नई दिल्ली,18 नंवबर. पूर्व भारतीय कप्तान मुहम्मद अजहरूद्दीन ने शुक्रवार को विनोद कांबली पर निशाना साधा जिन्होंने संकेत दिए थे कि भारत का क्रिकेट विश्व कप (1996) सेमीफाइनल मैच फिक्स हो सकता है. अजहर ने कहा कि यह आरोप ऐसे व्यक्ति ने लगाए हैं जिसका अपना कोई चरित्र नहीं है और ये बिलकुल बकवास हैं.

अजहर ने कहा, वह (कांबली) जो कुछ भी कह रहा है वह बिलकुल बकवास है. उसे नहीं पता कि वह क्या कह रहा है. कोई ऐसा व्यक्ति जिसका कोई चरित्र नहीं है, वह टीवी पर आता है और देश के सामने बिलकुल बकवास बातें करता है और टीम में खेलने वाले सभी खिलाडिय़ों पर अंगुली उठाता है.
यह पूरी तरह से अशिष्ट हैं और काफी दुखद है. विश्व कप में 1996 में भारतीय टीम के कप्तान अजहर ने कहा कि पहले क्षेत्ररक्षण करना सामूहिक फैसला था. उन्होंने कहा, शायद जब वह बैठक में बैठा था तो सो रहा था.

मैदान के अंदर और बाहर कई बार विवादों में घिरे पूर्व भारतीय क्रिकेटर कांबली ने कल यह कहकर भारत और श्रीलंका के बीच हुए सेमीफाइनल मैच पर संदेह खड़ा कर दिया था कि वह उन्हें मैच में कुछ गलत लगा था. कांबली ने कहा था, मैं 1996 के मैच को कभी नहीं भूल सकता क्योंकि इसके बाद मेरा करियर खत्म हो गया था और मुझे टीम से बाहर कर दिया गया. मैं पहले क्षेत्ररक्षण के भारत के फैसले से स्तब्ध था.

कांबली को कई मौके मिले
अजहर ने हालांकि अपने ऊपर लगाए सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि टास जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण करने का फैसला टीम का था. उन्होंने कहा, यह टीम का फैसला था जो टीम के सभी सदस्यों ने लिया था कि जब हम टास जीतेंगे तो पहले क्षेत्ररक्षण करेंगे. वह जो कुछ भी बोल रहा है वह पूरी तरह बकवास और बेवकूफाना है.

अजहर ने कांबली के इन दावों से भी इनकार किया कि उन्हें बलि का बकरा बनाया गया. उन्होंने कहा कि कांबली को खुद को साबित करने के काफी मौके मिले लेकिन वह उनका फायदा उठाने में नाकाम रहा. उन्होंने कहा, उसे बलि का बकरा नहीं बनाया गया. सभी को पता है कि वह कैसे क्रिकेट खेलता था और क्या करता था. इसलिए वह यह नहीं कह सकता कि उसे बलि का बकरा बनाया गया क्योंकि उसे 1998 में दोबारा चुना गया लेकिन वह एक मैच में चोटिल हो गया जिसके वह किसी अन्य खिलाड़ी की जगह क्षेत्ररक्षण कर रहा था, मुझे नहीं पता कि यह कहा हुआ..कटक में या किसी और अन्य जगह. अजहर ने कहा कि श्रीलंका के खिलाफ ईडेन गार्डस पर विवादास्पद सेमीफाइनल मैच में भारत की हार का एकमात्र कारण यह था कि टीम ने क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं किया. उन्होंने कहा, हम काफी खराब खेल, हम मैच हार गए.

इसका टास जीतने, या पहले बल्लेबाजी करने या पहले क्षेत्ररक्षण करने से कोई लेना देना नहीं है. यह सामान्य सी बात है कि अगर आप अच्छा नहीं खेलोगे तो मैच गंवा दोगे.

अजहर ने मैच की जांच की मांग को भी खारिज करते हुए कहा कि ऐसे तो उन सभी मैचों की जांच करनी होगी जिनमें भारत हारा है. उन्होंने कहा, इतने साल बाद जांच क्यों होनी चाहिए. किस जांच की बात कर रहे हैं. यदि इस मैच की जांच होगी तो हर मैच की जांच करनी पड़ेगी.

दिग्गोंजों ने कहा क्यों चुप रहे
इस बीच भारतीय टीम के तत्कालीन मैनेजर और पूर्व कप्तान अजित वाडेकर ने कांबली के बयान की टाइमिंग पर संदेह जताया. उन्होंने कहा, यदि उसे सब पता था तो उसने 15 साल इंतजार क्यों किया.

वाडेकर ने कहा कि पहले क्षेत्ररक्षण करना सामूहिक फैसला था क्योंकि श्रीलंकाई टीम लक्ष्य का पीछा करने में माहिर थी. उन्होंने कहा, मैच से पहले टीम बैठक में तय हो गया था कि टास जीतने पर भारत क्षेत्ररक्षण करेगा.

पूरी टीम से मशविरे के बाद यह फैसला किया गया. उन्होंने कहा कि उनका और संदीप पाटिल का मानना था कि विकेट टर्न लेगा लेकिन टीम ने फील्डिंग का फैसला कया. पूर्व क्रिकेटर अरूण लाल और अतुल वासन ने भी 15 साल बाद मसला उठाने के लिए कांबली की आलोचना की. वासन ने कहा, कांबली की विश्वसनीयता संदिग्ध है. मुझे समझ में नहीं आ रहा कि इतने साल बाद वह यह मामला क्यों उठा रहा है.

15 साल बाद सेमीफाइनल मैच याद आया

नई दिल्ली.15 साल के बाद भारत के पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली ने श्रीलंका के खिलाफ 1996 में खेले गए सेमीफाइनल पर एक बार फिर से सवाल खड़ा कर दिया है. उन्होंने उस पूरे मैच पर शक जाहिर किया है, जिसको लेकर एक नए विवाद ने जन्म ले लिया है.कोलकाता के ईडन गार्डन पर खेले गए उस मैच में भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था, इसी बात पर विनोद कांबली सबसे अधिक सवाल खड़ा कर रहे हैं. 15 साल पहले खेला गया वह सेमीफाइनल मुकाबला कैसे बदलता गया. टॉस- टीम इंडिया के कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया, इस फैसले से उस समय भी पूरा देश सकते में आ गया था. अजहरुद्दीन के फैसले ने तमाम प्रशंसकों को आश्चर्य में डाल दिया था. श्रीलंका को पहले ओवर में लगे दो झटके- श्रीलंकाई पारी में जैसे ही एक रन बने थे, श्रीनाथ ने जयसूर्या और कालूवितरना को पवेलियन भेजकर टीम इंडिया को शुरुआती सफलता दिला दी. लेकिन इसके बाद अरविंद डिसिल्वा और रोशन महानामा ने पारी संभाली. श्रीलंका ने निर्धारित 50 ओवरों में 8 विकेट के नुकसान पर 251 रन बनाए थे. भारत की भी खराब शुरुआत-टीम इंडिया का पहला विकेट सिर्फ 8 रन पर ही नवजोत सिंह सिद्धू के रूप में गिरा. इससे टीम इंडिया को लगा बड़ा झटका. सचिन और मांजरेकर ने संभाली थी पारी-सिद्धू के आउट होते ही सचिन तेंडुलकर और संजय मांजरेकर ने टीम इंडिया की पारी संभाली और दूसरे विकेट के लिए 90 रन जोड़ डाले। टीम इंडिया की स्थिति मजबूत हो गई थी. सचिन का गिरा विकेट- जब टीम इंडिया ने अपनी पकड़ मजबूत बना ली थी और सचिन 65 रन बनाकर क्रीज पर खेल रहे थे. तभी जयसूर्या की एक गेंद पर सचिन चकमा खा गए और उन्हें विकेटकीपर कालूवितरना ने स्टंप आउट कर दिया.

उस समय टीम का स्कोर 98 रन था. विकेटों की लग गई झड़ी-सचिन के आउट होते ही मानो पूरी टीम को पवेलियन लौटने की जल्दीबाजी थी. टीम इंडिया को तीसरा झटका 99 रन (अजहरुद्दीन) पर लगा.

इसके बाद चौथा विकेट 101 रन (मांजरेकर), पांचवां विकेट 110 रन (श्रीनाथ), छठा विकेट 115 रन (जडेजा), सातवां (नयन मोंगिया) और आठवां विकेट 120 (आशीष कपूर) रन पर गिरा. सचिन के आउट होने के बाद देखते-देखते 22 रन पर 6 खिलाड़ी आउट हो चुके थे. इसके बाद दर्शकों के उत्पात ने खेल ही नहीं होने दिया.मैदान पर हुआ हंगामा-मैच रुकने के बाद जैसे ही श्रीलंका को जीत दी गई, पवेलियन लौटते हुए विनोद कांबली रो पड़े. अब 15 साल बाद विनोद कांबली ने उंगली उठाई है. अब कितना सच है, वो तो कांबली और उस समय टीम के सदस्य ही जानते हैं.

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