतिक प्रयासों के बजाय सैन्य अथवा अन्य कार्रवाई के लिए तैयार था हालांकि इजरायल के राष्ट्रपति बेंजामिन नेतान्याहू ने इसकी वकालत की थी. अधिकारी ने बताया कि परमाणु बम पर ईरान के दशकों पूर्व रुख पर कायम रहने के बाद अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जर्मनी और रूस के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की थी लेकिन ईरान को परमाणु हथियारों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का उत्पादन बंद करने के लिए राजी नहीं किया जा सका.

अधिकारी ने बताया कि ईरान ने संवर्धित यूरेनियम का उत्पादन बंद करने की पेशकश की थी बशर्ते उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध खत्म कर दिए जाएं. क्लिंटन का मानना था कि यह बातचीत फिर से शुरू करने के लिए पर्याप्त नहीं है. अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इस समय ईरान को बातचीत करने के लिए अधिक बेहतर प्रस्ताव के साथ आना होगा.

ईरान का बाहरी हमले का ‘मुंहतोड़’ जवाब देने का संकल्प

संयुक्त राष्ट्र. इजरायली प्रधानमंत्री द्वारा इस्लामिक गणतंत्र को परमाणु बम हासिल करने से रोकने के लिए ‘लक्ष्मण रेखा’ खींचे जाने का आह्वान किए जाने के बाद ईरान ने किसी भी बाहरी हमले का ‘मुंहतोड़’ जवाब देने का संकल्प लिया है.

किसी भी प्रकार के परमाणु सैन्य कार्यक्रम से इनकार करते हुए संयुक्त राष्ट्र में ईरान के उप राजदूत ने कहा कि उनका देश ‘अपनी रक्षा करने में सक्षम है और किसी भी बाहरी हमले का पूरी ताकत से जवाब देने का पूरा अधिकार रखता है.’ उप राजदूत इशगाह अल हबीब ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि इस्राइल एक ऐसा देश है जो आतंकवाद पर आधारित है और पूरी दुनिया में आतंकवाद का संस्थापक है. अल हबीब ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के दिए गए भाषण में ईरान के खिलाफ ‘बेबुनियादÓ आरोप लगाने का आरोप लगाया. नेतनयाहू ने अपने भाषण में कहा था कि ‘ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम पर स्पष्ट लक्ष्मण रेखा खींचे जाने की जरूरत है.

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