साड़ी ऐसा भारतीय परिधान है, जो ट्रेडिशनल होने के बाद भी बहुत ट्रेंडी, फैशनेबल और ग्लैमरस लगता है। लेकिन साड़ी देखने में जितनी खूबसूरत लगती है, उसकी देखभाल भी उतनी ही मुश्किल होती है। कैसे करें अपनी साडिय़ों की देखरेख ताकि ये हमेशा नई जैसी बनी रहें, बता रही हैं पायल गिरी

 

 

1. पहली बार साड़ी को धो रही हैं तो इसे कुछ देर नमकवाले पानी में भिगोकर छोड़ दें, इसके बाद ठंडे पानी से धो लें।

2. शुरुआत में ही इन पर साबुन का इस्तेमाल न करें।

3. दो से तीन बार सादा पानी से धोने के बाद बहुत ही माइल्ड डिटरजेंट का इस्तेमाल करें और झट से धो दें।

4. सिल्क की साड़ी पर ब्रश न लगाएं, इससे साड़ी फट भी सकती है।
5. साड़ी का पल्लू और उसका बॉर्डर पहले अलग से धो लें।

6. साड़ी धोने के बाद लंबे समय तक उसे गठरी की तरह बनाकर या मोड़कर भीगा न रखें।

7. अगर दाग लग जाये तो जल्दी से उसे ठंडे पानी में धो दें।

8. दाग गहरा है तो उतनी जगह को पेट्रोल में डुबोकर रखें और फिर हल्के हाथों से ब्रश लगाएं।

9. साड़ी धोने के बाद उसे दूसरे कपड़ों, जैसे कि पेटीकोट या ब्लाउज के साथ गीला न रखें।

10. आयरन करते समय आयरन को मध्यम गर्म रखें।

11. साडिय़ों को किसी ठंडी जगह पर रखें। साड़ी रखने से पहले जगह को नीम की पत्तियों से साफ कर लें।

12. हर माह साडिय़ों की तह (फोल्ड) बदलें।

13. धुली और गंदी साडिय़ों को एक साथ न रखें। एक बार पहनी गई साड़ी गलती से भी वॉर्डरोब में न रखें। उनके लिए अलग जगह बनाएं।

14. सिल्क साडिय़ों को खुद धोने की बजाय उन्हें ड्राइक्लीन कराएं।

15. भारी साडिय़ां, जैसे कि जरी की कढ़ाईवाली या जिनके बॉर्डर भारी हों या जिन पर जरी का काम हो, उन्हें तह लगाकर मलमल के कपड़े में लपेटकर रखें। उन्हें हैंगर में न टांगें।

16. कॉटन साडिय़ों में कलफ लगाते समय इस बात का ध्यान रखें कि कलफ का धब्बा साड़ी पर न पड़े और कलफ एक जैसा लगे। कलफ का धब्बा साड़ी की खूबसूरती को बिगाड़ता है और साड़ी पहनने के बाद देखने में भी अच्छा नहीं लगता।

17. साडिय़ों को गलती से भी वॉशिंग मशीन में न धोएं।

18. बनारसी या सिल्क साड़ी की जगह पर नेप्थलीन की गोली जरूर रखें। लेकिन इस बात का भी ध्यान रहे कि नेप्थलीन की गोलियां साडिय़ों के संपर्क में न आएं। ये सिल्क की साड़ी को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

19. सिल्क, बनारसी या जरी वाली साडिय़ों के ऊपर ज्यादा भार न डालें।

20. साड़ी के पल्लू पर भारी कढ़ाई की गई हो तो उसके नीचे नेट लगवा लें ताकि उसके धागे न निकलें व एम्ब्रॉयडरी सुरक्षित रहे।

21. महंगी शिफॉन और जॉर्जेट की साडिय़ों को ठंडे पानी में न धोएं। वे सिकुड़ जाती हैं, इसलिए ड्राइक्लीन कराएं।

22. बाटिक, बांधनी जैसी साडिय़ों को देर तक भिगोकर न रखें। इससे रंग जाने का डर बना रहता है।

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