सोमवार से प्रारंभ हुए श्राद्धपक्ष का 27 को होगा समापन

भोपाल, 12 सितंबर. पितृपक्ष शुरू होते ही राजधानी के घाटों पर पूजा अर्चना और तपर्ण करने श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया है. कमला पार्क स्थित शीलतदास की बगिया पर सोमवार को बड़ी संख्या में लोगों ने तपर्ण देकर अपने पितृ की प्रशन्नता के लिए प्रार्थना और पूजा अर्चना की.

अलसुबह से ही घाट पर स्थान आदि करने के बाद श्राद्ध पक्ष के प्रथम दिवस पर हाथों में कलश लिए जल में खड़े होकर जल का तपर्ण किया. घाट पर पुरोहितों ने यजमानों को श्राद्ध क्रिया सम्पन्न कराई. पूजन और तपर्ण का यह क्रम आश्विन मास के कृष्णपक्ष के पंद्रह दिन तक चलेगा. सोमवार को पितृपक्ष का प्रथम दिवस था. पित्र पक्ष सोमवार 12 सितंबर से प्रारंभ हुए हैं जो कि पंद्रह दिवस तक रहेंगे और इनका समापन 27 सितंबर को होगा. इस दौरान जलाशयों के घाट पर और अपने अपने निवास स्थानों पर श्रद्धालुगण यथा शक्ति अपने पितृ को तृप्त करने के लिए तपर्ण और पूजन अर्चन करेंगे.

पंडित विष्णु राजौरिया ने बताया कि पितृपक्ष के इन पंद्रह दिनों में लोग अपने पितरों को जल देते हैं तथा उनकी मृत्युतिथि पर श्राद्ध करते हैं और इस माध्यम से पितरों का ऋण चुकाए जाने का हमारे शास्त्रों मे बढ़ा महत्व है. पंडित सुशील शर्मा के अनुसार पितृपक्ष में श्राद्धों के लिए प्रंदह दिनों के समूह को निश्चित किया गया है. इन दिनों में अपने पितृ का तपर्ण किया जाता है. शास्त्रों की मान्यता के अनुसार वर्ष के किसी भी मास तथा तिथि में स्वर्गवासी हुए पितरों के लिए पितृपक्ष की उसी तिथि को श्राद्ध किया जाता है और पूर्णिमा पर देहांत होने से भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा को श्राद्ध करने का विधान है.

पितृपक्ष में श्राद्ध करने से पितृगण वर्षभर तक प्रसन्न रहते हैं. पंडित जगदीश शर्मा ने बताया कि पितरों का पिण्डदान करने से दीर्घायु, पुत्र-पौत्रादि, यश, स्वर्ग, पुष्टि, बल, लक्ष्मी, पशु, सुख-साधन तथा धन-धान्य की प्राप्ति होती है. यह भी मान्यता है कि श्राद्ध में पितरों को आशा रहती है कि हमारे पुत्र-पौत्रादि हमें पिण्डदान तथा तिलांजलि प्रदान कर संतुष्ट करेंगे. इसी आशा के साथ वे पितृलोक से पृथ्वीलोक पर आते हैं. इसलिए  पितृपक्ष में श्राद्ध अवश्य करना चाहिए.

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