उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए एकजुट

नई दिल्ली, 16 जुलाई. देश के वित्त और विदेश मंत्री रह चुके जसवंत सिंह एनडीए की ओर से उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार होंगे। राष्ट्रपति चुनाव में नजर आए मतभेदों को पीछे छोड़ते हुए बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने आज सर्वसम्मति से जसवंत को उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया। यूपीए की ओर से हामिद अंसारी मैदान में हैं।

एनडीए की बैठक के बाद लालकृष्ण आडवाणी ने ऐलान किया कि जसवंत को उप राष्ट्रपति पद के लिए सर्वसम्मति से उम्मीदवार चुना गया है। अब एनडीए की कोशिश होगी कि जसवंत के लिए एआईएडीएमके, बीजेडी समेत अन्य दलों का समर्थन हासिल किया जाए। आडवाणी ने यूपीए के घटक दल तृणमूल कांग्रेस से भी इस सिलसिले में बातचीत करने की संभावना से इनकार नहीं किया है। तृणमूल ने गोपाल कृष्ण गांधी और कृष्णा बोस के नामों का प्रस्ताव संभावित उम्मीदवारों के रूप में किया था। ममता बनर्जी ने अब तक स्पष्ट नहीं किया है कि वह अंसारी की उम्मीदवारी का समर्थन करेंगी या नहीं। बीजेपी ने अपने महत्वपूर्ण सहयोगी जेडी(यू) के साथ संबंध सुधारने की कवायद में शरद यादव से एनडीए की ओर से उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने की पेशकश की।

आडवाणी ने कहा,  शरद यादव का नाम उप राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार के रूप में सामने आया था। सुषमा स्वराज ने उनसे बात कर इस बारे में विचार करने का आग्रह किया लेकिन उन्होंने कहा कि उनका स्वभाव इसकी इजाजत नहीं देता क्योंकि आज की तारीख में वह सक्रिय राजनीति में मुक्त रूप से काम कर रहे हैं और उप राष्ट्रपति पद इसे बाधित करता है। इसके बाद जसवंत के नाम पर विचार हुआ और एनडीए के सभी घटक दलों ने मुहर लगा दी।
गौरतलब है कि जेडी (यू) और शिवसेना राष्ट्रपति चुनाव में यूपीए के उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी का समर्थन कर रही हैं। जेडी (यू) के अध्यक्ष शरद यादव और शिवसेना के सांसद संजय राउत एनडीए की आज की बैठक में उपस्थित थे।

बताया जाता है कि संख्या बल के अभाव के चलते जसवंत सिंह शुरू में उप राष्ट्रपति पद का चुनाव लडऩे के इच्छुक नहीं थे। लेकिन बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने 2014 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए यूपीए को वॉकओवर नहीं देने के राजनीति महत्व को समझाते हुए उन्हें यह चुनाव लडऩे के लिए राजी कर लिया। उम्मीदवारी की घोषणा के बाद जसवंत सिंह ने एनडीए का आभार व्यक्त करते हुए कहा,  यह बड़ी जिम्मेदारी और बड़ी चुनौती है।

इस मौके पर आडवाणी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति, दोनों पदों के चुनाव में यूपीए ने आम सहमति बनाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पद के लिए प्रणव मुखर्जी को यूपीए का उम्मीदवार घोषित किए जाने के पांच मिनट बाद और उप राष्ट्रपति पद के लिए हामिद अंसारी को प्रत्याशी घोषित करने से पांच मिनट पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें और बीजेपी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को फोन करके इस बारे में बताया था। आडवाणी ने कहा कि दोनों अवसरों पर प्रधानमंत्री ने केवल औपचारिकता भर निभाई। आडवाणी ने संवाददाताओं से कहा, हामिद अंसारी ने लोकपाल बिल पर चर्चा के दौरान जिस तरीके से राज्यसभा की कार्यवाही अचानक स्थगित की उस पर एनडीए को आपत्ति है। उन्होंने कहा कि जेडी (यू) अध्यक्ष शरद यादव ने बैठक में याद दिलाया कि महिला आरक्षण विधेयक को पारित करने के दौरान भी उसका विरोध कर रहे सांसदों को बाहर करने के लिए मार्शल का इस्तेमाल किया जाना भी चिंताजनक घटना थी।

हामिद ने दिया था  धोखा : आडवाणी

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि जिस तरीके से शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन लोकपाल पर चर्चा के दौरान हामिद अंसारी ने सदन को स्थगित किया था, उसे देखते हुए एनडीए उन्हें वॉकओवर देना नहीं चाहती थी।

जसवंत सर्वसम्मत उम्मीदवार : नीतीश

नीतीश कुमार ने  कहा कि उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में राजग के भीतर कोई मतभेद नहीं है और इस पद के लिए भाजपा के जसवंत सिंह को सर्वसम्मति से चुना गया है। राजग ने मिलजुलकर उन्हें उम्मीदवार के लिए चुना है। उपराष्ट्रपति के लिए उम्मीदवार का चयन सहमति से हुआ है। मतों के वर्तमान समीकरण में जसवंत सिंह की जीत की संभावना के बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने कहा एक बार युद्ध के मैदान में उतर जाने के बाद हार या जीत नहीं देखी जाती है।Ó

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