नक्सलियों की धमाके के लिए घिनौनी करतूत

Jharkhandनई दिल्ली, 10 जनवरी. झारखंड के लातेहार में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ के दौरान अब तक सीआरपीएफ के नौ जवान शहीद हो गए, लेकिन इस दौरान नक्सलियों का क्रूर और खौफनाक चेहरा सामने आया है।

नक्सलियों ने जवानों के साथ काफी बर्बरता की है और उनके मृत शरीर के अंदर बम को छिपाया। नक्सलियों को कोशिश यह थी कि जब घटनास्थल से जवान के मृत शरीर को उठाया जाए तो वहां फिर धमाका हो और ज्यादा संख्या में लोग मारे जाएं। रांची के अस्पताल में पोस्ट मार्टम के लिए तीन जवानों के शवों को लाया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एक जवान के शव के भीतर बम होने की जानकारी मिली। डॉक्टरों को अंदेशा उस समय हुआ जब इनमें से एक शरीर के ऊपर स्टिच लगे हुए थे। इसे देखने के बाद यह किसी अप्रशिक्षित डॉक्टर का काम लगा। संदेह गहराने के बाद, शव का पहले एक्सरे किया गया, जिसमें  तारों से युक्त डिवाइस की मौजूदगी का पता चला।  तुरंत  बॉम्ब डिस्पोजल स्कवायड को बुलाया और  डिवाइस को बाहर निकाला।

झारखंड के डीजीपी जेएस रथ ने कहा कि एक जवान के शव में विस्फोटक डिवाइस छिपे होने का पता चला। यह बम एक क्रूड डिवाइस था। यह डिवाइस 8 गुणा दस इंच की साइज का था और इस बम के संबंध में और विश्लेषण किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, बम को मृत शरीर में कुछ इस तरह स्टिच किया गया था कि कम से कम दबाव पडऩे पर ही इसमें धमाका हो सकता था।

गौर हो कि झारखंड के लातेहार जिले में अमुआटिकर गांव के कटीला इलाके में नक्सली माओवादियों द्वारा घात लगाकर सोमवार शाम किए गए हमले के बाद से मुठभेड़ में अब तक सीआरपीएफ के नौ जवानों समेत दस सुरक्षाकर्मियों और तीन नागरिकों की मौत हो चुकी है। सीआरपीएफ के 13 जवानों और झारखंड पुलिस के दो जवानों समेत कम से कम पंद्रह जवान घायल हुए हैं, जिनका इलाज रांची के अपोलो अस्पताल में किया जा रहा है। जबकि पुलिस ने कम से कम नौ माओवादियों को भी इस मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया है।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब पोस्टमार्टम के लिए शवों को रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में ले जाया गया, तब चिकित्सकों ने सीआरपीएफ के एक जवान के पेट पर कटे का निशान पाया। जवान के पेट के अंदर जब बम होने का संदेह हुआ तब चिकित्सकों ने पुलिस को बुलाया। बम निरोधक दस्ते ने बम को निष्क्रिय कर दिया।  हमले के बाद अतिरिक्त बलों को भेजा गया था जिन्होंने सीआरपीएफ के कुछ जवानों को बचाया था तथा कुछ शव भी बरामद किए थे। नक्सलियों ने सीआरपीएफ के मददगार होने के संदेह में दो ग्रामीणों की भी हत्या कर दी थी। पुलिस ने कहा कि नक्सलियों ने झूठे संदेश भेजकर लातेहार के अमुआटीकर गांव के समीप सुरक्षा बलों को लालच के जाल में फंसाया था। इस कारण सोमवार को दोपहर बाद सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी जो बुधवार शाम तक जारी रहा। उल्लेखनीय है कि झारखंड के 24 जिलों में से 18 में नक्सली सक्रिय हैं।

वामपंथी उग्रवाद अब आतंकवाद में बदल गया: भाजपा

नयी दिल्ली, 1० जनवरी, नससे.   भाजपा ने कहा कि यह घटना बेहद दुखदायी है और सारी हदें पार कर जाने वाली है. पार्टी ने कहा कि देश का वामपंथी उग्रवाद अब आतंकवाद में बदल गया है और सरकार को उससे निपटने का तरीका भी बदलना चाहिए.

पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने  कहा कि  हमेशा नक्सलियों के पक्ष में बोलने और सुरक्षा बलों की आलोचना करने वाले कथित मानवाधिकारवादियों की आंखें इस घटना से खुल जानी चाहिए. केन्द्र सरकार को  राज्यों से मिल कर एकीकृत कारगर योजना बनाने की पहल करनी चाहिए. गौरतलब है कि झारखंड के लातेहर जिले में तीन दिन पहले नक्सली हमले में सीआरपीएफ  के नौ जवानों सहित 13 लोग मारे गए थे. मारे गए जवानों में से एक का नक्सलियों ने शव बम के रूप में इस्तेमाल करते हुए उसका पेट काट कर उसमें डेढ़ किलोग्राम का बम डाल कर उसे सिल दिया. डॉक्टरों के शक होने पर शव से छेड़छाड़ करने से पहले बम निष्क्रिय करने वाले दस्ते को बुलाकर उसे बेअसर किया गया जिससे एक और बड़ा हादसा होने से बच गया.

शहीद ‘यशवीर’ को विदाई देने उमड़ा जनसैलाब

नवभारत टीम
मुरैना/सबलगढ़, 10 जनवरी. नक्सलियों के साथ लातेहार जिले के अमुआ टीकर गावं में हुई मुठभेड़ में जादौनमांटी के शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए जैसे जनसैलाब उमड़ आया. नक्सली हमले में शहीद हुए यशवीर जादौन का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. शहीद को विदाई देने के लिए भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष और क्षेत्रीय सांसद नरेन्द्र सिंह तोमर भी पहुंचें हुए थे.

नक्सली हमले में शहीद हुए यशवीर का जन्म सबलगढ़ तहसील के ग्राम भटपुरा में हुआ था. शिक्षक पिता हरदेव सिंह जादौन के घर जन्मे यशवीर तीन भाईयों में सबसे बड़े थे, बीते बर्ष उनके छोटे भाई अनिल की आकस्मिक मौत हो गई थी. शहीद यशवीर के परिवार में उनकी दो पुत्रियां जिनमें पुत्री नम्रता जो इन दिनों बीएससी में अध्ययनरत है, तो वहीं दूसरी पुत्री शिवानी कक्षा 10 एवं पुत्र विनायक सिंह कक्षा 6 वीं छात्र है. वर्ष 1991 में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल की 134 कंपनी में भर्ती हुए यशवीर की इन दिनों झारखण्ड के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में थी. विगत सोमवार 7 जनवरी को नक्सलियों के साथ लातेहार जिले के अमुआ टीकर गावं में हुई मुठभेड़ में 12 अन्य जवानों के साथ यशवीर भी वीरगति को प्राप्त हो गए थे. 7 जनवरी को शहीद हुए यशवीर की पार्थिव देह गुरुवार को उनके पैतृक गांव लाई गई. शहीद यशवीर की पार्थिव देह के गांव में पहुंचतें ही वहां का माहौल गमगीन हो गया. यशवीर के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था, तो वहीं गांव के अन्य लोगों की आंखें भी नम थी. जिसके बाद शहीद यशवीर को अंतिम विदाई देने जैसे जनसैलाब ही उमड़ पड़ा, उनकी अंतिम यात्रा में आसपास के गांवों के हजारों लोग शामिल थे.

शहीद की पार्थिव देह को लेकर पहुंचे सेना के जवानों ने उन्हें सलामी दी, जिसके बाद शहीद यशवीर का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के साथ कलेक्टर डीडी अग्रवाल, एसपी जयदेवन ए, एसडीएम राजेश सिंह राठौड़, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष सूबेदार सिंह रजौधा, भाजपा जिलाध्यक्ष अनूप सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष केदार सिंह यादव, युमो जिलाध्यक्ष विजय जादौन, सबलगढ़ नपाध्यक्ष दीपक चौधरी सहित हजारों की संख्या में लोग उपस्थित थे.

पिता ने कहा बेटे पर गर्व
अपने ज्येष्ठ पुत्र के शहीद होने पर शहीद यशवीर के पिता का कहना था कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है, कि उनका बेटा मातृभूमि के काम आया.

सांसद तोमर ने बंधाया ढांढस
शहीद यशवीर के निज निवास पर पहुंचें क्षेत्रीय सांसद एवं भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने शहीद के परिजनों को ढांढस बंधाते हुए शोक संतृप्त परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की.

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