• आठ राज्यों ने बाँटे लोक-सेवा गारंटी के अनुभव

  • बगैर अपील के सुलझे 73 लाख आवेदन

भोपाल,8 दिसंबर. लोक-सेवा प्रदाय कानून को शक्तिशाली बना कर इसकी विश्वसनीयता बढ़ाने के लिये तैयार हो चुके मध्यप्रदेश ने बीते सवा साल में एक कीर्तिमान भी बनाया है. यह उपलब्धि इस दौरान 73 लाख आवेदनों के निराकरण के बाद एक अदद मामले के भी अपील की प्रक्रिया में नहीं जाने के चलते दर्ज हुई है. राजधानी में हो रहे वैचारिक विमर्श के पहले तकनीकी सत्र में आठ राज्यों के अनुभवों को बाँटे जाने के दौरान प्रमुख सचिव लोक-सेवा प्रबंधन श्री इक़बाल सिंह बैंस ने यह जानकारी दी. राज्य सरकार दूर-दराज तक इस कानून की पहुँच बनाने के लिये एक और सर्वे के जरिए मैदानी हालात की पड़ताल जल्द करने जा रही है.

अपील की नहीं पड़ी जरूरत- पदाभिहित अधिकारी समेत जिन स्तरों पर आवेदनों में लोक सेवाएँ दिये जाने का इंतजाम किया गया है, वहाँ बात नहीं बनने पर ही आवेदक के पास अपील में जाने का हक भी सुरक्षित है. राज्य सरकार द्वारा कानून पर अमल की मैदानी हकीकत जानने के लिये एक सर्वे करवाया गया था. प्रमुख सचिव श्री बैंस ने बताया कि इस सर्वे रिपोर्ट में यह रेखांकित किया गया कि कुल 73 लाख में से 72 लाख आवेदनों में सेवाएँ दिये जाने के बाद तकनीकी कारणों से एक प्रतिशत से भी कम आवेदन खारिज किये गये. पर सबसे अहम बात यह थी कि इन सारे मामलों में से एक में भी अपील में जाने की जरूरत नहीं पड़ी.

आठ राज्यों ने बाँटे अनुभव- मध्यप्रदेश में लोक-सेवा गारंटी कानून पर अमल की अगुवाई के बाद अन्य राज्य भी ऐसे समान कानूनों के साथ आगे आये हैं. आज वैचारिक विमर्श के प्रथम सत्र में मध्यप्रदेश समेत आठ राज्यों दिल्ली, जम्मू-काश्मीर, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, बिहार, उत्तराखण्ड और हरियाणा ने ऐसे कानूनों पर अमल के अपने अनुभव बाँटे. इस सिलसिले में सभी राज्यों ने इस कानून के प्रमुख प्रावधानों का खुलासा भी किया.

समूह चर्चाएँ भी हुईं- द्वितीय सत्र में सूचना-प्रौद्योगिकी, जन-जागृति और निजी जन-भागीदारी जैसे विषयों की लोक-सेवा प्रदाय में प्रासंगिकता और जुड़ाव को लेकर भिन्न समूहों में चर्चा की गई.

विमर्श की रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष शुक्रवार को- दो-दिनी वैचारिक विमर्श की विभिन्न गतिविधियों और इनके विश्लेषण पर केन्द्रित सुझावों का खुलासा शुक्रवार को समापन अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष होगा. इस मौके पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. ईशर अहलूवालिया भी मौजूद रहेंगी. विमर्श में यूएनडीपी की डिप्टी कंट्री रिप्रजेंटेटिव सुश्री एलेक्जेरिया, आंध्रप्रदेश के प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन  जे.सी. शर्मा समेत आई.टी. कम्पनियों विप्रो और रेड-हेड के प्रतिनिधि, 8 स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि और भोपाल समेत प्रदेश के 6 जिलों के कलेक्टर भाग ले रहे हैं.

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