चौबीस घंटे में अपने निर्णय पर अखिलेश ने लिया यू-टर्न

लखनऊ, 4 जुलाई. अखिलेश यादव सरकार ने वाहन खरीदने के विवादास्पद निर्णय को वापस ले लिया. अखिलेश यादव सरकार ने आज विधायकों को अपनी क्षेत्रीय विकास निधि से 20 लाख रुपये तक का वाहन खरीदने की इजाजत देने के विवादास्पद निर्णय को वापस ले लिया.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यहां अपने सरकारी आवास पर संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने विधायकों को अपनी क्षेत्रीय विकास निधि से 20 लाख रुपये तक का वाहन खरीदने की इजाजत देने का निर्णय वापस ले लिया है. उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद अब कोई भी विधायक अपनी निधि से वाहन नहीं खरीद सकेगा. गौरतलब है कि अखिलेश ने कल विधानसभा में कहा था कि अब विधायक अपनी क्षेत्र विकास निधि से 20 लाख रुपये तक का वाहन खरीद सकेंगे. उन्होंने कहा था कि इच्छुक विधायक ह्मस मूल्य पर वाहन खरीद सकेंगे. पांच साल के बाद विधायक ह्मस मूल्य चुकाकर उस गाड़ी पर मालिकाना हक पा सकेंगे. हालांकि सरकार उन्हें वाहन के रखरखाव का खर्च नहीं देगी. इसके पूर्व, सरकार को प्रदेश में व्याप्त बिजली संकट से निपटने के लिये सभी शापिंग माल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को शाम सात बजे बंद करने के हाल के निर्णय को विपक्ष और व्यापारी संगठनों के कड़े विरोध के कारण वापस लेना पड़ा था.

इससे पहले के घटनाक्रम में प्रदेश की अखिलेश सरकार ने विधायक निधि से गाड़ी खरीदने की छूट देकर भले ही विधायकों की वाहवाही लूटने की कोशिश की हो, लेकिन समाज के जागरूक और बुद्धजीवी तबके ने सरकार के इस निर्णय की कड़ी आलोचना की थी. बुद्धजीवियों का कहना है कि सरकार को ऐसे फैसले लेने चाहिए जो जनहित की दृष्टि से उपयोगी हों. मात्र चंद लोगों को खुश करने की नीति से सरकार जनता का भला नहीं कर सकती. साहित्यकार और कवि डा. शिवओम अंबर का कहना है कि विधायकों को गाड़ी खरीदने की छूट देकर अखिलेश सरकार ने समाजवाद की नई परिभाषा प्रस्तुत की है. इसमें राजनीतिक स्वार्थ पहले और समाज पीछे चला गया है. अब तक जो पैसा जनहित के लिए था, अब उससे विधायक पहले अपना स्वार्थ सिद्ध करेंगे. पूर्ववर्ती बसपा सरकार ने तो सिर्फ भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया था.

लेकिन सपा सरकार कदाचार को बढ़ा रही है. जनता के पास अफसोस करने के सिवा कुछ नहीं बचा है. अर्थशास्त्री डा. एमएस सिद्दीकी ने कहा कि विधायक निधि से जो गाड़ी खरीदी जाए, उसका उपयोग जनहित में हो, तब तो ठीक, अन्यथा पैसे का दुरुपयोग होगा. इस बात की क्या गारंटी है कि विधायक निधि से गाड़ी खरीदने के बाद विधायक उसका निजी हित में दुरुपयोग नहीं करेंगे. डीएन डिग्री कालेज के प्राचार्य केएम सचदेवा ने कहा कि विधायक निधि से गाड़ी खरीदने का अधिकार देना उचित नहीं है. यह निर्णय करना ही है तो शासन विधायकों को गाड़ी खुद उपलब्ध कराए और उसकी राशि विधायक निधि से काट ले. अधिवक्ता लक्ष्मण सिंह ने सरकार के निर्णय को भ्रष्टाचार बढ़ाने वाला कदम बताते हुए कहा कि स्पष्ट बहुमत वाली सरकार को ऐसे फैसले लेने चाहिए जिसमें जनता का हित सर्वाधिक हो, लेकिन सपा सरकार वर्ग या व्यक्ति विशेष के तुष्टीकरण वाले फैसले कर रही है, जो भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले हैं.

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