पीएसएलवी सफलता पूर्वक किया लॉन्च

श्रीहरिकोटा (आंध्रप्रदेश), 9 सितम्बर. भारत ने आज स्वदेशी पीएसएलवी-सी21 राकेट के प्रक्षेपण के साथ ही सौवें अंतरिक्ष मिशन का सफल कीर्तिमान अपने नाम कर लिया। इस राकेट ने दो विदेशी उपग्रहों को उनकी कक्षा में स्थापित किया। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जब पीएसएलवी-सी21 अपने साथ दो विदेशी उपग्रहों को लेकर रवाना हुआ तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस ऐतिहासिक सफलता को देखने के लिए वहां मौजूद थे। यह रॉकेट अपने साथ फ्रांस के उपग्रह एसपीओटी 6 को और जापान के अंतरिक्ष यान प्रॉइटेरेस (पीआरओआईटीईआरईएस) को लेकर रवाना हुआ और प्रक्षेपण के 18 मिनट बाद उन्हें उनकी कक्षा में स्थापित भी कर दिया।

यह प्रक्षेपण सुबह नौ बज कर 51 मिनट पर किया जाना था लेकिन 51 घंटे की उल्टी गिनती पूरी होने के बाद उसमें दो मिनट का विलंब हो गया। पोलर सैटेलाइट लॉन्च वेहिकल (पीएसएलवी) सुबह नौ बज कर 53 मिनट पर तेज आवाज के साथ फ्रांसीसी उपग्रह को लेकर अपनी 22 वीं उड़ान पर रवाना हुआ। कुल 720 किलोग्राम वजन वाला यह फ्रांसीसी उपग्रह भारत द्वारा किसी विदेशी ग्राहक के लिए प्रक्षेपित सर्वाधिक वजन वाला उपग्रह है।

मील का पत्थर : पीएम
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे एक शानदार सफलता और मील का पत्थर करार दिया। सिलसिलेवार पूरी प्रक्षेपण प्रक्रिया को उत्सुकता से देख रहे सिंह ने दोनों उपग्रहों के कक्षाओं में स्थापित होने तक प्रत्येक चरण की सराहना की। यह प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन :इसरो: के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इसरो ने 19 अप्रैल 1975 में स्वदेश निर्मित “आर्यभट्ट” के प्रक्षेपण साथ अपने अंतरिक्ष सफर की शुरूआत की थी। आर्यभट्ट को एक रूसी रॉकेट के जरिये भेजा गया था।

21वीं सफल उड़ान
इस प्रक्षेपण से पीएसएलवी की बहु उपयोगिता और मजबूती एक बार फिर नजर आई। सितंबर 1993 में इस रॉकेट ने अपनी पहली उड़ान भरी और नाकाम रहा। लेकिन आज इसने अपनी 21वीं सफल उड़ान भरी। आज पीएसएलवी के साथ कोई भारतीय उपग्रह नहीं भेजा गया बल्कि यह इसरो का विदेशी ग्राहकों के लिए तीसरा वाणिज्यिक प्रक्षेपण था। भारत ने पहले वाणिज्यिक प्रक्षेपण के तौर पर 2007 में पीएसएलवी के साथ इटली के 350 किग्रा वजन वाले एजाइल उपग्रह को भेजा था। इसके कक्षा में स्थापित होने के बाद एसपीओटी 6 भारत का सबसे बड़ा वाणिज्यिक प्रक्षेपण था। अब तक इसरो ने 300 किग्रा से कम वजन वाले 12 अन्य विदेशी वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि पूर्व में फ्रांस के पांच एसपीओटी उपग्रह यूरोपियन एरियन रॉकेट से प्रक्षेपित किए गए हैं।

फ्रांस के ईएडीएस की सहायक शाखा एस्ट्रियम सैस द्वारा निर्मित एसपीओटी 6 एक भूविश्लेशक उपग्रह है जबकि माइक्रो उपग्रह प्रोइटेरेस को ओसाका इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के संकाय और छात्रों ने विकसित किया है। दोनों ही उपग्रह जापान के होन्शु द्वीप के कन्साई क्षेत्र का अध्ययन करेंगे। इसरो के सूत्रों ने बताया कि आज के मिशन के साथ ही एजेंसी ने अब तक 62 उपग्रह, एक स्पेस रिकवरी मॉड्यूल और 37 रॉकेट प्रक्षेपित कर लिए हैं। इनकी कुल संख्या 100 होती है।

प्रत्येक भारतीय रॉकेट के प्रक्षेपण और प्रत्येक उपग्रह को कक्षा में स्थापित किए जाने को एक एक मिशन माना जाता है। सूत्रों ने बताया कि आज के मिशन में दो मिनट का विलंब उड़ान के दौरान अंतरिक्ष के मलबे से टक्कर से बचने की खातिर किया गया। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक, मलबे के 500,000 से अधिक टुकड़े या ‘स्पेस जंक’ का पृथ्वी की कक्षा में पता चला है। यह कचरा 17,500 मील प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रहा है जो मलबे के छोटे टुकड़े से भी उपग्रह या अंतरिक्ष यान को क्षतिग्रस्त करने के लिए पर्याप्त है।

भारतीय चंद्र अभियान रूस पर निर्भर
भारतीय अंतरिक्ष एवं अनुसंधान संगठन (इसरो) प्रमुख ने रविवार को कहा कि चीन के साथ असफल अंतरग्रहीय अभियान के बाद देश का अगला चंद्र अभियान रूस के निर्णय पर निर्भर करेगा। आज ही इसरो ने अपने 100वें अभियान सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन ने कहा, चीन के साथ अंतरग्रहीय अभियान विफल हो जाने के बाद रूस इसकी समीक्षा कर रहा है। चंद्रयान-2 के लिए रूस ही हमें लैंडर (चांद की सतह पर उतरने के लिए यान) उपलब्ध करा सकता है।  भारत लूनर आर्बिटर एवं रोवर का निर्माण करेगा। रूस कह चुका है कि वह समीक्षा के बाद निर्णय लेकर हमारा साथ देगा। देश का चंद्रयान-2 अभियान 2014 में भूसमकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलएवी) द्वारा भेजना प्रस्तावित है। राधाकृष्णनन ने कहा कि इसरो रॉकेट के साथ लूनर आर्बिटर एवं रोवर तैयार करेगा।हालांकि राधाकृष्णनन ने चंद्रयान अभियान की देरी पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।

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