भोपाल 4 जून  कमिश्नर प्रवीण गर्ग द्वारा की जा रही जनसुनवाई और जन सुनवाई को परिणाम तक पहुंचाने की स्वस्थ्य मानसिकता का नतीजा है कि कुछ ऐसे मामलों का निराकरण संभव हो सका जिनका हल कठिन जान पडता था.

पहला मामला – पहले मामले में म.प्र. सचिवालयीन साख समिति द्वारा राशि भुगतान नहीं करने की शिकायत, शिकायत कर्ता द्वारा जनसुनवाई में दर्ज कराई गई. कमिश्नर ने शिकायत की गंभीरता को जाना समझा और उपायुक्त सहकारिता को शिकायत कर्ता का आवेदन इस निर्देश के साथ भेजा कि उसका निराकरण साफ सुथरे तरीके से पूरे कानूनी रूप में किया जाय. उपायुक्त को कमिश्नर द्वारा दिए गए निर्देशों की गंभीरता पता थी जिसके चलते उन्होंने मामले को पूरी तवज्जो दी.

दूसरा मामला- दूसरा मामला भी समिति द्वारा भू खण्ड की राशि लेने के बावजूद प्लाट नहीं देने से जुडा है. इस मामले में भी कमिश्नर प्रवीण गर्ग द्वारा उपायुक्त सहकारिता को गंभीरता से कार्रवाई के निर्देश दिए गए. इन निर्देशों के चलते उपायुक्त सहकारिता द्वारा प्रभावी कार्यवाही की गई. संस्था के पूर्व पदाधिकारियों द्वारा संस्था की ई सेक्टर की भूमि संस्था के गैर सदस्यों को बेचे जाने के चलते उनके खिलाफ अधिनियम की धारा 76(2) के तहत कार्यवाही की गई. इसके अलावा दोषी पूर्व पदाधिकारियों और भूमि खरीदने वाले गैर सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया.

वर्तमान संस्था अध्यक्ष को निर्देश दिए गए कि संस्था के पास उपलब्ध भूमि पर शिकायतकर्ता सहित ई सेक्टर के अन्य सदस्यों को भूखण्ड उपलब्ध कराने की आवश्यक कार्य योजना प्रस्तुत करें. इन दोनों ही मामलों पर कमिश्नर प्रवीण गर्ग की आवेदन लगाए जाने के समय से ही नजर थी. नतीजतन इन मामलों में कानूनी तौर पर वे सभी कदम उठाए गए जो जरूरी थे. स्वाभाविक है कि अब ऐसे गैरकानूनी कार्यो पर लगाम लग सकेगी.

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