जिला प्रशासन के निर्देश के बाद भी नहीं हो पा रही है कार्यवाही

गांधीनगर, 8 नवंबर, सं. विकास खण्ड फंदा के अन्तर्गत कई गाँवों में इन दिनों झोला छाप डाक्टरों का बोलबाला बना हुआ है जिसके चलते वे ग्रामीणों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं.

हालांकि पूर्व में भी जिला प्रशासन ने झोला छाप डाक्टरों पर कार्यवाही के निर्देश दिये थे लेकिन उन निर्देशों पर भी स्वास्थ्य विभाग ने अमल नहीं किया. हालात ये हैं कि गाँव-गाँव में फैले कुकुरमुत्ते की तरह फैले ये डाक्टरें ग्रामीणों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने में लगे हुए हैं. जानकारी के अनुसार विकास खण्ड फंदा के अन्तर्गत अधिकतर गाँवों में ये नाम बंगाली के नाम से जाने जाते हैं और कई तो लोकल डाक्टरों के नाम से भी जाने जाते हैं. कम दाम में उपचार करने वाले इन लोगों के चंगुल में ग्रामीण फंस जाते है और मजबूरन उनसे इलाज कराने पर फंस जाते है और जिनका फायदा उठाने में ये लगे हुए हैं. यहाँ तक कि एक ग्लूकोज की बोतल चढ़ाने के भी 100 रुपये तक वसूल लेते है. यहाँ तक कि जिनको इसकी आवश्यकता नहीं होती है. इन झोला छाप डाक्टरों के पास लोकल दवाइयां भी देखी जा सकती है जो लोकल दवाई कम्पनी की दवाई के रेट में मरीजों को दे देते है और उनसे लंबी रकम भी वसूलते हैं.

राजधानी से लगे खजूरी सड़क फंदा, तूमड़ा, परवलिया, तारा सेवनिया, ईंटखेड़ी, सकड़, नीलबड़, बिल्खिरिया, झिरनिया, पाटनिया, कलाखेड़ी, कोलूखेड़ी, भौंरी, सालम, बरखेड़ा, ईंटखेड़ी, टीलाखेड़ी इत्यादि गाँवों में झोला छाप डाक्टर के चंगुल में ग्रामीण फंसते जा रहे हैं. उधर गांधी नगर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के अन्तर्गत आने वाले गाँवों में इन डाक्टरों का कोई भी दबाव नहीं होने की वजह से वे ग्रामीण मरीजों को लूटने से लगे है. बताया जाता है कि कई डाक्टर जो गाँवों में रह रहे लोगों का उपचार कर रहे है उनके पास न तो कोई डिग्री है और न ही उनके पास स्वास्थ्य विभाग का प्रमाण पत्र. अधिकतर झोला छाप डाक्टरों का यह भी सुनने में आया है कि वे होम्योपैथिक एवं आयुर्वेदिक के प्रमाण पत्र के आधार पर एलौपैथिक दवाओं से इलाज करते हैं. गांधी नगर में भी देखने को मिला था जहाँ एक डाक्टर ने एक अनुसूचित जनजाति के युवक का पैर बेकार कर दिया था जिसका मामला युवक ने जनसुनवाई में कलेक्टर को शिकायत की थी. शिकायत मे जिला स्वास्थ्य अधिकारी को उक्त डाक्टर पर कार्यवाही के निर्देश दिये थे. हालांकि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डाक्टर के यहाँ छापा भी मारा था और वह होम्योपैथिक के प्रमाण पत्र पर एलोपैथिक का उपचार कर रहा था यहाँ तक कि उस क्लीनिक पर जिस डाक्टर का बोर्ड लगा हुआ था वह भी फर्जी पाया गया लेकिन आज तक उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई और वह पुन: अपना व्यवसाय करने में लगा हुआ है.

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