विज्ञान के अध्ययन को प्रोत्साहन जरूरी, स्वर्ण जयंती समापन समारोह में मुख्यमंत्री

भोपाल, 6 नवंबर. मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि मोतीलाल नेहरू विज्ञान महाविद्यालय के लिए प्रशासकीय भवन का निर्माण किया जाएगा. महाविद्यालय के विकास की आवश्यकता होने पर योजना में संशोधन भी किया जाएगा. उन्होंने कहा कि महाविद्यालय से सम्बद्ध छात्रावासों के निर्माण योजना के पुनर्जीवन पर भी विचार किया जायेगा. चौहान आज मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे. कार्यक्रम में महाविद्यालय के पूर्व छात्र एवं केन्द्रीय राज्यमंत्री कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग चरणदास महंत सपत्नीक उपस्थित थे.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छात्र जीवन की स्मृतियाँ अविस्मरणीय होती है. छात्र जीवन में अध्ययन और छात्र राजनीति से जुड़ी विभिन्न घटनाओं का स्मरण करते हुये कहा कि छात्र जीवन में संबंध दिल से बनते हैं. उन्होंने विज्ञान के अध्ययन के प्रति रूचि में हो रही कमी पर चिंता करते हुये विज्ञान के अध्ययन को प्रोत्साहित करने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि महाविद्यालय विज्ञान अध्ययन का देश का सर्वश्रेष्ठ केन्द्र बनें. इसके लिए सभी को संकल्पित होना होगा.

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि संतोष आनंद की आत्मिक अनुभूति है. इसे बाहर से प्राप्त नहीं किया जा सकता. यह अंदर से उत्पन्न होती जब हमारें ईमानदारी और कत्र्तव्यनिष्ठा से किये गए कार्यों के परिणाम सामने आते हैं. उन्होंने कहा कि आज महाविद्यालय के शिक्षकों को पूर्व छात्रों को सफलता के विभिन्न मुकामों पर देखकर ऐसे ही आनंद की अनुभूति हो रही होगी. उन्होंने महाविद्यालय के पूर्व छात्रों को आयोजन संबंधी व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए बधाई देते हुये कहा कि महाविद्यालय के छात्र जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं. सभी ने महाविद्यालय का नाम रोशन किया है.

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि भारत अद्भुत देश है यहाँ विचारों की जितनी स्वतंत्रता है उतनी दुनिया के किसी भी देश में नहीं है. भारतीय मान्यता कि सत्य एक है, उसके रास्ते अलग-अलग है. वैचारिक स्वतंत्रता का आधार है. उन्होंने कहा कि ईश्वर को पाने के लिये ज्ञान, भक्ति और कर्म मार्गों को स्वीकारा गया है. उन्होंने कहा कि कर्ममार्गी व्यक्ति को ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य करने पर भगवान मिल जाते हैं.

मुख्यमंत्री ने महाविद्यालय की स्मारिका का विमोचन किया. महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्यों छात्रसंघ अध्यक्षों, छात्रों और प्राध्यापकों को शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया. केन्द्रीय राज्य मंत्री कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग डॉ.चरण दास महंत ने कहा कि वे महाविद्यालय और भोपाल नगर के प्रति आभार ज्ञापित करने आए हैं जहाँ से उन्हें सामाजिक जीवन के संस्कार और परिवार का आधार उनकी जीवन संगनी प्राप्त हुई है. उन्होंने कहा कि यहाँ की हवाओं फिज़ाओं सभी में उनकी भूली-बिसरी यादें बसी हैं. डॉ. महंत ने कहा कि एम.वी.एम. महाविद्यालय का शुभारंभ और लोकार्पण डॉ.राजेन्द्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू जैसे महान व्यक्तियों ने किया है. उनका आशीर्वाद यहाँ के विद्यार्थियों को मिला है इसीलिये जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलतापूर्वक देश की सेवा कर रहे हैं.

उन्होंने कार्यक्रम के दौरान गुरूजनों के सम्मान को भारतीय संस्कृति की गुरू को ईश्वर से अधिक सम्मान की परम्परा के अनुरूप बताते हुए आयोजकों को बधाई दी. कार्यक्रम में विधायक ध्रुवनारायण सिंह, अध्यक्ष जनभागीदारी समिति रवीन्द्र यती और आयोजन समिति के सचिव राजकुमार पटेल, राम स्वरूप सिकरवार और विनय सेंगर ने भी संबोधित किया. महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. आभा गार्गव ने प्रगति की जानकारी देते हुये अतिथियों का स्वागत किया. आभार प्रदर्शन छात्र संघ अध्यक्ष सुश्री राजकुमारी साहू ने किया.
कार्यक्रम में महाविद्यालय स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर प्रारंभ 5 पुरस्कार प्रदान किये गए. एम.वी.एम. रत्न कुमारी नवीना नदीम को, गीता देवी त्यागी स्मृति पुरस्कार श्रीमती नेहा रघुवंशी को, सुभाषचन्द्र उपाध्याय स्मृति पुरस्कार नवीना नदीम को, शांता रामचन्द्रन स्मृति पुरस्कार श्री शिवनारायण दांगी को और श्यामाबाई स्मृति पुरस्कार कु. प्रियंका त्यागी को प्रदान किया गया. कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्जवलन एवं माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. मुख्यमंत्री चौहान का 51 किलोग्राम की पुष्पमाला से स्वागत किया गया. महाविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों ने देश भक्ति गीत, वर्तमान छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना, म.प्र.गान का और सुश्री सुहासिनी जोशी ने वंदे मातरम् का गायन किया. इस अवसर पर विधानसभा में प्रतिपक्ष के उप नेता चौधरी राकेश सिंह, विधायक प्रभुराम चौधरी, विधायक ब्रजेन्द्र सिंह राठौर, अशोक जैन ‘भाभा’, प्रशासनिक अधिकारी और नागरिक उपस्थित थे.

पुरानी यादें हुई ताजी

आज एमवीएम में आकर तीस साल (1980-85) पुरानी यादें ताजा हो चली हैं. कॉलेज के बीते दिन, यार-दोस्तों से गप्पबाजी और कॉलेज की बिङ्क्षल्डग भी हमें ऐसा ही अहसास कराती है. आज भी जब कभी जिन्दगी में बोरियत होती है तो मैं कॉलेज के पुराने दिनों में खो जाता हूं. कॉलेज परिसर में लगे दरख्त, सीढिय़ां, लैब, चबूतरे सब कुछ आज भी यादों में हैं. कॉलेज का वार्षिकोत्सव, छात्र संघ चुनाव, लड़ाई-झगड़ा, कैंटीन, पी.टी. और जी.टी. किसी भी उत्सवी माहौल से कम नहीं लगते थे. प्रोफसरों का प्यार-दुलार, अपनापन भी उतना ही याद आता है जितनी उनकी डांट-फटकार. सच में कहा जाए तो कॉलेज से जुड़ी यादें किसी सर्द मौसम की गुनगुनी धूप के अहसास से कम नहीं होतीं.
प्रलय श्रीवास्त्व पूर्व छात्र

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