• स्वयं की पहचान बनाओ और पवित्र मकसद के लिये जियो

भोपाल, 24 नवंबर. हम जिंदगी जीने के लिए आये है, आप जहा भी हो वहां की शोभा बनो और खुद को प्यार करते हुए अनुशासन में रहे. बच्चों में मन की प्रबलता होती है. इसलिए बड़े होने के लिए मन को नियंत्रित करना होगा. अनुशासन जीवन का सबसे बड़ा चौकीदार है, और ऐसे में सन्तुलन द्वारा स्वयं एवं अन्य का समय खराब होने से बचाया जा सकता है.

 

सभी को सुबह की पवित्रता बनाएं रखकर मन और वाणी में भी पवित्रता लानी चाहिए मन के अंदर शुद्घ और पवित्र भाव लाने चाहिए. धन की पवित्रता, वस्त्र की पवित्रता हमेशा बनाए रखी चाहिए. मन को साधकर सुमन बनाओ, हमेशा मकसद के लिये जिओ फूल जसे कोमल बनो, आंधी और तूफानों में मुस्कराना सीखे, मेरा मन कल्याण वाला, विचारों वाला हो जाय, यही ईश्वर से अपेक्षा करों, स्वयं को प्रशिक्षित करना सीखों और अपना आत्म सम्मान सुरक्षित रखना. हर आदमी की कीमत है अपने भीतर बीमारियों को न घुसने दे. मस्तिष्क को सुझाव दे. देव शक्तियां प्रात: बेला में बढ़ती है और भगवान के दूत के रूप में आशीर्वाद देती है. बढ़ापा भगाने के लिए नियमित व्यायाम करें. नाडी शोधन से शुद्घ होती है तथा ब्रम्ह बेला में प्रकृति कृपा करती है. उक्त उद्ïबोधन दशहरा मैदान टी.टी. नगर में विश्व जागृति मिशन भोपाल मण्डल द्वारा गुरुवार को आयोजित दूसरे दिन के सत्संग की प्रात: कालीन सभा में सुधांशु महाराज ने उपस्थित श्रद्घालुओं को दिया. महाराज ने कहाकि आप अपने मन को संतुलित करें और यह संकल्प लें कि न अपना समय खराब करुंगा न दूसरों का. अपनी शिकायत का अवसर दूंगा न दूसरों की शिकायत का. न खुद रोऊंगा न किसी और को रुलाउंगा. अपना उत्तरदायित्व तय करिए. प्रात: बेला में चिखना चिल्लाना नहीं. कल की सारी तैयारियां रात को ही करके रख लें. न तेजी से दौड़े, न धीमें धीमे, सादी गति से दिन की दिनचर्या आरंभ करे”.

आचार्यश्री ने बताया कि जो खुशी से जोड़ देव ही वास्तविक पर्वत है. हमारे शरीर में 33 अस्थि खंड है जिनमें जिन्हें हम पर्व कहते है पर्व से जुड़कर पर्वत कहलाता है. हमारे सिर के सबसे ऊपरी भाग को सचखंड कहते है जहा शिव विराजमान है और हमारी पार्वती शक्ति धीरे धीरे चलकर शिव तय पहुंचती है तो हमारा जीवन उत्कृष्ट हो जाता है. सत्संग में विशेष तौर पर ब्राम्ह प्राणायम के तरीके बताये  गये और अभ्यास कराया गया. मुुख्य प्राणायाम जिसमें नाड़ी शोधन क्रिया शामिल है. उसका भी अभ्यास कराते हुए उन्होंने बताया कि आपका कौन सा सर चल रहा है, उसी ओर से सांसे लें और दूसरी तरफ से छोड़े, समयावधि का ध्यान रखे इसके लिए प्रारंभ में गिनती का प्रयोग करते हए नाडी शोध प्रारंभ करें. अभ्यास हो जाने पर अपने आप क्रिया ठीक होती जाएगी. लोम अनुलोम और प्राणायाम के बारे में भी विस्तृत रूप से उपस्थित श्रद्घालुओं को जानकारी दी गई.

मनुष्य के एक कर्म से कल्याण हो सकता है-मानव जाति को खुद के दायरे से बाहर निकालकर ही उन्नति का रास्ता प्रशस्त किया जा सकता है. जिस तरह अच्छे खिलाडिय़ों को अच्छे ट्रेनर चाहिए आज हर क्षेत्र में गाईड की जरूरत है. जिंदगी में भी अच्छे गाईड की जरूरत है. लक्ष्य को सामने रखों तो जो पाना चाहते तो, उसे पाओगे. धर्मवीर बनो, कर्मचारी बनो, दानवीर बनो और इससे नीचे कुछ नहीं. बुजदील और कायर का कभी सम्मान नहीं होता. सम्मान तो उसका होता है, जो हिम्मतवाला होगा. हिम्मत है तो सब कुछ करेगा मनुष्य. इतना ही कर सकता हूं. ऐसा मत कहो, कितना भी कर सकता हूं यह कहो. खुद में विश्वास जगाओ और अपनी क्षमताओं के दायरे को सीमित न करो. तुम्हारी क्षमता असीम है, परमात्मा असीम है और उसके बच्चे को कमजोर मत बनाओ. शब्द प्रेरणा बनेंगे और आप में पैनापन आयेंगा. आज युक्ति से मुक्ति है. दो चीजे हम भूल जाते है इसलिए शक्ति अच्छी कहना सीखे, इससे दुश्मन भी अपने हो जाते है.अपना कल्याण मनुष्य एक कर्म से कम सकता है और वह है अच्छा बोलना. गुरु से मिलती है यक्ति.

सीखने और जानने की इच्छा कभी खत्म मत होने दो. सीखना बंद करते हए आप अपने को सीमित कर देते है. मन मस्तिष्क के अन्दर कछ भी विचार आये उसे उगने न दे गंदी विचारधारा को अपने अन्दर स्थान न दें. घर में स्वागतम सज्जन के लिए है, दुष्ट या चोर के लिए नहीं. कोई चीज जो आपकी प्रगति में बाधक है उसे रोके, काट दे. गुरु आपको बार-बार संकेत देता है. पोषण देने वाले विचारों को जगह दीजिए जिससे आपका भला होगा. आपको दौड़ते हुए आगे बढऩा है तो आपको दौडऩा ही होगा. अच्छी किताबेे हमेशा पढ़े और सीखने के लिए हमेशा तत्पर रहे. शरीर के जिस हिस्से का आप उपयोग करना बंद कर देते है वह काम करना बंद कर देगा. आगे बढऩा है तो जिज्ञासा हमेशा बनी रहे. विचारों की संख्या हमारे मस्तिष्क में 60 हजार है, शक्त सूरत जरूर मिल जताी है. लेकिन सबकी अपनी अलग अलग माताएं है. कर्म करने वाले के लिए हर जगह कृपा मिलती है. कैकई आज घर में बस गया है. शकुनी आज पीछे रह गये है. टेलीविजन पर अच्छे कार्यक्रम देखे. अपने बच्चों को दौलत ही न दें, उन्हें अच्छी सीख और शिक्षा भी दें और धन को संवारने और सम्हालने भी सिखाए नहीं तो कभी भी सड़क पर आ जायेगा.

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