विशेष प्रतिनिधि
Deerजबलपुर, 11 जनवरी. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वन्य जीवन के संरक्षण के लिए प्रसिद्घ राष्ट्रीय उद्यान कान्हा के मुक्की घोरेला रेंज में अज्ञात कारणों से 32 चीतल(हिरण)की मौत हो गई है.

राष्ट्रीय उद्यान के अनुसंधान अधिकारी डॉ. राकेश शुक्ला ने किसी खरपतवार के सेवन से लीवर में संक्रमण की वजह को मौत का प्राथमिक कारण मना है. इन मौतों के बाद बाघों के लिए खतरा पैदा हो गया है। पार्क प्रबंधन ने सुरक्षा बढ़ा दी है.  इसी क्षेत्र से तीन बाघ के शावकों को सुरक्षित रैंज में भेजा जा सकता  है। कान्हा टायगर रिजर्व के मुक्की परिक्षेत्र स्थित घोरेला फेसिंग में चीतलों की मौत हुई है. पार्क प्रबंधन के मुताबिक 4 जनवरी से 10 जनवरी तक लगभग 25-30 चीतलों की मौत हुई है, चीतलों के शव का परीक्षण कराया गया है.

शव परीक्षण कान्हा टायगर रिजर्व के वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. संदीप अग्रवाल द्वारा किया गया.प्रथम दृश्तया मृत्यु का कारण अत्यधिक ठंड, न्यूमोनिया, लीवर की खराबी तथा बाड़े के अंदर चरने योग्य घास की प्रजातियों की कमी बताई गई है. पशु चिकित्सालय विश्वविद्यालय के चिकित्सकों ने भी चीतलों के शव का परीक्षण किया.बताया गया कि चीतलों की मृत्यु के  वास्तविक कारण मृत चीतलों के शरीर से लिये गये नमूनों की हिस्टोपैथोलाजिकल परीक्षण के उपरांत ही निश्चित हो सकेगा. चीतलों के महत्वपूर्ण अंगों के नमूने एकत्र किये गये है जो पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय जबलपुर से आई टीम परीक्षण हेतु साथ ले गई है.

3 बाघ शावकों की जान खतरे में
घोरेला फेसिंग में 3 बाघ शावकों का प्राकृतिक आवास में पालन-पोषण किया जा रहा है. इन बाघ शावकों के भोजन के लिये 35 हेक्ट क्षेत्र में बड़ी फेसिंग कर लगभग 250 चीतल रखे गये थे. 11 हेक्टेयर में एक अन्य फेसिंग में बाघ शावकों को रखा गया है.अब तक इस प्रकार कुल 62 चीतल बाघ शावकों के बाड़े में छोड़े जा चुके है. डायरेक्टर जेएस चौहान ने बताया कि वर्तमान में चीतलों को बाघ शावकों के बाड़े में छोडऩा बंद कर दिया गया है.

चीतलों को प्रतिदिन हरा चारा उपलब्ध कराया जा रहा है.ठंड से बचाने के लिये आवश्यक उपाय किये जा रहे है ताकि चीतलों की हो रही लगातार मृत्यु को रोका जा सके.

Related Posts: