अहमदाबाद और मुंबई में दो अहम फैसले

अहमदाबाद, 31 अगस्त. गोधरा ट्रेन अग्निकांड के अगले दिन अहमदाबाद के नरोडा पाटिया इलाके में हुए नरसंहार के मामले में अदालत आज पूर्व मंत्री माया कोडनानी को अलग-अलग मामलों में 28 साल और बाबू बजरंगी को उम्रकैद की सजा सुनाई है.

अदालत ने बाबू बजरंगी को जब तक वो मरे नहीं तब तक की सजा दी है. अदालत ने मायाबेन को एक धारा में 18 साल और दूसरी धारा में 10 साल की सजा दी है.  अदालत ने कहा है कि 10 साल की सजा खत्म होने के बाद ही उम्रकैद की सजा शुरू होगी. इस तरह से मायाबेन को 28 साल की सजा दी गई है. करीब साढ़े दस साल पहले हुए इस दंगे में 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी. इस मामले में 70 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनके खिलाफ 325 से ज्यादा लोगों ने गवाही दी. आरोपियों में से 7 की मौत हो चुकी है, जबकि दो फरार हैं. सजा सुनाए जाने से पहले यहां का माहौल काफी गरमाया हुआ था. दोषियों के परिजन और उनके समर्थक मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ यहां नारेबाजी हो रही हैं. लोगों में सरकार के खिलाफ नाराजगी है.

उधर अदालत के फैसले को लेकर विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण तोगडिय़ा में भी इस फैसले को लेकर काफी असंतोष है. उन्होंने कहा के देश में इतने दंगे हुए हैं, लेकिन किसी भी दंगे में हिंदुओं को पहली बार सजा सुनाई गई है. कोडनानी और बजरंगी को आइपीसी की धारा 120 (आपराधिक साजिश), धारा 302 (हत्या) और धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत दोषी ठहराया गया है.

बुधवार को विशेष अदालत ने इस मामले में 32 लोगों को दोषी करार दिया था, जबकि 29 को बरी कर दिया था. मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की करीबी मानी जाने वाली पूर्व मंत्री माया कोडनानी को अपराधिक साजिश, हत्या, हत्या के प्रयास के तहत दोषी करार दिया गया था. अन्य को दंगा फैलाने, आगजनी सहित अन्य आरोपों में दोषी पाया.

एक आरोपी सुरेश उर्फ रिचर्ड चारा पर बलात्कार का भी आरोप साबित हुआ है. गवाहों ने अदालत में बताया कि तत्कालीन विधायक माया कोडनानी ने भीड़ को उकसाया था. बाद में कोडनानी महिला और बाल विकास मंत्री बनी थीं. मार्च 2009 में मंत्री रहते गिरफ्तार होने पर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. जज ज्योत्सना याज्ञनिक की अदालत में जिरह करते हुए सरकारी वकील ने सभी दोषियों को फांसी देने की मांग की. इसका विरोध करते हुए बचाव पक्ष ने दोषियों की पारिवारिक पृष्ठभूमि और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखने की गुजारिश की.

कोर्ट ने सजा से पहले गिनाया कोडनानी, बजरंगी का घिनौना जुर्म

एसआईटी कोर्ट ने नरोडा पाटिया नरसंहार में पूर्व मंत्री माया कोडनानी, वीएचपी नेता बाबू बजरंगी व 29 अन्य को बेहद सख्त सजा सुनाते हुए इस नरसंहार के गई दर्दनाक पहलुओं का जिक्र किया. कोर्ट ने सांप्रदायिक दंगों को कैंसर करार देते हुए कहा कि नरोडा पाटिया भारतीय संविधान के इतिहास में एक काला अध्याय है. कोर्ट ने कहा, नरोडा पाटिया में 97 लोगों का एक ही दिन में कत्लेआम कर दिया गया. इसमें असहाय औरतें, बच्चे और बुजुर्ग लोग भी शामिल थे. नरसंहार कितना क्रूर और शर्मनाक था वह यह बताता है कि दंगाइयों ने 20 दिन के एक नवजात बच्चे को भी मार डाला.

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