अहमदाबाद, 21 नवंबर. मोदी सरकार को झटका देते हुए एसआईटी ने गुजरात हाई कोर्ट को सौंपी अपनी रिपोर्ट में इशरत जहां एनकाउंटर केस को फर्जी बताया है। इसके बाद गुजरात हाई कोर्ट ने इस शूटआउट में शामिल रहे गुजरात पुलिस के छह अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।

एसआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक इशरत जहां की मौत और एनकाउंटर का समय अलग-अलग था। सोमवार को जस्टिस जयंत पटेल और जस्टिस अभिलाषा कुमारी की बेंच ने शूटआउट में शामिल छह पुलिस अधिकारियों पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत नई एफआईआर दर्ज करने को कहा है। कोर्ट ने इस केस की जांच सीबीआई या एनआईए से कराने से कहा है। कोर्ट ने इस बारे में याचिकाकर्ताओं और गुजरात सरकार से राय भी मांगी है। गुजरात पुलिस ने 15 जून 2004 में कॉलेज स्टूडेंट इशरत जहां और उसके तीन दोस्तों जावेद गुलाम शेख उर्फ प्राणेश कुमार पिल्लई, अमजद अली उर्फ राजकुमार अकबर अली राणा और जीशान जौहर अब्दुल गनी को फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया था। पुलिस का कहना था कि ये लोग लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे और सीएम नरेंद्र मोदी को मारना चाहते थे। गुजरात सरकार ने कहा है कि केंद्र को भी पता था कि इन लोगों का टेरर लिंक है। इससे पहले 7 सितंबर 2009 को जस्टिस एस. पी. तमांग की रिपोर्ट में भी इस एनकाउंटर को फर्जी बताया गया था।

इस रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया था कि कुख्यात डीआईजी डी. जी. बंजारा, शहर के पुलिस कमिश्नर के. आर. कौशिक और मुख्यमंत्री की विशेष अनुकंपा पर तरक्की पाने की उम्मीद बांधे उनके कुछ और सहयोगियों ने कैसे इशरत जहां, जावेद गुलाम शेख उर्फ प्राणेश पिल्लई, अमजद अली उर्फ राजकुमार राणा और अकबर अली को महाराष्ट्र में ठाणे और कुछ और दीगर जगहों से 12 जून को उठाया और कैसे 14 जून की रात 10 से 12 बजे के बीच एक-एक करके उन्हें गोली मार दी।

Related Posts: