संस्कृति और कलाकारों का संरक्षण शासन का कर्तव्य: शर्मा

भोपाल, 6 नवंबर. राज्यपाल रामनरेश यादव ने कहा है कि उज्जैन और कालिदास एक-दूसरे की पहचान हैं, कालिदास के बिना उज्जैन की कल्पना संभव नहीं है. पूरे विश्व में कालिदास ने संस्कृत भाषा को अतुलनीय पहचान दी है.

राज्यपाल आज उज्जैन में आयोजित अखिल भारतीय कालिदास समारोह का उद्घाटन करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे. कार्यक्रम में संस्कृति एवं जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा भी उपस्थित थे. राज्यपाल यादव ने कहा कि संस्कृत के महाकवि कालिदास की कर्मस्थली, विक्रमादित्य की नगरी और कृष्ण की शिक्षा स्थली होने का गौरव उज्जैन को भूतभावन महाकाल के आशीर्वाद से ही संभव हुआ है. महाकाल के आशीर्वाद से कालिदास महाकवि बने. उनके ग्रंथों में तत्कालीन समाज, संस्कृति, परम्पराएं परिलक्षित होती हैं. रघुवंश का चित्रात्मक वर्णन, अभिज्ञान शाकुन्तलम्, मेघदूत आदि कृतियों में महाकवि कालिदास की सोच, उनकी उच्च क्षमता परिलक्षित होती है. महाकवि कालिदास की कृतियाँ हमारी अमूल्य धरोहर हैं. महाकवि की कृतियों में भारत की समृद्ध परम्परा, संस्कृति संग्रहित हैं, यह हमारी वैभवशाली परम्परा को गौरवान्वित करती है, जिससे हम गर्व महसूस करते हैं.

प्रारम्भ में राज्यपाल ने महाकवि कालिदास की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर राष्ट्रीय कालिदास चित्रकला एवं मूर्तिकला एवं अश्विनी शोध एवं अनुसंधान महिदपुर द्वारा अतिप्राचीन दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी का भी शुभारम्भ किया. देवास कला वीथिका दल द्वारा रघुवंश पर आधारित रंगोली भी बनाई गई, जिसका राज्यपाल द्वारा अवलोकन किया गया. राज्यपाल ने देवास से आये रंगोली कलाकार राजेश परमार द्वारा बनाई गई रघुवंशम् पर आधारित रंगोली को 10 हजार रूपये का पुरस्कार अपनी ओर से प्रदान करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि कलाकारों को संरक्षण के साथ-साथ प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता है, तभी हम समृद्धशाली सांस्कृतिक धरोहर को संभाल सकते हैं.समारोह में जनसम्पर्क एवं संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकान्त शर्मा ने कहा कि महाकवि कालिदास ने संस्कृत को अद्भुत पहचान दी है.

कालिदास के बारे में कुछ भी कहना अतिशयोक्ति होगी. कालिदास समारोह हर वर्ष गरिमा के साथ आयोजित किया जाता है. इस वर्ष इसी गरिमा के साथ इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. राज्य शासन की ओर से सभी कलाकारों को प्रोत्साहित करने का काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की सम्पन्न संस्कृति को आगे बढ़ाना हमारा दायित्व है. प्रत्येक कलाकार को प्रोत्साहित करना, संरक्षित करना राज्य शासन का कर्त्तव्य है और होना भी चाहिये, क्योंकि वे हमारी समृद्ध परम्पराओं को संजोए हुए हैं, वे हमारी और हमारे समाज की धरोहर हैं. भविष्य में हमारी समृद्धता को संजोए रखने का काम इन्हीं कलाकारों के हाथ में है.

शर्मा ने कहा कि कालिदास रंगकर्म का सम्मान इस वर्ष भी अनुपम खेर को दिया गया है, यह सम्मान श्री अनुपम खेर के आने पर उज्जैन में कार्यक्रम आयोजित कर प्रदान किया जायेगा, जिसमें उनके द्वारा रचित नाटक की भी प्रस्तुति होगी.

मुक्ताकाशी मंच- शर्मा के उद्बोधन के समय खाद्य और आपूर्ति राज्य मंत्री पारस जैन ने उन्हें अवगत कराया कि मुक्ताकाशी मंच के साथ ही मैदान में स्थायी डोम बनाया जाये, जिस पर संस्कृति मंत्री ने इसकी पूरी कार्य योजना एवं डिजाईन बनाकर जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिये. राजा भोज के सम्बन्ध में संस्कृति मंत्री ने कहा कि राजा भोज का सर्वाधिक सम्बन्ध उज्जैन से रहा है. भोपाल में आयोजित भोज महोत्सव के समान ही उज्जैन और धार में भी भोज महोत्सव का आयोजन किया जायेगा.

इस अवसर पर श्री पारस जैन ने बताया कि कालिदास समारोह में कलश यात्रा का भव्य आयोजन किया गया, जिसका उज्जैनवासियों ने भावभीना स्वागत किया. उन्होंने कहा कि कालिदास की कर्मस्थली में कालिदास के सम्मान में समारोह का आयोजन हम सबके लिये गौरव की बात है. कार्यक्रम को सारस्वत अतिथि, विद्वान डॉ. रामकरण शर्मा ने भी सम्बोधित किया और महाकवि कालिदास पर संस्कृत में अपना उदबोधन दिया. कार्यक्रम में शशिरंजन अकेला द्वारा सम्पादित राजा भोज पर आधारित स्मारिका का भी विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया.

कार्यक्रम में महापौर रामेश्वर अखंड, विधायक शिवनारायण जागीरदार, कुलपति थापक, संस्कृति परिषद के संचालक श्रीराम तिवारी, कालिदास अकादमी के संचालक पी.एन.शास्त्री, पाणिनी संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति मिथिला प्रसाद त्रिपाठी आदि उपस्थित थे. इसके पूर्व उज्जैन के हेलीपेड पहुँचने पर राज्यपाल का भावभीना स्वागत किया गया. राज्यपाल ने लक्ष्मीकांत शर्मा के साथ  भगवान महाकालेश्वर के दर्शन कर पूजा-अर्चना भी की.

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