• फिर गरमायेगा कोयले की आपूर्ति का मामला
  • कैबिनेट बैठक- लघु जल विद्युत परियोजना की नीति अनुमोदित

भोपाल,18 अक्टूबर. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज सम्पन्न मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता संशोधन अध्यादेश-2011 के प्रारूप को मंजूरी दी गई. इसके प्रावधानों को लागू करने के लिये अध्यादेश जारी किया जायेगा.

शीर्ष स्तरीय निवेश संवर्धन साधिकार समिति ने निर्णय लिया था कि वर्तमान में डायवर्सन भू-राजस्व की दरें दो प्रकार की हैं, जिन्हें 4 श्रेणियों में- 1. रहवासी, 2. व्यावसायिक, 3. औद्योगिक तथा 4. शैक्षणिक में निर्धारित किया जाये और औद्योगिक श्रेणी की भू-राजस्व दरें रहवासी की दर से अधिकतम दोगुनी हों. इसका लाभ केवल लघु उद्योग इकाइयों को दिया जाये. इस प्रकार कृषि भूमि को कृषिभिन्न प्रयोजनों में व्यपवर्तित किये जाने पर भू-राजस्व के पुनर्निधारण के लिये वर्तमान में लागू प्रतिमानित दरों को आधार बनाये जाने के स्थान पर गाइड-लाइन की दरों को आधार बनाये जाने पर परीक्षण किया गया. भोपाल संभाग आयुक्त की अध्यक्षता में गठित एकल सदस्यीय समिति द्वारा प्रदेश के अनेक नगरों में जमीन की हेराफेरी के संबंध में प्रस्तुत किये गये प्रतिवेदनों की मुख्यमंत्री ने दिसम्बर में समीक्षा की. उन्होंने निर्देश दिये कि जब किसी भूमि के संबंध में शासकीय और निजी भूमि होने का प्रश्न उद्भूत होता है और किसी व्यक्ति द्वारा यह दावा किया जाता है कि वह ऐसी भूमि का भूमि-स्वामी है तो ऐसे विवाद के निराकरण के लिये संहिता की धारा 57 (2) में वर्तमान में सक्षम अधिकारी उपखण्ड अधिकारी है. इसके स्थान पर कलेक्टर को सक्षम अधिकारी बनाया जाये. अत: यह निर्णय लिया गया है कि धारा-57 की उपधारा (3), (3-क) एवं (4) को विलोपित किया जाये और धारा 57 (2) में लिये गये निर्णय के विरुद्ध व्यवहार न्यायालय का क्षेत्राधिकार बाधित किया जाये.

  •  जल विद्युत परियोजना

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में बिजली की माँग और पूर्ति के बीच में अंतर को कुछ सीमा तक पूरा करने के लिये लघु जल विद्युत परियोजना से विद्युत उत्पादन की परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिये नई नीति का अनुमोदन किया. प्रदेश में लघु जल विद्युत परियोजनाओं से लगभग 750 मेगावॉट की क्षमता संभावित है. इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से प्रदेश और प्रदेश के बाहर के निवेशकों द्वारा लगभग 4500 करोड़ रुपये का निवेश किया जा सकेगा. राज्य में जल विद्युत उत्पादन की विपुल क्षमता तथा उसके अद्यतन उपयोग को दृष्टि में रखते हुए नीति के अंतर्गत प्रावधानों को उदार बनाया गया है. इससे निवेशक आगे आ सकेंगे और क्षमता का तेजी से दोहन हो सकेगा. इस नीति के अंतर्गत प्रदेश के अंदर किसी भी व्यक्ति द्वारा परियोजना स्थलों का चिन्हांकन किया जा सकता है. उसको परियोजना क्रियान्वयन की शर्तों के अंतर्गत छूट मिलेगी. इस नीति की मंजूरी से विकासकों द्वारा समय-सीमा में परियोजना स्थापना के प्रावधान से अब आगामी वर्षों में उपलब्ध क्षमता का तेजी से दोहन संभव हो सकेगा.

  •  आर्डर ऑफ प्रेसीडेंस

भारत सरकार द्वारा जारी सेंट्रल आर्डर ऑफ प्रेसीडेंस, 1979 एवं मध्यप्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित आर्डर ऑफ प्रेसीडेंस, 1964 एवं समय-समय पर इनमें हुए संशोधनों, विभिन्न संवैधानिक पदों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के पदों के सृजन के कारण वर्तमान आर्डर ऑफ प्रेसीडेंस में संशोधन किया गया है. प्रस्तावित मुख्य संशोधनों में भारत सरकार के सेंट्रल आर्डर ऑफ प्रेसीडेंस के पदाधिकारियों को शामिल करते हुए मध्यप्रदेश का संशोधन (नवीन) पूर्वता क्रम (आर्डर ऑफ प्रेसीडेंस) तैयार किया गया है. मंत्रि-मण्डल ने इसका अनुमोदन किया.

