राजगढ़ 31 मई, नससे. जिला मुख्यालय पर भू-माफियाओं के मजबूत नेटवर्क के चलते अनपढ़ गरीब किसानों की जमीनों की बंदर बांट, फर्जी रजिस्ट्रियों का क्रम थमने को तैयार नहीं है. हालांकि प्रशासन द्वारा मुस्तैदी दिखाकर कुछ लोगों के विरूद्ध पुलिस में प्रकरण दर्ज कर जांच की जा रही है. लेकिन जांच लंबी खिंचने और प्रशासन द्वारा गरीब किसानों की जमीन की रजिस्ट्री फर्जी दस्तावेजों के आधार पर न हो इसके लिए कोई कारगर हल जिला प्रशासन के पास नजर नहीं आ रहा है.

गौरतलब है कि जिला मुख्यालय पर विगत दिनों आर.एस.एस. के बड़े नेता भगवत शरण माथूर को फर्जी तरीके से जमीन बेची गई थी. एक अन्य मामले मे गरीब कृषक रोड़ा पिता अमरा तंवर निवासी ग्राम राकलिया तहसील राजगढ़ की आठ हेक्टेयर भूमि को फर्जी व्यक्ति के माध्यम से इंदौर निवासी एक महिला को 8 लाख 92 हजार रूपए में विक्रय कर दिया गया है. जिला प्रशासन यदि गहराई से पड़ताल करे तो क्षेत्र में भू-माफियाओं पर लगाम लगाकर गरीब किसानों को भूमिहीन होने से बचाया जा सकता है.

ताजा खुलासे के अनुसार गुरूवार को ग्राम भवानीपुरा तहसील राजगढ़ के सैकड़ों ग्रामीणों ने जब उप पंजीयक कार्यालय पहुंचकर ग्राम वासी बीरम पिता गोपीलाल निवासी भवानीपुरा की जमीन से संबंधित रजिस्ट्री और अन्य दस्तावेजों की छायाप्रतियां निकलवाई, तो बीरम व अन्य ग्रामीणों के पैरोतले जमीन खिसक गई. दस्तावेजों के अनुसार बीरम की बहन मेहताबाई पिता गोपीलाल ने बीरम के नाम सर्वे नं. 213/2, 216, 222, 250, 252 की 5 हैक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री 24 जनवरी, 2012 की गई थी. भू-माफियॉओं ने इसी सर्वे नंबर की इसी 5 हैक्टेयर जमीन को एक फर्जी महिला को मेहताबाई पिता गोपीलाल बनाकर 14 फरवरी, 2012 को इंदौर निवासी सशांक मेहता पिता हितेश मेहता को विक्रय कर दी.

उक्त खुलासे के साथ स्पष्ट है कि जिला मुख्यालय पर बड़े भू-माफिया सक्रिय है और बड़ी चतुराई से अपने काम को जिले में अंजाम देकर लाखों रूपयों की जमीनों की हेर-फेर कर क्षेत्र के गरीब अनपढ़ किसानों को चूना लगा रहे है. जिला प्रशासन द्वारा इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की कोशिश जरूर की जा रही है, लेकिन फील्ड में काम करने वाले जिम्मेदार लोग ही भू-माफियॉओं के साथ कंधे मिलाकर भ्रष्टाचार में लिप्त हो तो अनपढ़ किसान तो खून के आंसू रोकर लुटता ही रहेगा.

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