भोपाल 20 नवंबर नभासं. जूनियर डॉक्टरों का एक प्रतिनिधि मंडल रविवार शाम को स्वास्थ्य मंत्री महेंद्र हार्डिया से मिला. इसके उपरांत जूनियर डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल वापस लेने का ऐलान भी कर दिया. इसके अलावा राजधानी के 80 जूनियर डॉक्टरों एवं ग्वालियर के 60 डॉक्टरों को जेल से रिहा करने की सहमति भी दी गई है.

स्टायफड बढ़ाने पर सहानुभूति पूर्वक होगी कार्रवाई – मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के साथ आज मुख्यमंत्री निवास पर जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के सदस्यों ने भेंट की. मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया. बैठक में तय किया गया कि जूनियर डॉक्टरों के स्टायफड बढ़ाने के लिये सहानुभूतिपूर्वक कार्रवाई की जाएगी. गिरफ्तार डॉक्टरों को रिहा किया जाएगा. उन पर कार्रवाई नहीं होगी. गिरफ्तारी अवधि के लिए स्टायफ ड से कटौती नहीं की जायेगी. जूडा द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में अनिवार्य सेवा बांड मुद्दे पर सहमति व्यक्त की है. इस अवसर पर जुडा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अशोक ठाकुर, डॉ. नवनीत अग्रवाल, डॉ. शैलेन्द्र भदौरिया, डॉ. के.पी.एस. तोमर डॉ. विवेक कनकने, डॉ. पवन अधिकारी, डॉ. अवधेश तोमर, डॉ. गौरव गुप्ता, डॉ. अंकुर गुप्ता रीवा, डॉ. सिद्धार्थ चंदेल, डॉ मनीष तिवारी, डॉ. रामवीर राजपूत, डॉ. मनोज गुप्ता, डॉ. सुनील भास्करन, डॉ. दीपक उइके. भाजपा भोपाल के अध्यक्ष आलोक शर्मा एवं डॉ. अजय शंकर मेहता उपस्थित थे.

रैली निकाली
जूनियर डॉक्टरों द्वारा अपनी मांगों को लेकर हड़ताल रविवार को भी जारी रही. इस दौरान जूनियर डॉक्टरों ने रैली निकाली. इधर प्रदेश के जूडा पदाधिकारी राजधानी आ पहुंचे. इनके बीच एक बैठक सुबह 11 बजे होना तय थी लेकिन गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता की मां के निधन के बाद शाम को बैठक करने के संबंध में विचार किया गया. साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज ङ्क्षसह चौहान से भेंटकर उन्हें ज्ञापन सौंपने का निर्णय भी लिया.  जूनियर डॉक्टर की शहर इकाई उपाध्यक्ष सिद्घार्थ ङ्क्षसह चंदेल के अनुसार मुख्यमंत्री को अस्पतालों में सुरक्षा और गांवों में बांड अवधि एक साल करने पर सहमत हैं लेकिन सरकार 2011 से मांगों को लागू करना चाहती है जबकि जूडा 2010 से लागू कराने के पक्षधर हैं.  इस हड़ताल के चलते मरीजों को एक तो इलाज के लिये परेशन होना पड़ रहा है. वहीं डॉक्टरों की कमी होने से रात्रि में कोई परेशानी आती है तो उनकी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है. इधर राजधानी सहित ग्वालियर व इंदौर और रीवा के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज के लिये परेशान हेना पड़ रहा है. इलाज के अभाव में ग्वालियर में 15, भोपाल में 20 मरीजों की मौत हो गई है.

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