नई दिल्ली, 4 अप्रैल. उत्तर प्रदेश में सपा के चुनावी वादों को पूरा करने में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय अहम रोल अदा कर सकता है.

पिछले दिनों लखनऊ में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मुलाकात को दोस्ती से ज्यादा राज्य के चहुमुखी विकास के लिए केंद्रीय योजनाओं के धन आवंटन के परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है. जयराम यूपी के लिए मनरेगा के कायदे कानूनों को लचीला करने पर विचार कर रहे हैं. इसके बदले प्रदेश सरकार पिछली सरकार में हुए घोटालों की जांच में केंद्र की मदद कर सकती है. मुख्यमंत्री ने प्रदेश में ग्रामीण विकास मंत्रालय की योजनाओं को जोरशोर से लागू करने मंशा जाहिर की है. इस संबंध में उन्होंने जयराम के समक्ष प्रदेश में ग्रामीण विकास की योजनाओं को सफलता पूर्वक लागू करने का एक खाका भी प्रस्तुत किया.

जिसमें मनरेगा, स्वरोजगार योजना, स्वच्छता एवं शुद्ध पेयजल और इंदिरा आवास आदि योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए नए सिरे से रूप रेखा तैयार की गई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पड़ोसी राज्यों के मुकाबले यूपी में मनरेगा की दरें कम हैं. खासकर हरियाणा के मुकाबले काफी कम हैं. उन्होंने जयराम रमेश से यूपी के लिए मनरेगा की मजदूरी दरें 150 रुपये करने की मांग की है. साथ ही मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए पुरुषों के मुकाबले काम के औसत का मानक 25 फीसदी कम करने का सुझाव दिया है. अखिलेश के मुताबिक महिलाओं पर घर की भी जिम्मेदारी होती है. लिहाजा पुरुषों के मुकाबले उन्हें यह रियायत दी जानी चाहिए. मनरेगा मजदूरों को समय पर भुगतान के लिए मुख्यमंत्री ने प्रदेश में जल्द से जल्द आधार प्रणाली को लागू करने का आश्वासन भी जयराम रमेश को दिया है. जयराम रमेश ने इन मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन प्रदेश सरकार को दिया है.

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