शहरों में प्रवेश नहीं कर पाए दूध और सब्जीवाले, पुलिस ने भांजी लाठियां

नवभारत टीम
इंदौर/भोपाल, प्रदेश के अंचलों से, 9 अप्रैल. केंद्र सरकार के खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के विरोध में व्यापारिक संगठनों ने सोमवार से तीन दिन का मध्य प्रदेश बंद बुलाया है. पहले दिन से ही इस बंद का खासा असर नजर आया. प्रदेश में चाय, नाश्ते से लेकर सब्जी व किराना तक की दुकानें बंद हैं.

राज्य के लगभग 50 व्यापारिक संगठनों ने केंद्र सरकार के खाद्य सुरक्षा कानून को काला कानून करार देते हुए सोमवार से तीन दिवसीय बंद का आहवान किया.यह बंद 12 अप्रैल तक चलेगा. व्यापारिक प्रतिनिधि राधेश्याम माहेश्वरी का कहना है कि केंद्र सरकार का यह कानून बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाया गया है. इस कानून से सबसे ज्यादा असर उन छोटे कारोबारियों पर पडऩे वाला है, जो देश की अर्थव्यवस्था को चलाने में मदद करते हैं. व्यापारियों ने कहा कि मिलावट एवं दूषित खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के नाम पर खाद्य सुरक्षा कानून महानगरों को ध्यान में रखकर बनाया गया है.

इससे छोटे व्यवसायी एवं फुटपाथ पर दुकान लगाकर रोजीरोटी चलाने वाले परेशान हो जाएंगे. इंस्पेक्टर राज और शोषण की भी आशंका है. तीन दिवसीय बंद का पहले दिन सुबह से ही असर नजर आ रहा है.चाय-पान से लेकर किराना दुकानें भी बंद है. इसके चलते आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.कई स्थानों पर दूध की अनुपलब्धता के चलते विवाद के हालात बन रहे हैं.

दूध लूटने वालों से कड़ाई

इंदौर. एरोड्रम रोड पर स्थित रिलायंस फ्रेश के बाहर दूध सड़क पर बहा रहे हुड़दंगियों को देख वहं से गुजर रहे एएसपी राकेशसिंह गाड़ी  से उतरे और लट्ठ  लेकर उन लोगों पर पिल पड़े. द्वारकापुरी क्षेत्र में दुकानें बंद  कराने और दूध लूटने निकले एक समूह पर सीएसपी डी.एस. तोमर के साथ मौजूद पुलिसबल ने लाठियां भंजी.

सतना-रीवा बंद, सिंगरौली पन्ना में खुली रहीं दुकानें

सतना.  केन्द्र सरकार द्वारा लागू किए गए खाद्ïय सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 एवं नियम 2011 के विरोध में तीन दिनी प्रदेश व्यापी बंद के पहले दिन आज विन्ध्य क्षेत्र में मिला जुला असर दिखा.रीवा और सतना में जहां लोग चाय के लिए तरस गए वहीं सिंगरौली, सीधी व पन्ना में सभी दुकाने पूर्व की भांति ही खुली रहीं.
सतना में सुबह हड़ताल में शामिल व्यापारी संगठनों ने बाजार में जुलूस नकाला और दुकानें बंद कराईं. इस दौरान किराना दुकाने, होटल, रेस्टोरेन्ट, डेयरी, गल्ला, डिस्ट्रीब्यूटर्स, पैकेजर्स एवं ट्रान्सपोर्टरों ने अपना कारोबार तो बंद रखा ही फुटपाथी चाय व पान के ठेले भी बंद रहे. बाहर से आने वाले लोगों को बाजार में चाय नास्ता भी नसीब नहीं हुआ.

रीवा कार्यालय के अनुसार वहां भी खान-पान की सभी दुकाने बंद रहीं. हालांकि बस स्टैण्ड में फल व नास्ते की कुछ दुकाने खुली रहीं पर उनकी संख्या नहीं के बराबर रही. सीधी जिले में बंद का मिला जुला असर देखने को मिला वहीं पन्ना तथा सिंगरौली जिले के बाजार पूर्व दिनों की भांति ही खुले रहे. यहां के व्यापारियों को यह भी पता नहीं है कि आज कोई बंद भी आयोजित है.

आक्रोशितों ने सड़क पर ढोला दूध

व्यापारियों ने महाबंद  का पूरे राज्य में व्यापक असर देखा गया. प्रमुख बाजारों में ही नहीं,गली-मोहल्लों में दुकानें बंद रखी गई. जो दुकानें खुली देखी गई, उनको भी बंद करवाया गया. कहीं भी दूध की सप्लाय नहीं होने दी. इंदौर के  अलावा आपास के  इलाकों बदनावर, खरगोन, धार, देवास, झाबुआ, बड़वानी,बड़वाह, सहित पूरे मालवा में यही रंग नजर आया. अंचल के इन गांवों से दूध जैसी आवश्यक वस्तु बाहर नहीं निकलने दी गई. वाहनों से दूध के कैन उतारकर दूध सड़क पर फेंक दिया गया.

रिलायंस फ्रेश पर पथराव

इंदौर के विजयनगर स्थित रिलायंस फ्रेश दुकान पर बंद समर्थकों ने पत्थर बरसाए. उल्लेखनीय है कि रिलायंस की दुकानें बंद के दौरान खुली रखी  गई हैं.

खुले रहे मॉल

बंद के दौरान इंदौर-भोपाल समेत प्रदेश के नगरों में स्थापित मॉल्स में खासी चहल पहल देखी गई. इंदौर के कुछ मॉल्स में स्थित दुकानें खुली थीं. साथ ही, जो लोग पिछले दो दिन में आवश्यक सामग्री की खरीदारी नहीं कर पाए, वे इन माल्स से खरीदारी करते नजर आए.

बिजली विरोधी आंदोलन बेअसर

व्यापारियों का आंदोलन जहां जनांदोलन बन गया, वहीं आज कांग्रेस का अंादोलन बेअसर रहा.  कांग्रेसियों ने आज बिजली दर वृद्धि के विरोध में प्रदेशव्यापी अंदोलन  का आहांन  किया था, लेकिन पूरे प्रदेश में कहीं पर भी आंदोलन का असर नहीं नजर आया.  केवल भोपाल में जिला अध्यक्ष पीसी शर्मा के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने विद्युत मंडल पर पूतला फूंकने का प्रयास किया और उन्हें पुलिस की लाठियां खानी पड़ीं. इसी तरह नियमितीकरण को लेकर गुरूजीयों ने आज प्रदेशभर में ट्रेनें रोककर यातायात ठप करने  का ऐलान किया था.

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