• मोदी ही पड़े भारी

नई दिल्ली, 8 जून. देश की सबसे बडी विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी इस समय भारी अंतरकलह से जूझ रही है. ताजा घटनाक्रम में संजय जोशी ने यूपी के प्रभारी पद के साथ ही भाजपा से इस्तीफा दे दिया है. जोशी का इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने मंजूर कर लिया है. इस्तीफे के कारणों पर न जोशी, न भाजपा ने प्रकाश डाला है.

कहा जा रहा है कि जोशी पुन: आरएसएस के लिए कार्य करेंगे. टीवी चैनलों के अनुसार, संजय जोशी ने अपना इस्तीफा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी को भेजा. गडकरी को लिखे इस्तीफा पत्र में जोशी ने पार्टी से मुक्त होने की इच्छा जताई थी. गडकरी ने संजय जोशी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. अपने इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय जोशी ने कहा- हां, हमने इस्तीफा दिया है लेकिन यूपी के प्रभार से और यह इस्तीफा नरेंद्र मोदी के अल्टीमेटम के बाद दिया है. पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है. लेकिन भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा कि जोशी ने पार्टी छोड दी है, यह उनके इस्तीफे की भाषा से ही स्वयं स्पष्ट है. याद रहे, पिछले कुछ दिनों से पार्टी में मोदी बनाम जोशी की जंग तेज हो गई थी.

जोशी ने मोदी के खिलाफ दिल्ली और गुजरात में पोस्टर तक लगवा दिए थे. संजय जोशी संघ परिवार और नितिन गडकरी के काफी खासमखास माने जाते हैं. जोशी से नाराज गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पार्टी से निकाल बाहर करने के लिए गडकरी पर दबाव बनाया था. उन्होंने यह भी कहा था कि यदि उन्होंने जोशी को बाहर नहीं निकाला तो वह स्वयं पार्टी छोड देंगे. उत्तर प्रदेश के प्रभार से मुक्त करने के लिए जोशी की ओर से गडकरी को लिखे गए पत्र और फिर भाजपा अध्यक्ष द्वारा इसे स्वीकार कर लेने को इसी संदर्भ में जोडकर देखा जा रहा है. जोशी और मोदी के बीच तनाव की  पिछले महीने मुम्बई में हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मोदी तभी शामिल हुए, जब जोशी ने कार्यकारिणी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया.

मोदी के इस रवैये की पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दबी जुबान में निंदा भी की. पिछले दिनों दिल्ली में भाजपा कार्यालय और पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के आवास के साथ-साथ अहमदाबाद और अन्य शहरों में भी जोशी की बडी सी तस्वीर के साथ पोस्टर चिपकाए गए थे जिसमें मोदी का नाम लिए बगैर लिखा था कि किसी एक व्यक्ति की तानाशाही नहीं चलेगी. स्पष्ट तौर पर इशारा मोदी की ओर था. मोदी के इस रवैये की आलोचना भाजपा के मुखपत्र कमल संदेश में भी की गई. वहीं, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने जोशी की तारीफ कर मोदी को झटका दिया. आरएसएस के समाचार पत्र पाञ्चजन्य में भी मोदी की आलोचना की गई. जोशी को उत्तर प्रदेश का प्रभार सौंपे जाने से भी मोदी नाराज थे और इसलिए वह उत्तर प्रदेश में हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के प्रचार के लिए वहां नहीं गए.

कौन हैं जोशी…

संजय जोशी मूलत: महाराष्ट्र के रहने वाले हैं. मैकेनिकल इंजीनियरिंग के पढाई के बाद वे संघ से जुडे. जोशी संघ के प्रचारक बने. 1990 में जोशी महाराष्ट्र से गुजरात आ गए. 1995 में उन्हें गुजरात का प्रभारी बनाया गया. जोशी 13 साल तक गुजरात में रहे. 2001 में मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद दोनों के बीच खटपट हो गई. इसके चलते जोशी को दिल्ली बुला लिया गया. उन्हें पार्टी महासचिव बनाया गया. कथित सेक्स सीडी के कारण उनको भाजपा से अलग होना पडा था.

सुशील ने साधा नरेंद्र मोदी पर निशाना

पटना.  बीजेपी में जारी घमासान थमने का नाम ही नहीं ले रहा है, और अब संजय जोशी प्रकरण को लेकर बिहार के उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी ने भी अपने तेवर साफ करते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाया है.

सुशील मोदी ने एक समाचारपत्र को दिए साक्षात्कार में स्पष्ट कहा है कि किसी भी नेता को अपना फैसला पार्टी पर नहीं थोपना चाहिए. सुशील ने संजय जोशी प्रकरण को लेकर कहा कि जिस तरह संजय जोशी को हटाया गया, वह ठीक नहीं था, क्योंकि किसी को भी पार्टी को हाईजैक नहीं करना चाहिए और न ही पार्टी पर अपना फैसला थोपना चाहिए. इतना ही नहीं, सुशील ने वरिष्ठ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी की उस राय से भी नाइत्तफाकी ज़ाहिर की, जिसमें पूर्व उप-प्रधानमंत्री ने कहा था कि जनता बीजेपी से निराश हैं. उन्होंने कहा कि संघ परिवार में इसे लेकर नाराजग़ी है, लेकिन मैं नहीं मानता कि लोग बीजेपी से निराश हैं. उन्होंने कहा कि भाजपाध्यक्ष नितिन गडकरी के कुछ फैसलों पर सवाल उठाए गए थे, क्योंकि उन्हें इस तरह के काम का अनुभव नहीं था, लेकिन बाद में उन्होंने काम अच्छे ढंग से संभाल लिया, लेकिन उन्हें किसी एक व्यक्ति के दबाव के आगे नहीं झुकना चाहिए.

बिहार के उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार एनडीए का ही होगा, इसलिए हमें अपने सभी सहयोगियों की भावनाओं का ध्यान रखना होगा. प्रधानमंत्री की उम्मीदवारी को लेकर सुशील का बयान काफी महत्वपू्र्ण है, क्योंकि बिहार के मुख्यमंत्री और एनडीए के प्रमुख घटक जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार भी कह चुके हैं कि अगर बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया, तो वह एनडीए छोड़ देंगे.

विरोधियों ने दिया जोशी को गुजरात का न्योता

अहमदाबाद . संजय जोशी के पार्टी छोडऩे की खबर को लेकर उनका समर्थक खेमा नाखुश है. वहीं, राजकोट में प्रदेश कार्यकारिणी में जुटा मोदी खेमा इस पर चुप्पी साधे है. भाजपा से इस्तीफे की खबर के साथ ही जोशी समर्थक तथा महागुजरात जनता पार्टी के अध्यक्ष गोरधन झड़फिया ने उन्हें गुजरात आने का निमंत्रण दिया है.

माना जा रहा है कि यह न्योता केशूभाई पटेल की मर्जी से ही दिया गया है. सूत्रों का कहना है कि भाजपा छोडऩे के बावजूद जोशी आरएसएस का हिस्सा बने रहेंगे. इस बात की भी प्रबल आशंका है कि वह गुजरात आकर मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं. इसके अलावा अपने समर्थकों को मोदी के खिलाफ काम पर लगा सकते हैं.

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