मंत्री के तालिबानी फरमान पर बिफरे डाक्टर

पटना, 29 जनवरी. बिहार में सुशासन का दावा करने वाली नीतीश कुमार सरकार के मंत्री ही अब तालिबानी फरमान जारी करने से नहीं हिचक रहे. मंत्री जी ने खुलेआम चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जूनियर डाक्टर हड़ताल पर गए तो उनके हाथ काट देंगे. आईएमए की बिहार शाखा और जूनियर डाक्टर्स एसोसिएशन ने स्वास्थ्य मंत्री के इस बयान की कड़ी आलोचना की है. जन स्वास्थ्य चेतना यात्रा की शुरुआत करते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अश्र्विनी कुमार चौबे ने हड़ताल पर जाने वाले जूनियर डाक्टरों के हाथ काट देने की खुलेआम धमकी दे डाली. उनके इस तुगलकी फरमान ने उनके विपक्षियों को बैठे बिठाए एक और गंभीर मुद्दा दे दिया है.

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अस्पताल का काम छोड़कर प्राइवेट पै्रक्टिस करने वाले डाक्टरों को प्रदेश सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी. जूनियर डाक्टरों की हड़ताल की धमकी पर उन्होंने कहा कि ऐसी धमकी देने वालों के हाथ काट दिए जाते हैं. गौरतलब है कि वेतन वृद्धि के मुद्दे पर प्रदेश में डाक्टरों ने 31 जनवरी को हड़ताल पर जाने की चेतावनी दे चुके हैं. उन्होंने कहा कि जनता के कल्याण की व्यवस्था पर अगर चोट करने का प्रयास किया तो हम हाथ भी काटना जानते हैं. चौबे स्वास्थ्य जनचेतना की तीन माह की यात्रा पर निकले हैं. गांधी मैदान में आयोजित समारोह में विधान परिषद सभापति ताराकांत झा ने उन्हें झंडी दिखाकर भोजपुर के लिए रवाना किया. अपनी इस यात्रा के दौरान वह अस्पतालों का औचक निरीक्षण करेंगे. निजी प्रैक्टिस और जूनियर डाक्टरों की हड़ताल पर जाने की चेतावनी के खिलाफ बिहार के स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे के बयान पर जूनियर डाक्टर एसोसिएशन जेडीए ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन [आईएमए] की बिहार शाखा ने भी स्वास्थ्य मंत्री की अलोचना की है. चौबे ने कहा था कि निजी प्रैक्टिस करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. वहीं जूनियर डाक्टरों के हड़ताल पर जाने की धमकियों पर उन्होंने कहा था कि सरकार उन्हें सुविधा देना जानती है तो उनके हाथ काटना भी जानती है. यदि उन्होंने चिकित्सा सेवा बाधित की तो उन्हें चिकित्सक बने नहीं रहने दिया जाएगा.

चौबे के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जेडीए के डाक्टर धीरज कुमार ने कहा कि उनका तालिबानी बयान मानवता से परे है. ऐसे बयान देने वालों को मंत्रिमंडल में इतने बड़े विभाग का जिम्मा कैसे सौंपा गया है? पढ़े-लिखे व्यक्ति को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए. उन्होंने यह सवाल भी किया कि हड़ताल की घोषणा के बाद ही सरकार को जूनियर डाक्टरों की याद क्यों आती है? उधर, आईएमए की बिहार शाखा ने भी मंत्री के बयान को गैर-जिम्मेदराना बताते हुए चेतावनी दी है कि ऐसे बयान से हालात और बिगड़ेंगे. जेडीए ने वेतन वृद्घि की मांग को लेकर 30 जनवरी की रात से हड़ताल पर जानें का ऐलान किया है. चौबे ने जन स्वास्थ्य चेतना यात्रा के दौरान शनिवार को उक्त बयान दिया था.

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