इसके अनुसार प्रदेश के पूर्व राज्यपाल, पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्य न्यायाधीश, पूर्व मुख्य सचिव, मुख्य सूचना आयुक्त, संसदीय सचिव, मुख्य सचेतक, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, पूर्व न्यायाधीश उच्च न्यायालय, महापौर, नगर पालिक निगम, मंत्री/राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त चुने हुए पदाधिकारी, महानिदेशक प्रशासन अकादमी, अध्यक्ष विद्युत नियामक आयोग, महाप्रबंधक रेलवे, पुलिस महानिदेशक, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मुख्य आयुक्त केन्द्रीय उत्पाद शुल्क एवं आयकर, पोस्टमास्टर जनरल, विभिन्न आयोग/अधिकरण/अपीलीय बोर्ड के अध्यक्ष, निदेशक नेशनल ज्यूडीशियल अकादमी, निदेशक राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय, सूचना आयुक्त, डीआरएम रेलवे, मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री, मुख्य महाप्रबंधक दूरसंचार, भोपाल में स्थित विभिन्न केन्द्रीय संस्थानों के निदेशक आदि का पूर्वता क्रम में स्थान निर्धारित किया गया है.

ये भी हुए निर्णय
मंत्रि-परिषद ने सरदार सरोवर परियोजना, फर्जी विक्रय पत्र एवं पुनर्वास स्थल अनियमितता आयोग के कार्यकाल को 9 अक्टूबर, 2011 से बढ़ाकर 8 अक्टूबर, 2012 तक बढ़ाने का निर्णय लिया. मंत्रि-परिषद ने कानून व्यवस्था एवं आंतरिक सुरक्षा, ऑफीशियल सीक्रेट एक्ट, असूचना संकलन आदि कार्य प्रभावी ढंग से किये जाने के लिये गृह विभाग (मंत्रालय) में & सेक्शन के गठन का निर्णय लिया. इसके लिये उप सचिव एवं अनुभाग अधिकारी का एक-एक पद निर्मित किया जायेगा. उल्लेखनीय है कि शांति-सुरक्षा तथा अत्यंत संवेदनशील घटनाओं को ध्यान में रखते हुए गृह विभाग के “सी सेक्शन” के पुनर्निर्माण के निर्देश मुख्यमंत्री ने गृह विभाग की समीक्षा के दौरान दिये थे. यह निर्णय इसी परिप्रेक्ष्य में लिया गया. मंत्रि-परिषद ने राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष बाबूलाल जैन को मंत्री स्तर का दर्जा प्रदान करने का निर्णय लिया. मंत्रि-परिषद ने मनोज शर्मा, उप यंत्री, जनपद पंचायत खाचरोद, जिला उज्जैन की सेवाएँ पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा में संविलियन किये जाने का निर्णय लिया.

  •  राविप की बैठक में शिवराज उठाएंगे कोयले का मुद्दा

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान एक बार फिर कोयले का मुद्दा केंद्र सरकार के सामने उठाएंगे. वे 22 अक्टूबर को हो रही राष्ट्रीय विकास परिषद (राविप)की बैठक में यह मुद्दा उठाएंगे. बैठक प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में होगी. कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री की मंत्रियों से अनौपचारिक चर्चा में यह तय किया गया. सारणी और बिरसिंहपुर पॉवर हाउसों में चालीस फीसदी से भी कम कोयला रह जाने से हालात बेहद खराब हो गए हैं.जबकि राज्य भर में बिजली की आंख मिचौली भी शुरु हो गई है.

  •  आएंगी हेमामालिनी और आशा भौंसले

अनौपचारिक बैठक में एक नवंबर को मप्र दिवस की तैयारियों पर भी बात हुई. जिसका राज्य स्तरीय कार्यक्रम राजधानी में रखा गया है.इसमें विख्यात फिल्म अभिनेत्री एवं नृत्यांगना हेमामालिनी तथा विख्यात गायिका आशा भौंसले की प्र्र्रस्तुतियां भी होंगी. मप्र दिवस पर जिला और ब्लॉक स्तर पर भी आयोजन होंगे. जिलों में प्रभारी मंत्री और विकासखंडों पर विधायक मुख्य अतिथि होंगे. जिन विस क्षेत्रों में दो ब्लॉक होंगे. उनमें एक ब्लॉक में जनपद अध्यक्ष मुख्य अतिथि होंगे.मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से उनके प्रभार वाले जिलों में खाद वितरण की मॉनीटरिंग और समीक्षा करने के  निर्देश दिए.

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