•  पंचपरमेश्वर योजना का शुभारंभ 
  •  औद्योगिक क्रांति के लिए महत्वपूर्ण निर्णय 
  •  राष्ट्रीय सब्जी पहल योजना में चयन

गांवों को पिछडने नहीं देंगे : शिवराज

भोपाल,10 जनवरी. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दृढ़ता पूर्वक कहा है कि विकास की दौड़ में गाँवों को किसी भी हाल में पिछडऩे नहीं दिया जायेगा. वास्तविक भारत गाँवों में बसता है और मध्यप्रदेश सरकार गाँवों की तस्वीर और तकदीर बदलने के लिये प्रतिबद्धता से काम कर रही है.

चौहान आज यहाँ गाँवों को अधोसंरचना विकास के लिये एकमुश्त राशि दिये जाने के लिये ”पंच-परमेश्वर योजना” का शुभारंभ कर रहे थे. इस योजना का उद्देश्य गाँवों में अधोसंरचना तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से और अधिक प्रभावी ढंग से विकास करना है. मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम-पंचायतें देश में लोकतंत्र की मजबूत जड़ें हैं. श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने गाँवों को पक्की सड़कों से जोडऩे के लिये प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना लागू करके एक क्रांतिकारी कार्य किया. इसके पहले ग्रामीणों के लिये पक्की सड़क एक सपना थी. इस योजना के तहत मध्यप्रदेश ने एक हजार तक की जनसंख्या वाले सभी गाँवों को पक्की सड़कों से जोड़ दिया. उन्होंने कहा कि बात राजनीति की नहीं है, लेकिन यह एक तथ्य है कि इस कार्य के बदले प्रदेश को पुरस्कार मिलने की जगह दण्डित किया गया.

उसे इस योजना में राशि देना यह कहकर बंद कर दिया गया कि पहले देश के सभी एक हजार जनसंख्या तक के गाँव सड़कों से जुड़ जायें तब शेष गाँवों को इसमें शामिल किया जायेगा.हम इससे हतोत्साहित नहीं हुए और ग्रामीणों के हित में एक हजार से कम जनसंख्या वाले गाँवों के लिये मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू की गई है. इसी तरह केन्द्र सरकार ने इंदिरा आवास योजना में मध्यप्रदेश को जनसंख्या के मान से बहुत कम आवास आवंटित किये, जो सरासर अन्याय था. हमने गरीबों को आवास देने के लिये मुख्यमंत्री आवास योजना शुरू की, जिसमें प्रदेश में 50 हजार आवासों का निर्माण किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पंच-परमेश्वर योजना से आँगनवाड़ी भवन, सड़क सहित अधोसंरचना से संबंधित सभी कार्य बहुत तेजी से और व्यवस्थित रूप से हो सकेंगे. योजनाओं के कन्वर्जेंस के कारण इसके परिणाम बहुत अच्छे निकलेंगे. शायद ही कोई ऐसी ग्राम-पंचायत रहेगी जो प्रतिवर्ष सड़कों पर 20 लाख रुपये खर्च न कर पाये. जो पंचायतें राशि जल्दी खर्च कर देंगी उन्हें अतिरिक्त राशि दी जायेगी.

मुख्यमंत्री ने पंचों और सरपंचों से आग्रह किया कि वे इस योजना का पूरा लाभ लेकर अपने गाँव की तस्वीर और तकदीर को बदल दे. मुख्यमंत्री ने खेतिहर मजदूरों तथा समाज के अन्य कमजोर वर्गों को दी जाने वाली विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि सबसे गरीब और सबसे कमजोर वर्गों को सरकार सबसे ज्यादा और सबसे पहले सहायता दे रही है. राज्यमंत्री देवसिंह सैयाम ने कहा कि ग्राम पंचायत के अंतर्गत पक्के निर्माण कार्यों की लम्बे समय से चली आ रही मांग पंच परमेश्वर योजना में पूरी हो गई है. उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से राज्य शासन के प्रति आभार ज्ञापित किया. प्रमुख सचिव अरूणा शर्मा ने बताया कि पंच परमेश्वर योजना में राज्य वित्त आयोग और 13 वें वित्त आयोग के प्रावधानों का पालन करते हुए प्रत्येक पंचायत को समग्र रूप से राशि दी जाएगी. इस राशि से पंचायत में सीमेंट-कांक्रीट सड़क, पंचायत भवन और अतिरिक्त कक्षों का निर्माण किया जा सकेगा.

कार्यक्रम में ग्राम पंचायत शेरपुर, जनपद पंचायत सिहावल, जिला सीधी के सरपंच विनयसिंह और ग्राम पंचायत बिलावली, जनपद पंचायत बागली के सरपंच डॉ. हरेसिंह सैंधव ने भी विचार व्यक्त किये. इसके पूर्व पंचायत आयुक्त विश्व मोहन उपाध्याय ने स्वागत उद्बोदन दिया. आभार ज्ञापन ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अजय तिर्की ने किया. कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्यमंत्री चौहान ने पंच परमेश्वर योजना का फोल्डर अधिकारिक रूप से जारी कर योजना का शुभारंभ किया. उन्होंने विभाग द्वारा प्रकाशित वर्ष 1987 से जारी विभागीय आदेशों की संकलन पुस्तिका का विमोचन भी किया. अतिथियों का स्वागत क्षेत्र से आये सरपंचों द्वारा किया गया. इस अवसर पर आयुक्त राज्य रोजगार गारंटी परिषद नीरज मंडलोई, संचालक राजीव गांधी मिशन उमाकांत उमराव और 1500 सरपंच उपस्थित थे.

ये है पंच परमेश्वर योजना

पंच परमेश्वर योजना के तहत ग्राम पंचायतों को वित्तीय वर्ष में जनसंख्या के मान से एकजाई राशि मिलेगी. योजना में दो हजार तक की जनसंख्या वाली ग्राम पंचायत को 5 लाख तक, दो हजार एक से पाँच हजार तक की जनसंख्या वाली ग्राम पंचायत को 8 लाख तक, पाँच हजार एक से दस हजार तक की जनसंख्या वाली ग्राम पंचायत को 10 लाख तक और दस हजार एक से अधिक की जनसंख्या वाली ग्राम पंचायत को 15 लाख तक की एकजाई राशि प्रदान की जाएगी. अब तक पंचायतों को विभिन्न योजनाओं में मिलने वाली राशि टुकड़ों में मिलती थी इस वजह से गाँवों के विकास के काम भी टुकड़ों में होते थे. पंच परमेश्वर योजना से इस खामी को दूर करने में मदद मिलेगी और एकजाई राशि मिलने से विकास के काम तेज गति से पूरे होंगें. फिलहाल पंचायत राज द्वारा संचालित विभिन्न मदों जिनमें तेरहवाँ वित्त आयोग,राज्य वित्त का मूलभूत अनुदान, खनिज तथा स्टॉम्प ड्यूटी से मिलने वाली राशि ग्राम पंचायतों को अलग-अलग मदों में मिलती है और वे इनका एक साथ उपयोग नहीं कर पा रही हैं.

नई योजना के जरिये अब प्रत्येक पंचायत को तेरहवें वित्त आयोग और तीसरे राज्य वित्त आयोग के अनुसार राशि मिलेगी. जिन पंचायतों को पंच परमेश्वर योजना में इन दोनों योजनाओं में कम राशि मिलेगी उनमें इस कमी को अब स्टॉम्प ड्यूटी और खनिज से मिलने वाली राशि से पूरा किया जायेगा. इसी तरह जिन पंचायतों को अब तक ज्यादा राशि मिल रही है वे योजना में मिलने वाली राशि का उपयोग करने के बाद अतिरिक्त राशि ले सकेंगी. ग्राम पंचायतों को अब जनसंख्या के मान से पहले दो वर्ष के लिए अतिरिक्त एकीकृत कार्य योजना बनाने का सुझाव भी दिया गया है. कार्य योजना में गाँवों में नाली सहित आंतरिक रोड और जिन गाँवों में पहले से आँगनवाड़ी भवनों की मंजूरी मिल चुकी है वहाँ भवनों का निर्माण होगा. ग्राम पंचायतों के पुराने भवनों में ई-पंचायत व्यवस्था के लिए निर्धारित नक्शों के अनुसार 200 वर्गफीट आकार के ई-पंचायत कक्ष का निर्माण होगा. ग्राम पंचायत दस फीसदी राशि परिसम्पत्तियों के रख-रखाव और सफाई कार्यों पर खर्च कर सकेगीं.

स्थापित होंगे 27 औद्योगिक क्षेत्र

भोपाल,10 जनवरी.नभासं .प्रदेश में औद्योगिक क्रांति के उद्देश्य से आज मंत्रि-परिषद द्वारा महत्वपूर्ण निर्णय लिए गये. इसके तहत नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना, प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में आवश्यक अधोसंरचना के विकास और डीएमआयसी परियोजना के लिए भू-अर्जन के उद्देश्य से ट्राइफेक द्वारा हुडको से 900 करोड़ का ऋण प्राप्त करने के लिए ऋण राशि को प्रतिभूतित करने के लिये शासकीय प्रत्याभूति जारी करने का अनुमोदन के निर्णय प्रमुख हैं.

शासन द्वारा सभी औद्योगिक केंद्र विकास निगमों को औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए हुडको एवं वित्तीय संस्थाओं से ऋण प्राप्त करने के लिए राज्य शासन द्वारा गांरटी प्रदान करने का निर्णय लिया गया है. मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की अध्यक्षता में आज संपन्न बैठक में बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा आद्योगिक क्षेत्र में निवेश का बढ़ावा देने के लिए निरंतर चलाए गए अभियान से औद्योगिक निवेश का अनुकूल वातावरण बना है. आज निर्णय लिया गया कि प्रदेश में अगले 6 वर्ष में चरणबद्ध रूप से 27 स्थानों पर 7675 हैक्टेयर भूमि पर औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया जाएगा. इसके तहत 9 नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास की परियोजना बनाई गयी है. प्रथम चरण में 255 करोड़ की लागत से 761 हैक्टेयर भूमि का विकास किया जाएगा. इसके लिए संबंधित औद्योगिक केंद्र विकास निगमों को 128 करोड़ रुपए की ऋण राशि वित्तीय संस्थाओं से लेने की मंजूरी दी गयी. मंत्रि-परिषद द्वारा आज प्रदेश के प्रमुख औद्यागिक क्षेत्रों में आवश्यक अधोसंरचना विकास का निर्णय भी लिया गया है. प्रदेश में एकेवीएन के 43 औद्योगिक क्षेत्रों और उद्योग विभाग के 185 औद्योगिक क्षेत्रों में 5217 औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं. इन औद्योगिक क्षेत्रों के उन्नयन और आवश्यक अधोसंरचना के लिए अगले तीन वर्ष में चरणबद्व रूप से क्रियान्वयन के लिए वित्तीय संस्थाओं से 190 करोड़ रुपए के ऋण प्राप्त करने का अनुमोदन किया गया.

बनेगा वेजिटेबल हब

नई दिल्ली. सब्जी उत्पादन में बेहतर प्रदर्शन के चलते  मध्यप्रदेश सब्जी केंद्र के रूप में स्थापित होगा. केंद्र सरकार ने सब्जी-केंद्रों के तौर पर सात राज्यों को चुना है.

कृषि मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इन राज्यों का चयन इसलिए किया गया कि सब्जी उत्पादन के मामले में इनका प्रदर्शन अन्य राज्यों के मुकाबले बेहतर रहा है. वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने 2011-12 के बजट-भाषण में घोषणा की थी कि 300 करोड़ रुपये की लागत से सब्जी-केंद्र स्थापित किए जाएंगे. इस योजना को राष्ट्रीय सब्जी पहल का नाम दिया गया है. यह राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का एक हिस्सा है. इस योजना के तहत सब्जी-उत्पादन से लेकर इसकी माकेर्टिंग और खुदरा बिक्री तक तमाम पक्ष शामिल किए जाएंगे. मध्यप्रदेश के अलावा अन्य राज्य हैं- बिहार, गुजरात, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र. इसका मकसद यह है कि संकट के समय भी इन राज्यों से शहरों में सब्जियों की सप्लाई हमेशा बनी रहे.

Related Posts: