नई दिल्ली. खाद्य मुद्रास्फीति 10 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में घटकर 1.81 फीसदी के स्तर पर आ गई। यह खाद्य मुद्रास्फीति का चार साल का निचला स्तर है। आवश्यक खाद्य वस्तुओं मसलन सब्जियों, प्याज, आलू और गेहूं की कीमतों में कमी से खाद्य मुद्रास्फीति नीचे आई है।

यह खाद्य मुद्रास्फीति का 9 फरवरी, 2008 के बाद का निचला स्तर है। उस समय यह 2.26 फीसदी पर थी। थोक मूल्य सूचकांक आधारित खाद्य वस्तुओं की महंगाई की दर इससे पिछले सप्ताह 4.35 फीसदी पर थी। पिछले साल इसी सप्ताह यह 13.22 फीसदी के उच्च स्तर पर थी। विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य मुद्रास्फीति में भारी गिरावट सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक दोनों के लिए राहत प्रदान करने वाली है। नवंबर के पहले सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति दो अंक में थी। देश हासिल करेगा 7 फीसदी विकास दर-भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा है कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में गिरावट के बावजूद मौजूदा वित्त वर्ष में सात फीसदी की विकास दर हासिल करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। सुब्बाराव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था में आई कमजोरी का असर एशियाई देशों पर भी पड़ रहा है। भारत की जीडीपी दर में आई गिरावट का इससे सीधा संबंध है। सितंबर में समाप्त तिमाही में विकास दर अनुमान से नीचे रही है।

भारतीय आर्थिक वृद्धि की रफ्तार में आई गिरावट से मौजूदा वित्त वर्ष में इसके छह फीसदी के आसपास तक पहुंच जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि सुब्बाराव को यकीन है कि भारत तमाम चुनौतियों के बावजूद सात फीसदी की विकास दर हासिल करने में सफल रहेगा। इस लक्ष्य का हासिल करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने डॉलर के मुकाबले रूपए की कीमत में आई गिरावट का उल्लेख करते हुए कहा कि अगस्त से ही रूपए की कीमत में कमी आ रही है। इसका असर सरकार और बैंकिंग सेक्टर दोनों पर ही देखा जा रहा है। रिजर्व बैंक ने पिछले सप्ताह रूपए के 54.30 रूपए प्रति डॉलर तक गिर जाने के बाद अंतरबैंकिंग मुद्रा कारोबार में हस्तक्षेप करके रूपए की गिरावट थामी थी। गवर्नर ने बढ़ती महंगाई के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में बढी समृद्धि को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि अब ग्रामीण लोगों के पास भी धन है और वे उसे खाने-पीने तथा दूसरी चीजों पर खर्च करने को तैयार हैं। ग्रामीण क्षेत्र में मांग बढने के कारण सामान महंगे हो गए हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार के लिए सघन प्रयास करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि इसके लिए 2000 तक की आबादी वाले हरेक गांव में बैंक का प्रतिनिधि रखने से शानदार परिणाम आ सकते हैं। रिजर्व बैंक ने देश की संपूर्ण आबादी को बैंकिंग सुविधा के दायरे में लाने के लिए पिछले कुछ साल से एक मुहिम चलाई हुई है।

और बुरे होंगे 2012 में आर्थिक हालात

विकसित देशों के आर्थिक हालात में निरंतर गिरावट की सम्भावना के बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुख्य अर्थशास्त्री ओलीवियर ब्लैंकार्ड ने चेतावनी दी कि अगले वर्ष वैश्विक आर्थिक स्थिति और भी बुरी होगी। ब्लैंकार्ड ने आईएमएफ के एक ब्लॉग में लिखा कि वर्ष 2011 की शुरुआत वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार की आशा के साथ हुई थी, लेकिन वर्ष के अंत में विकास अवरुद्ध तथा विश्वास में कमी देखी जा रही है।उन्होंने कहा, ‘जैसे-जैसे वर्ष समाप्त हो रहा है कई विकसित देशों में विकास अवरुद्ध देखा जा रहा है। कुछ निवेशक तो यूरोजोन के विखरने की सम्भावना और उसके असर की गणना कर रहे हैं और वास्तविक सम्भावना तो यह है कि स्थिति 2008 से भी बुरी हो सकती है। प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लेगार्ड ने भी कहा है कि यूरोपीय कर्ज संकट के कारण संस्थान 2012 के लिए विश्व के आर्थिक विकास के अनुमान में कटौती कर सकता है। क्रिस्टीन ने अफ्रीका दौरे के बीच कहा, ‘मैं लगभग पूरी तरह आश्वस्त हूं कि जनवरी में अनुमान में नकारात्मक संशोधन किया जा सकता है। सितम्बर में जारी विश्व आर्थिक संभावना रिपोर्ट में आईएमएफ ने 2012 में विश्व की आर्थिक विकास चार फीसदी रहने का अनुमान जताया था.

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