विशाखापट्नम, 9 सितंबर. न्यूजीलैंड पर दो शून्य से मिली जीत से निश्चित ही भारत का आत्मविश्वास दृढ़ होगा. ऐसा पहली बार हुआ है, जब भारतीय सत्र की शुरुआत इतनी जल्दी हुई है. बारिश ने खेल में थोड़ी बाधा जरूर डाली, लेकिन यह परिणामों के आड़े नहीं आई. न्यूजीलैंड की टीम में अनुभव का काफी अभाव था और उनकी बल्लेबाजी में भी कमी थी. इसीलिए वे टेस्ट में काफी आसानी से हार गए.

कीवी टीम रॉस टेलर और ब्रेंडन मैकुलम पर काफी हद तक निर्भर थी. बेंगलूर में दूसरे टेस्ट की पहली पारी में हालांकि टेलर ने शानदार शतक लगाया, लेकिन मैकुलम विफल रहे और इससे अनुभवहीन बल्लेबाजी पर भारी दबाव पड़ा. गुप्टिल और केन विलियमसन से काफी अपेक्षा थी, लेकिन उन्होंने निराश किया. वैसे न्यूजीलैंड के गेंदबाज प्रभावी रहे. उनके नई गेंद के आक्रमण ने भारत की बल्लेबाजी को कठिनाई में डाला था. अनुभवी क्रिस मार्टिन के बजाय टिम साउदी ने टीम में जगह दिए जाने के फैसले को पहली पारी में सात विकेट लेते हुए शानदार गेंदबाजी करके न्यायोचित साबित किया. उस प्रयास के कारण ऐसा लगा कि दूसरी पारी में उनकी गेंदबाजी की धार कुछ घट गई थी. उन्होंने कुछ अच्छी गेंदें डाली, लेकिन उनकी गेंदबाजी में वह निरंतरता नहीं रही जैसी पहली पारी में थी. वैसे ट्रेंट बोल्ट और डग ब्रेसवेल ने बड़ी सफलताएं हासिल नहीं कीं, लेकिन उन्होंने भारतीय बल्लेबाजों के लिए कुछ समस्याएं जरूर पैदा की थीं.

भारत के लिए विराट कोहली ने अच्छी टेस्ट पारी खेलकर अपनी परिपक्वता का परिचय दिया. उन्होंने अपना समय लिया और एक बार गेंदबाज थक गए तब वह उन पर टूट पड़े और बेहतरीन शतक बनाया. कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की संगत में उन्होंने एक और सुंदर अर्धशतकीय पारी खेलकर उस क्रम को जारी रखा और भारत को जीत दिलाई. सभी तीन पारियों में धौनी की बल्लेबाजी ने उन सभी को झूठा कर दिया, जो ये कह रहे थे कि वह सिर्फ एक शैली में ही बल्लेबाजी कर सकते हैं. जिस किसी ने भी अंतरराष्ट्रीय करियर के आरंभ में भारतीय कप्तान की बल्लेबाजी देखी है, उसे पता होगा कि अब उन्होंने अपने दृष्टिकोण में कितना शानदार तालमेल बिठाया है. कुछ लोग जरूर तर्क दे सकते हैं कि उनका बेधड़क अंदाज ज्यादा रोमांचक था, लेकिन तथ्य तो यही है कि उनकी वर्तमान पद्धति उनकी टीम के लिए बहुत ही अच्छा काम करती है. टीम में ऐसे कुछ लोग हैं, जो उससे सीख ले सकते हैं.

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