अलग पासपोर्ट-पहचान दी थी

नई दिल्ली, 29 जून. भारत सरकार ने सुरजीत सिंह के इस दावे का खंडन किया है कि वह रॉ का जासूस था. केंद्रीय गृह सचिव आर.के. सिंह ने गृह मंत्री पी चिदंबरम की मौजूदगी में कहा है कि इन बातों का हम खंडन करते हैं. हम ऐसा काम नहीं करते. पी. चिदंबरम ने कहा कि अबू जिंदाल का पकड़ा जाना काफी अहम है और 26/11 हमले में उसकी भूमिका से जुड़े तमाम पहलुओं की जांच की जा रही है.

चिदंबरम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि रहमान मलिक की इस बात से हम पूरी तरह सहमत हैं कि अबू जिंदाल भारतीय नागरिक है. जैसे हमने इस तथ्य को स्वीकार किया, वैसे ही उन्हें भी इस मामले से जुड़े सारे तथ्य स्वीकार करने चाहिए. उन्हें मानना चाहिए कि अबू जिंदाल पाकिस्तान गया था, वहां ट्रेनिंग ली थी और उस कंट्रोल रूम में मौजूद था जहां से 26/11 हमले को संचालित किया जा रहा था. गृह सचिव आर.के. सिंह ने उनकी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, उन्हें स्वीकार करना चाहिए कि उसे अलग नाम से पासपोर्ट दिया गया था, उसे अलग पहचान दी गई थी और सऊदी अरब के पूछने पर उसे पाकिस्तानी नागरिक बताया गया था.

एक अन्य सवाल के जवाब में चिदंबरम ने कहा कि अबू हमजा हो या अबू जिंदाल – हम जानते हैं कि ऐसे अलग-अलग नाम अलग-अलग समय पर अलग-अलग लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है. इसलिए एक नाम के कई लोगों का होना कोई बड़ी बात नहीं है. अहम बात यह है कि इस शख्स का असली नाम जैबुद्दीन अंसारी है. उसे पाकिस्तान में काफी सुरक्षित ढंग से रखा गया था. अब आप इस बारे में अपने नतीजे निकाल सकते हैं. पाकिस्तान की जेल से एक दिन पहले रिहा होकर भारत आने वाले सुरजीत सिंह के बयानों को केंद्रीय गृह मंत्री आर.के. सिंह ने गलत बताया. गौरतलब है कि सुरजीत सिंह ने समाचार चैनलों से बातचीत करते हुए दावा किया कि उसे रॉ ने जासूसी करने पाकिस्तान भेजा था. उसने बताया कि उसका असली नाम मक्खन सिंह था. मगर, बचने के लिए उसने अपना नाम सुरजीत सिंह रख लिया था.  उसका दावा था कि उसने पाकिस्तान से कई अहम दस्तावेज भारतीय एजेंसियों को मुहैया कराए. इन बयानों की ओर ध्यान दिलाए जाने पर सिंह ने कहा, हम ऐसा काम नहीं करते. हमारा कोई जासूस नहीं है. हम इन बातों का खंडन करते हैं.

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