2-जी स्पेक्ट्रम मामले में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सभी आवंटित 122 लाइसेंस निरस्त

ट्राई को  आबंटन के लिए ताजा सिफारिशें देने के दिशानिर्देश दिए, कोर्ट ने कहा चार महीने के भीतर नीलामी के आधार पर किए जाएं

नई दिल्ली, 2 फरवरी. सुप्रीम कोर्ट ने ए राजा के कार्यकाल में आवंटित सभी 122 लाइसेंसों को रद्द कर दिया है. लाइसेंस पाने वालों में टाटा, स्वान सहित कई कंपनियां शामिल थी. सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में गृह मंत्री पी चिदंबरम की कथित भूमिका की जांच की मांग पर फैसला सुनवाई अदालत पर छोड़ दिया लेकिन इस मुद्दे पर सीबीआई को कोई आदेश देने से इंकार कर दिया.

कोर्ट ने कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम के 122 लाइसेंस मनमाने और असंवैधानिक तरीके से आवंटित किए गए. कोर्ट ने ट्राई को 2जी लाइसेंस आबंटन के लिए ताजा सिफारिशें देने के दिशानिर्देश भी दिए हैं. कोर्ट ने कहा कि स्पेक्ट्रम आबंटन चार महीने के भीतर नीलामी के आधार पर किए जाएं. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला. फैसले के बाद कई टेलीकाम कंपनियों के शेयरों काफी गिर गए. सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व लाइसेंस हासिल करने के बाद अपने शेयर बेचने वाली तीन कंपनियों में से प्रत्येक पर पांच-पांच करोड़ का जुर्माना लगाते हुए कोर्ट ने ट्राइ से कहा है कि वह 2जी लाइसेंस आवंटन के लिए ताजा सिफारिशें दे. न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और ए के गांगुली की पीठ ने सरकार से ट्राई की सिफारिशों पर एक माह के अंदर अमल करने को कहा. पीठ ने यह भी कहा कि स्पेक्ट्रम आवंटन चार महीने के भीतर नीलामी के आधार पर किए जाएं. पीठ ने यह फैसला गैर सरकारी संगठन सीपीआईएल और जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की याचिकाओं पर दिया. इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2008 में संप्रग सरकार के पहले कार्यकाल में राजा द्वारा स्पेक्ट्रम लाइसेंस आवंटन संबंधी घोटाला किया गया और कैग ने इससे 1.76 लाख करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान जताया है.

राजा द्वारा 9,000 करोड़ रुपये से अधिक के दाम में 122 लाइसेंस दिए गए जबकि 3 जी के केवल कुछ ही लाइसेंसों की नीलामी से सरकार को 69,000 करोड़ रुपये मिले थे. लाइसेंस रद्द होने से जो कंपनियां प्रभावित होंगी उनमें यूनिनार  लूप टेलीकाम, सिस्टेमा श्याम  एतीसलात डीबी  एस टेल, वीडियोकान, टाटा और आइडिया शामिल हैं. राजा ने जनवरी 2008 में च्पहले आओ पहले पाओज् के आधार पर जो 122 लाइसेंस जारी किए थे उनमें से यूनिनार को 22 पैन इंडिया लाइसेंस, लूप को 21, सिस्टेमा-श्याम को 21, एतीसलात-डीबी को 15, एस टेल को छह, वीडियोकान को 21, आइडिया को नौ और टाटा को तीन लाइसेंस आवंटित किए गए थे.

सरकार ने राजग व राजा पर मढ़ा दोष

फैसला सरकार पर आक्षेप नहीं : सिब्बल
नई दिल्ली. दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने शीर्ष अदालत के फैसले के बाद कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला न तो प्रधानमंत्री और न ही तत्कालीन वित्त मंत्री [पी चिदंबरम] के खिलाफ किसी तरह का आक्षेप है. यदि किसी तरह का आक्षेप बनता भी है, तो वह 2003 की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन [राजग] की च्पहले आओ पहले पाओज् की नीति पर है. हम सिर्फ उसी पर आगे बढ़े. 

उन्होंने कहा कि सरकार इस फैसले का पालन करेगी और स्पेक्ट्रम की नीलामी की जाएगी. सिब्बल ने कहा कि उनके मंत्री बनने के बाद मंत्रालय ने 2011 में स्पेक्ट्रम को लाइसेंस से अलग कर दिया. सिब्बल ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन [संप्रग] ने सिर्फ राजग सरकार की पहले आओ पहले पाओ की नीति का पालन किया. शीर्ष अदालत ने इस नीति को भेदभावपूर्ण करार दिया है. ऐसे में भाजपा को सरकार को भारी राजस्व का नुकसान पहुंचाने के लिए राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए. इस फैसले का नॉर्वे की टेलीनॉर या रूस की सिस्तेमा पर पडऩे वाले प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर सिब्बल ने कहा कि कोई भी कंपनी राहत के लिए अदालत जा सकती है. इन दोनों कंपनियों ने देश में सेवाएं शुरू करने पर भारी निवेश किया है. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जारी असमंजस दूर हो गया और स्थिति साफ हो गई है. इससे इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी. सिब्बल ने जहां राजग की 2003 की नीति को दोषी बताया, वहीं इसे लागू करने में हुई अनियमितताओं को ठीकरा तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा पर फोड़ा. दूरसंचार मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्रालय के अच्छी सलाह को नजरअंदाज किया. सिब्बल ने कहा कि इस नीति को लागू करने में समस्या थी. च्यही वजह है कि आज राजा वहां हैं.ज् एक सवाल के जवाब में हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह संप्रग की सहयोगी द्रमुक पर दोष नहीं मढ़ रहे हैं. च्द्रमुक हमारी मूल्यवान सहयोगी है और आगे भी बनी रहेगी.

यह पूछे जाने पर कि क्या चिदंबरम घोटाले को न रोकने के दोषी नहीं हैं, उन्होंने कहा कि उन्हें कैसे दोषी ठहराया जा सकता है, जब उनके पास यह जानने का समय ही नहीं था कि कुछ गलत हो रहा है. यह पूछे जाने पर कि क्या इस फैसले से पहले आओ पहले पाओ की नीति प्रभावित होगी, मंत्री ने कहा कि ऐसा हो सकता है. यह नीति खनन जैसे क्षेत्रों में भी लागू है. हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार अन्य क्षेत्रों में नीति में बदलाव का प्रयास नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि यह एक नई शुरुआत है और इससे देश में अधिक निवेश को आकर्षित किया जा सकेगा. अनिश्चितताओं की वजह से पिछले एक साल में इस क्षेत्र में निवेश प्रभावित हुआ है. सरकार को हुए नुकसान के बारे में पूछे जाने पर सिब्बल ने कहा कि यदि नीति सही हो तो किसी तरह के नुकसान का सवाल नहीं उठता. यदि नीति में गड़बड़ी है, तो आपको अक्टूबर, 2003 से नुकसान का आकलन करना होगा, जिस समय यह नीति लागू हुई थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सरकार ने क्या सबक सीखा, इस बारे में पूछे जाने पर सिब्बल ने कहा कि कोई भी मंत्री काम कर रहा हो, उसे सभी से सलाह करनी चाहिए और किसी तरह की अनियमितता नहीं बरतनी चाहिए.

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