भोपाल, 25 जून. निगम मण्डल लघु वेतन एवं वाहन चालक कर्मचारी महासंघ के प्रांताध्यक्ष दिल बहादुर थापा ने बताया कि मध्यप्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम में 14 सूत्रीय मांगों के दूसरे चरण में 20 दिवस भी नारेबाजी भी की गई.

इसके समर्थन में विभिन्न मण्डलो के पदाधिकारी द्वारा मांग जायज होने के संबंध में अपना-अपना समर्थन दिया गया. इस हड़ताल में मध्यप्रदेश गृह निर्माण लघु वेतन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रामकरण सोंधिया लेखा कोषालय के सुल्तान खान, नागरिक आपूर्ति निगम के संयोजक सुरेश वानखेड़े आदि कर्मचारियों ने अपना समर्थन दिया. मांगों को लेकर पंरातव्यापी होगा आंदोलन- मप्र नगर निगम, नगर पालिका संयुक्त कर्मचारी मोर्चे के प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ लोकल सेल्फ गवर्नमेंट के सभा कक्ष में संपन्न हुई. इस बैठक का उद्घाटन मोर्चे के संरक्षक महेन्द्र कुमार राय ने किया अध्यक्षता मोर्चे के प्रंतीय अध्यक्ष अरविंद कपूर ने की.

बैठक में मुख्य अतिथि आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य अरविंद श्रीवास्तव थे. उन्होने वर्तमान राजनीति के परिपेक्ष्य में ट्रेड यूनियन आंदोलन की भूमिका पर विचार व्यक्त किए.  सम्मेलन में प्रदेश के नगरीय निकाय के कर्मचारी प्रतिनिधियों ने शासन से वेतन की गारंटी की मांग नगरीय निकाय के अधिकारी के सम्पूर्ण कैडर का पुनर्गठन करने, पृथक वेतन आयोग गठित करने, समयमान वेतनमान लागू करने, छठवें वेतनमान का एरिर्यस प्रदान करने, पेट्रोल की पुनरीक्षित करने पंजाब राज्य की भंाति प्रत्येक अधिकारी कर्मचारी को मोबाइल भत्ता देने, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को समयबद्घ कार्यक्रम अनुसार नियमित करने एवं प्रत्येक नगरीय निकाय में कम्प्यूटर आपरेटर, जनसेवक के पद निर्मित करने एवं नगरीय निकायों के सभी संवर्गों जैसे मुख्य नगर पालिका अधिकारी ‘गÓ श्रेणी सहायक यंत्री, उपयंत्री, स्वच्छता निरीक्षक पदों पर विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक करने की मांगो को लेकर प्रांतव्यापी आंदोलन करने का निर्णय लिया गया है.

20 जुलाई को धरना- मप्र अधिकारी, कर्मचारी अध्यक्षीय मण्डल की बैठक एलएन कैलाशिया की अध्यक्षता में संपन्न हुई. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जुलाई माह में विधानसभा सत्र के दौरान 20 जुलाई को एक दिवस का राजधानी स्तरीय मंत्रालय के समक्ष धरना करेंगे. इसका प्रदेश सरकार को 28 जून को विधिवत मांग-पत्र सहित नोटिस सौंपा जायेगा तथा जुलाई के प्रथम सप्ताह से राजधानी के विभागों में नुक्कड़ सभाएं प्रारंभ की जाएंगी.
राज्य सरकार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ज्वलंत लंबित मांगो को अनदेखा कर रही है. जिसका उक्त बैठक में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों ने शासन की इस कर्मचारी विरोधी नीतियों का खुलकर विरोध किया. प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए. राज्य सरकार छठवें वेतनमान की विसंगतियां दूर करने सहित अन्य भत्ते एवं प्रासंगिक लाभ देने में गंभीर नहीं है और अग्रवाल वेतन आयोग की कर्मचारी हितैशी अनुशंसाओं को लागू करने में टालमटोल की नीति अपना रही है.

साथ ही राज्य सरकार सभी कर्मचारियों की समयमान वेतनमान कार्यभारित दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का नियमिती करण नहीं कर रही है. और अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सेवाओं की असमानताओं को समाप्त नहीं कर रही है. इन सभी मांगों को लेकर माननीय मुख्यमंत्री, राज्यमंत्री सामान्य प्रशासन विभाग एवं शासन स्तर पर लगातार चर्चाएं होने के बावजूद भी कोई भी कर्मचारी हितैशी निर्णय नहीं हो पाने के कारण अधिकारियों एंव कर्मचारियों में राज्य सरकार के प्रति गहन असंतोष है.

Related Posts: