बॉलीवुड सुपर स्टार राजेश खन्ना का मुंबई में निधन

मुंबई, 18 जुलाई. अपने समय के सुपरस्टार राजेश खन्ना का आज मुंबई में निधन हो गया. उन्होंने अपने घर पर अंतिम सांस ली. उनके पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी. खन्ना लंबे समय से बीमार चल रहे थे. कल सुबह 11 बजे अंतिम संस्कार किया जाएगा.

राजेश खन्ना बीते 1 अप्रैल से बीमार थे. कमजोरी की शिकायत के चलते उन्हें लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था. हालांकि उन्हें चार दिनों में ही डॉक्टरों ने अस्पताल से छुट्टी दे दी थी. राजेश से अलग रह रही उनकी पत्नी डिम्पल कपाडिय़ा बीमारी के बाद से ही उनकी देखभाल कर रही थी. उनकी बेटियां ट्विंकल, रिंकी, दामाद अक्षय कुमार और समीर शरण भी उनके साथ ही थे. 69 साल के अभिनेता को 23 जून को लीलावती अस्पताल में दोबारा भर्ती कराया गया था. तब उन्हें दो हफ्ते बाद अस्पताल से छुट्टी मिली थी. कमजोरी की शिकायत के कारण उन्हें शनिवार को लीलावती अस्पताल में तीसरी बार भर्ती कराया गया. लेकिन मंगलवार का डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी थी. 29 दिसंबर 1942 को अमृतसर में जन्मे राजेश खन्ना का असली नाम जतिन खन्ना है.

1966 में उन्होंने पहली बार 24 साल की उम्र में आखिरी खत नामक फिल्म में काम किया था.
इसके बाद राज, बहारों के सपने, औरत के रूप जैसी कई फिल्में उन्होंने की. लेकिन उन्हें असली कामयाबी 1969 में आराधना से मिली. एक के बाद एक 14 सुपरहिट फिल्में देकर उन्होंने हिंदी फिल्मों के पहले सुपरस्टार का तमगा अपने नाम किया. 1971 में राजेश खन्ना ने कटी पतंग, आनंद, आन मिलो सजना, महबूब की मेंहदी, हाथी मेरे साथी, अंदाज नामक फिल्मों से अपनी कामयाबी का परचम लहराये रखा. बाद के दिनों में दो रास्ते, दुश्मन, बावर्ची, मेरे जीवन साथी, जोरू का गुलाम, अनुराग, दाग, नमक हराम, हमशक्ल जैसी फिल्में भी कामयाब रहीं.

राजेश खन्ना ने डिंपल से 1973 में शादी की थी और 1984 में वो अलग हो गए थे. राजेश खन्ना ने 90 के दशक में राजनीति में प्रवेश किया. 1991 में वे नई दिल्ली से कांग्रेस की टिकट पर संसद सदस्य चुने गये. 1994 में उन्होंने एक बार फिर खुदाई फिल्म से परदे पर पर अपनी दूसरी पारी शुरू की. आ अब लौट चलें, क्या दिल ने कहा, जाना, वफा जैसी फिल्मों में उन्होंने अभिनय किया लेकिन इन फिल्मों को कोई खास सफलता नहीं मिली.

खून से लेटर लिखा करती थीं लड़कियां
किसी जमाने में करोडों जवां दिलों की धड़कन रहे हिन्दी फिल्मों के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना ने अभिनय के अलावा फिल्म निर्माता और नेता के रूप में भी लोकप्रियता हासिल कीं. वह बॉलीवुड के पहले ऐसे अभिनेता थे जिन्हें देखने के लिए लोगों की कतारें लग जाती थीं और युवतियां अपने खून से उन्हें पत्र लिखा करती थीं. राजेश खन्ना ने कुल 163 फिल्मों में काम किया जिनमें 106 फिल्मों में वह नायक रहे और 22 फिल्मों में उन्होंने सहनायक की भूमिका अदा की. इसके अलावा उन्होंने 17 लघु फिल्मों में भी काम किया.

आनंद मरा नहीं आनंद मरते नहीं
बाबू मोशाय, हम सब तो रंगमंच की कठपुतलियां हैं जिसकी डोर ऊपर वाले के हाथ में है, कौन कब कहां उठेगा, कोई नहीं जानता. जिंदादिली की नई परिभाषा गढऩे वाला हिन्दी सिनेमा का आनंद अब नहीं रहा लेकिन आनंद मरा नहीं, आनंद मरते नहीं. राजेश खन्ना का जब भी जिक्र होगा, आनंद के बिना अधूरा रहेगा. ऋषिकेश मुखर्जी की इस क्लासिक फिल्म में कैंसर (लिम्फोसकोर्मा ऑफ इंटेस्टाइन) पीडि़त किरदार को जिस ढंग से उन्होंने जिया, वह भावी पीढ़ी के कलाकारों के लिए एक नजीर बन गया.

शोक की लहर
काका के निधन की खबर फैलते ही सैंकड़ों की संख्या में उनके प्रशंसक उनके बांद्रा में कार्टर रोड स्थित उनके घर ”आशीर्वाद” के बाहर एकत्र हो गए. पीएमओ : राजेश खन्ना के निधन पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दुख व्यक्त किया. नरेंद्र मोदी : राजेश खन्ना जी लोगों के दिलों पर राज करते थे, वे महान व्यक्ति थे. उनके आत्मा को शांति मिले!

स्मृति ईरानी : आरआईपी राजेश खन्ना…गुड बाय!

कैलाश खेर : हमारे पिता की पीढ़ी के सुपर स्टार इस दुनिया से चले गए. वे इस दुनिया के बाहर भी सुपरस्टार पुकारे जाएंगे. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे!

सुभाष घई : राजेश खन्ना के निधन से मुझे गहरा आधात लगा है, वे इस उम्र में मानसिक रूप से बहुत मजबूत थे.

आशा पारेख : अभिनेता के रुप में वे सबसे महान थे. अब वे हमारे बीच नहीं हैं. हम लोगों के लिए दुख की घड़ी है.

आशा भोसले : उनके करोड़ों फैंस थे. वे जमीन से जुड़े इंसान थे. मुझे आज भी याद है, लड़कियां ही नहीं शादी शुदा महिलाएं भी काका को खून से खत लिखती थीं.

मौसमी चटर्जी : राजेश खन्ना ने अपने ही फेमस डायलॉग जिंदगी बड़ी होनी चाहिए…लंबी नहीं को चरितार्थ किया. मुझे यह विश्वास करने में कुछ समय लगेगा कि काका अब जिंदा नहीं है.

हेमा मालिनी : मुझे राजेश खन्ना से साथ काम करने की कुछ यादें आज भी ताजी हैं. आज हर किसी के लिए दुख का दिन है. अंदाज, प्रेमनगर इन दो फिल्मों में काका से साथ काम किया. काका निधन हिंदी फिल्म उद्योग के लिए बहुत बड़ी क्षति है.

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